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स्वामित्व योजना में ग्राम समाज की जमीन होगी कब्जा मुक्त
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‘स्वामित्व योजना में ग्राम समाज की भूमि होगी कब्जा मुक्त’
डिजिटल अभिलेख में सरकारी और निजी भूमि के अभिलेख किए जाएंगे दर्ज
शिवेंद्र सिंह
लोटन। अपने घर, खेत के पास स्थित सरकारी जमीन जैसे पोखरा, तालाब, खलिहान आदि को निजी संपत्ति की तरह लोग अब इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर भी कब्जेदारी का मोह छोड़ना होगा। यह बात उप जिलाधिकारी उमेश चंद्र निगम ने बुधवार को लोटन में बांध के निरीक्षण के दौरान ‘अमर उजाला’ को बताईं।
उन्होंने बताया कि केंद्र के सहयोग से स्वामित्व योजना शुरू हो की जा रही है। इसमें ग्रामीण आबादी के अंतर्गत सरकारी व निजी परिसंपत्तियों को अलग-अलग चिह्नांकित कर डिजिटल अभिलेख तैयार किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान नेतवर ग्राम के जितेंद्र बहादुर सिंह ने उनसे ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत की थी। एसडीएम ने बताया कि योजना के तहत डिजिटल अभिलेख तैयार कर ग्रामीणों को इसका प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे वे अपने मकान व आबादी के भूखंड पर भी बैंक ऋण ले सकेंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग घर के बगल के ग्राम समाज, खलिहान, सड़क, तालाब, नाले व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन को अपनी निजी संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे हैं। कई दशक पुराने तालाबों को पाटकर कब्जा किया गया। कई जगह स्थायी या अस्थायी निर्माण कर लिए गए हैं। कागज में अब भी सार्वजनिक भूखंड व तालाब उपलब्ध हैं, लेकिन जमीन पर उनका अता-पता नहीं है। इस तरह के तमाम भूमि विवाद भी चल रहे हैं। स्वामित्व योजना से ग्राम समाज के भीतर सरकारी भूखंड पर ऐसे कब्जों की पोल खुलने जा रही है। सभी जिलों को निर्देश भेज दिए गए हैं। कई जिलों मे पायलट प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुका है।
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पहले चरण में 54,022 गांव स्वामित्व योजना में शामिल
प्रदेश सरकार ने पहले चरण में 54,022 गांवों को स्वामित्व योजना में शामिल किया है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण ड्रोन तकनीक से होगा। जिला स्तर पर डीएम के अलावा राजस्व परिषद व शासन स्तर पर नियमित रूप से इसकी प्रगति की मॉनिटरिंग की जाएगी।
ग्राम पंचायत को लाभ संपत्ति विवाद से मुक्ति
अपने क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध होगी। इससे विकास योजना बनाने में मदद मिलेगी। निजी व ग्राम समाज के बीच भूमि विवाद में कमी आएगी। प्रत्येक संपत्ति की सीमा व क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से निजी संपत्ति के विवाद भी कम होंगे। प्रत्येक संपत्ति धारक को संपत्ति का प्रमाणपत्र व भूमि स्वामित्व प्राप्त हो सकेगा।
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डिजिटल अभिलेख में सरकारी और निजी भूमि के अभिलेख किए जाएंगे दर्ज
शिवेंद्र सिंह
लोटन। अपने घर, खेत के पास स्थित सरकारी जमीन जैसे पोखरा, तालाब, खलिहान आदि को निजी संपत्ति की तरह लोग अब इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। सार्वजनिक उपयोग की जमीन पर भी कब्जेदारी का मोह छोड़ना होगा। यह बात उप जिलाधिकारी उमेश चंद्र निगम ने बुधवार को लोटन में बांध के निरीक्षण के दौरान ‘अमर उजाला’ को बताईं।
उन्होंने बताया कि केंद्र के सहयोग से स्वामित्व योजना शुरू हो की जा रही है। इसमें ग्रामीण आबादी के अंतर्गत सरकारी व निजी परिसंपत्तियों को अलग-अलग चिह्नांकित कर डिजिटल अभिलेख तैयार किया जाएगा। निरीक्षण के दौरान नेतवर ग्राम के जितेंद्र बहादुर सिंह ने उनसे ग्राम समाज की भूमि पर अवैध कब्जा किए जाने की शिकायत की थी। एसडीएम ने बताया कि योजना के तहत डिजिटल अभिलेख तैयार कर ग्रामीणों को इसका प्रमाणपत्र दिया जाएगा। इससे वे अपने मकान व आबादी के भूखंड पर भी बैंक ऋण ले सकेंगे।
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ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम लोग घर के बगल के ग्राम समाज, खलिहान, सड़क, तालाब, नाले व सार्वजनिक उपयोग की अन्य जमीन को अपनी निजी संपत्ति की तरह उपयोग कर रहे हैं। कई दशक पुराने तालाबों को पाटकर कब्जा किया गया। कई जगह स्थायी या अस्थायी निर्माण कर लिए गए हैं। कागज में अब भी सार्वजनिक भूखंड व तालाब उपलब्ध हैं, लेकिन जमीन पर उनका अता-पता नहीं है। इस तरह के तमाम भूमि विवाद भी चल रहे हैं। स्वामित्व योजना से ग्राम समाज के भीतर सरकारी भूखंड पर ऐसे कब्जों की पोल खुलने जा रही है। सभी जिलों को निर्देश भेज दिए गए हैं। कई जिलों मे पायलट प्रोजेक्ट शुरू भी हो चुका है।
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पहले चरण में 54,022 गांव स्वामित्व योजना में शामिल
प्रदेश सरकार ने पहले चरण में 54,022 गांवों को स्वामित्व योजना में शामिल किया है। राजस्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि आबादी क्षेत्रों का सर्वेक्षण ड्रोन तकनीक से होगा। जिला स्तर पर डीएम के अलावा राजस्व परिषद व शासन स्तर पर नियमित रूप से इसकी प्रगति की मॉनिटरिंग की जाएगी।
ग्राम पंचायत को लाभ संपत्ति विवाद से मुक्ति
अपने क्षेत्राधिकार में संपत्ति धारण करने वालों की नवीनतम जानकारी उपलब्ध होगी। इससे विकास योजना बनाने में मदद मिलेगी। निजी व ग्राम समाज के बीच भूमि विवाद में कमी आएगी। प्रत्येक संपत्ति की सीमा व क्षेत्रफल सुनिश्चित होने से निजी संपत्ति के विवाद भी कम होंगे। प्रत्येक संपत्ति धारक को संपत्ति का प्रमाणपत्र व भूमि स्वामित्व प्राप्त हो सकेगा।