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उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो करेंगे आंदोलन
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 11 Feb 2016 11:33 PM IST
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ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारी संघ की संयुक्त बैठक गुरुवार को विकास भवन स्थिति अंबेडकर सभागार में हुई। इस दौरान विभिन्न समस्याओं पर चर्चा हुई और उसके निदान के लिए पांच सूत्री ज्ञापन डीएक डॉ. सुरेंद्र कुमार को सौंपा गया।
डीएम को सौंपें ज्ञापन में जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत संबंधित विभाग द्वारा लाभार्थियों की पात्रतावार सूंची का प्रकाशन सार्वजनिक रूप से कर दिया गया है और उसके अनुरूप खद्यान्न का आवंटन एवं वितरण भी किया जा चुका है।
जिसके बाद सूची का सत्यापन उनके माध्यम से कराने के बावजूद कोटेदारों से कराया गया और इसकी सूचना तक उन्हें नहीं दी गई। ऐसी दशा में उक्त कार्य उनके द्वारा कराया जाना व्यवहारिक नहीं है और वे इसका वहिष्कार करेंगे।
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ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों के पास विधवा, विकलांग, वृद्धा, समाजवादी पेंशन, मनरेगा जैसे तमाम कार्य हैं। कार्य की अधिकता के बावजूद वे पूरे मनोयोग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में निर्मित हो रहे शौचालयों की प्रगति रिपोर्ट बहुत अच्छी है। बावजूद इसके अधिकारियों द्वारा वेतन रोकने जैसी उत्पीडनात्मक कार्रवाई की जारही है। जिन कर्मचारियों का वेतन रोका गया है उसे एक सप्ताह के भीतर आहरित किया जाए।
ज्ञापन में जिला पंचायत अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि वे मातहतों से अपमानजनक व्यवहार करते हैं। यदि उनकी भाषाशैली में सुधार नहीं हुआ तो वे कड़ा रूख अपनाने को बाध्य होंगे। वहीं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने के बाद उनका धनादोहन किया जा रहा है।
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 23 फरवरी तक कर्मचारियो का वेतन आहरण नहीं किया गया तो 24 जनवरी को विकास भवन परिसर में वे बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन व कार्य वहिष्कार करने को बाध्य होंगे। इस दौरान शैलेंद्र कुमार गुप्ता, सुजीत जायसवाल, परमात्मा यादव, आशुतोष मिश्रा, केशभान यादव, विनय कुमार, प्रेम नारायन, कपिलदेव यादव, शमशुल्लाह खां, गायत्री देवी, विजय मिश्रा, वसीकुर्रहमान, विनोद चौधरी, शिवकुमार मौर्या आदि मौजूद रहे।
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डीएम को सौंपें ज्ञापन में जिलाध्यक्ष वीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत संबंधित विभाग द्वारा लाभार्थियों की पात्रतावार सूंची का प्रकाशन सार्वजनिक रूप से कर दिया गया है और उसके अनुरूप खद्यान्न का आवंटन एवं वितरण भी किया जा चुका है।
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जिसके बाद सूची का सत्यापन उनके माध्यम से कराने के बावजूद कोटेदारों से कराया गया और इसकी सूचना तक उन्हें नहीं दी गई। ऐसी दशा में उक्त कार्य उनके द्वारा कराया जाना व्यवहारिक नहीं है और वे इसका वहिष्कार करेंगे।
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ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों के पास विधवा, विकलांग, वृद्धा, समाजवादी पेंशन, मनरेगा जैसे तमाम कार्य हैं। कार्य की अधिकता के बावजूद वे पूरे मनोयोग से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत ग्राम पंचायतों में निर्मित हो रहे शौचालयों की प्रगति रिपोर्ट बहुत अच्छी है। बावजूद इसके अधिकारियों द्वारा वेतन रोकने जैसी उत्पीडनात्मक कार्रवाई की जारही है। जिन कर्मचारियों का वेतन रोका गया है उसे एक सप्ताह के भीतर आहरित किया जाए।
ज्ञापन में जिला पंचायत अधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा गया कि वे मातहतों से अपमानजनक व्यवहार करते हैं। यदि उनकी भाषाशैली में सुधार नहीं हुआ तो वे कड़ा रूख अपनाने को बाध्य होंगे। वहीं कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने के बाद उनका धनादोहन किया जा रहा है।
बैठक के दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि 23 फरवरी तक कर्मचारियो का वेतन आहरण नहीं किया गया तो 24 जनवरी को विकास भवन परिसर में वे बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन व कार्य वहिष्कार करने को बाध्य होंगे। इस दौरान शैलेंद्र कुमार गुप्ता, सुजीत जायसवाल, परमात्मा यादव, आशुतोष मिश्रा, केशभान यादव, विनय कुमार, प्रेम नारायन, कपिलदेव यादव, शमशुल्लाह खां, गायत्री देवी, विजय मिश्रा, वसीकुर्रहमान, विनोद चौधरी, शिवकुमार मौर्या आदि मौजूद रहे।