फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   If the police were active on the death of the newborn, then the cases of throwing were reduced

नवजात की मौत पर सक्रिय होती पुलिस तो कम होते फेंकने के मामले

Thu, 03 Feb 2022 11:18 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 11:18 PM IST
विज्ञापन
If the police were active on the death of the newborn, then the cases of throwing were reduced
नवजात की मौत पर सक्रिय होती पुलिस तो कम होते फेंकने के मामले
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। जन्म लेने वाले हर इंसान को जीने का अधिकार है। उसे समाज में सम्मान और हक दिलाने का कानूनी प्रावधान है। इसमें अगर कोई दखल देता है, हक छीनने की कोशिश करता है या फिर जान मारता है तो वह अपराध की श्रेणी में आता है। यह कहना है कानून के जानकारों का।
इसके बावजूद, जिले में नवजात की जिंदगी छीन ली जाती है। कहीं हत्या करके फेंक दिया जाता है तो कहीं जन्म के बाद, झाड़ी और खुले स्थान पर छोड़ दिया जाता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए पुलिस आगे नहीं आ ही है। इस लिए ऐसे मामले जिले में बढ़ रहे हैं। अगर पुलिस सक्रिय होती तो कोई, किसी नवजात को मारने का दुस्साहस नहीं करता।
विज्ञापन

आंकड़ों के मुताबिक, पिछले आठ वर्ष में नवजात के फेंके जाने के 50 मामले में सामने आ चुके हैं। अधिकांश ऐसे मामले हैं, जो सामने नहीं आते हैं। ढेबरुआ थाना क्षेत्र के गडरखा गांव के टोला मोहनकोली में नवजात का शव मिलने के प्रकरण ने एक बार फिर पुरानी घटनाओं की याद ताजा कर दी है। साथ ही पुलिस की संवेदनहीनता को भी सामने ला दिया है। पांच दिन बाद भी ढेबरुआ पुलिस न तो केस दर्ज की और न ही कार्रवाई के लिए आगे आई, जबकि तहरीर देने वाले थाने तक पहुंचे। पुलिस कार्रवाई के बजाय, मामले को टाल रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जन्म के बाद झाड़ी में फेंका, इलाज के दौरान तोड़ा दम
खेसरहा थाना क्षेत्र के कोहड़ी गांव के पास झाड़ी में एक मार्च 2020 को नवजात बच्ची को फेंका गया था। खेत गई महिला ने रोने की आवाज सुनी तो लोगों को जानकारी दी। चाइल्ड लाइन की मदद से उसे अस्पताल पहुंचाया गया, मगर वह बच न सकी। पांच दिनों तक अमर उजाला ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो पुलिस जागी और चौकीदार की तहरीर पर केस दर्ज किया।
नवजात को मिट्टी में दबाया गया था
जोगिया कोतवाली क्षेत्र के सोनौरा गांव के टोला निपनिया में 26 मई 2020 को खेत गई महिला को नवजात के रोने की आवाज सुनाई पड़ी। करीब गई तो देखी कि नवजात को मिट्टी में दबाया गया था। उसका मुंह दिखाई पड़ रहा था। इसके बाद महिला ने उसे सीने से लगा लिया। पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया। सात दिन चले इलाज के बाद लिखा-पढ़ी करके उसे शिशु बालगृह गोंडा भेजा गया।
नहर के किनारे नवजात को फेंका था
भवानीगंज थाना क्षेत्र के बिथरिया गांव के पास आठ सितंबर 2020 नहर के पास पुलिया के किनारे एक नवजात के रोने की आवाज आई। उसी गांव रहने वाली 75 वर्षीय महिला ने उसे गोद में ले लिया। घर लाई तो मामले की जानकारी चाइल्ड लाइन को हुई। वे नवजात को लेकर जिला अस्पताल चले आए। नौ दिन चले इलाज के बाद 18 नवंबर को एडीएम ने लिखा-पढ़ी करके नवजात को बालगृह गोंडा पालन पोषण के लिए भेज दिया गया। हालांकि, महिला उसके पालन पोषण करने के लिए तैयार थी।
जानवरों ने नोच लिया था सिर, नहीं बची जान
उसका थाना क्षेत्र के माधवापुर गांव के पास वर्ष 2018 में खेत में नवजात बच्ची रोती हुई जख्मी हाल में मिली थी। इसकी जानकारी पुलिस को दी गई। उसने उसे जिला अस्पताल पहुंचाया, मगर सिर जानवरों के नोच खाने के कारण छह घंटे चले इलाज दौरान उसने दम तोड़ दिया। पुलिस अस्पताल तक पहुंचाकर पीछे हट गई। न केस दर्ज किया, न तहकीकात की।
24 घंटे रख सकते हैं चाइल्ड लाइन के लोग
लावारिस मिले बच्चों को चाइल्ड लाइन के जरिए स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाता है। बच्चा अगर स्वस्थ है तो 24 घंटे तक उसे सुरक्षित रखा जा सकता है। उसके बाद उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया जाता है। वहां से आदेश मिलने के बाद राजकीय शिशु गृह को सुपुर्द कर दिया जाता है। कोर्ट के आदेश के बिना, बच्चे को किसी को सुपुर्द नहीं किया जाता है।
- सुनील कुमार उपाध्याय, समन्वयक चाइल्ड लाइन
मर रही मानवता
जो जन्म लेता है, उसे जीने का पूरा अधिकार है। अगर वह किन्हीं परिस्थितियों में मर जाता है तो चाहे नवजात हो या फिर बड़ी उम्र का व्यक्ति, उसका अंतिम संस्कार होना चाहिए। अगर नवजात है तो भी उसको दफन करना चाहिए। लोग बच्चे को छोड़ते या फेंकते हैं, यह मानवता के खत्म होने का प्रमाण है। इसमें समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है। साथ ही पुलिस को पोस्टमार्टम के साथ ही केस दर्ज करके कार्रवाई करनी चाहिए। अगर शिथिलता की गई तो यह गलत है।

- डॉ. रघुवर प्रसाद पांडेय, समाजशास्त्री, महिला पीजी कॉलेज बस्ती
सुराग लगाने का दावा
ढेबरुआ पुलिस का दावा है कि गडरखा गाव में नवजात का शव मिलने के मामले में पुलिस सुराग लगा रही है। जबकि, पांच दिन भी बाद उसकी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। इस मामले में ढेबरुआ थानाध्यक्ष ब्रह्मा गौड़ ने बताया कि पुलिस की टीम गांव के लोगों से पूछताछ कर रही है। इस मामले में जल्द ही पर्दाफाश होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed