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Siddharthnagar News: कब्जामुक्त हो सरकारी जमीन तो खुले विकास का रास्ता

Tue, 17 Oct 2023 11:13 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 17 Oct 2023 11:13 PM IST
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If government land is free from encroachment then the path of development will open.
जिले के पांचों तहसीलों में अवैध कब्जे में है सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि
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विकास कार्यों के लिए ढूंढे नहीं मिल रही सरकारी जमीन, शुरू हुई कार्रवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के पांचों तहसीलों में कई सालों से सैकड़ों एकड़ सरकारी भूमि कब्जा में है। इससे कई विकास कार्यों के लिए जमीन खोजने पर भी नहीं मिल रही है। शहर, कस्बों व गांवों में स्कूल, अस्पताल, पंचायत भवन व जलनिगम की पानी की टंकी के लिए भूमि नहीं मिलने से निर्माण नहीं हो पा रहा है। यहां तक कि जिला अस्पताल व बस अड्डा समेत कई बड़े प्रोजेक्ट भूमि नहीं मिलने से अटके पड़े हैं।
सरकारी भूमियों पर हुए कब्जे की स्थिति पर नजर दौड़ाएं तो नौगढ़, बांसी, इटवा, शोहरतगढ़ व डुमरियागंज तहसीलों में कई मामले हैं, जिनका निस्तारण नहीं हो सका है। देवरिया हत्याकांड के बाद एंटी भू-माफिया पोर्टल पर शिकायतों की भरमार के बाद हुई कार्रवाई में दो मामले में 44 बीघा जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है। जो बड़े तादाद में कब्जा की गई सरकारी भूमि के सापेक्ष नाकाफी है।
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कब्जा मुक्त कराने में असफल लेखपाल हुआ था निलंबित
तहसील नौगढ़ के बर्डपुर नंबर 10 टोला देउरा में पंचायत भवन के बगल में आठ बीघा सरकारी भूमि अवैध कब्जे में है। 11 दिन पहले मौके पर पहुंचे डीएम पवन अग्रवाल ने लापरवाही बरतने के आरोप में लेखपाल को निलंबित कर दिया था, जबकि इस गांव में सरकारी भूमि नहीं मिलने के कारण अस्पताल आदि महत्वपूर्ण भवन का निर्माण नहीं हो सका है। सरकारी भूमि पर कोटे की सरकारी दुकान का निर्माण प्रस्तावित है। ग्राम प्रधान शांति चौधरी का कहना है कि अगर यह भूमि खाली हो जाए तो कोटे की दुकान बनाने के साथ ही ग्रामीणों के उपयोग के लिए विवाह घर का निर्माण किया जा सकता है।
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कस्तूरबा विद्यालय के चिह्नित भूमि नहीं हुई मुक्त
तहसील नौगढ़ में ही पकड़ी-जोगिया मार्ग पर महदेवा तिवारी गांव में करोड़ों रुपये कीमती 14 बीघा सरकारी गलत तरीके से दूसरे के नाम खतौनी में दर्ज कर दी गई थी। ग्रामीणों के विरोध पर एसडीएम ने इसे दुरुस्त करने की प्रक्रिया शुरू की तो कब्जाधारक न्यायालय चला गया। जहां से एसडीएम को दूसरे पक्ष को सुनकर मामले का निस्तारण करने का आदेश दिया गया है। वर्तमान में यह मामला एसडीएम के पास से स्थानांतरित होकर डीएम के पास लंबित है। यह सरकारी भूमि पर कस्तूरबा बालिका विद्यालय के निर्माण के लिए चिह्नित की गई थी, कब्जामुक्त नहीं होने के कारण यहां निर्माण नहीं हो सका।
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बांसी में कब्जे की शिकार हो रही खाली सरकारी भूमि
बांसी। नगर में अंग्रेजी हुकूमत में बनी नील कारखाना समेत अस्पताल व स्कूल की कई बीघा सरकारी भूमि कब्जे की शिकार हो रही है, जिस पर विकास कार्य हो सकता है। नगर में खेलकूद का मैदान नहीं है, यहां मिनी स्टेडियम की आवश्यकता है, कन्वेंशन सेंटर की आवश्यकता है। जिसके लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। जबकि कुछ सरकारी भूमि पर कुछ लोगों का अनधिकृत कब्जा है और कुछ निष्प्रयोज्य पड़ी है। व्यापार मंडल अध्यक्ष घनश्याम जायसवाल का कहना है कि सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराकर विकास कार्य कराया जाना चाहिए। राप्तीनगर वार्ड में नील मथान व डहर ताल के पास बंजर भूमि पर विकास के कार्य हो सकते हैं।
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सरकारी भूमि के लिए शोहरतगढ़ में हो चुका है विवाद
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत जुगडिहवा में सात मई 2022 को सरकारी भूमि में पिलर व मिट्टी पाटने के विवाद दो पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई थी। इसमें दो महिला समेत सात लोग चोटिल हुए थे, जिसमें दो लोग गंभीर घायल हुए थे। प्रधान मोहन चौधरी सरकारी जमीन पर पिलर निर्माण कर मिट्टी गिरा रहा था, जिसके बाद दूसरे पक्ष से विवाद हुआ था। पुलिस ने दोनों पक्षों पर केस दर्ज कर शांति व्यवस्था के लिए गांव में पुलिस तैनात की गई थी।
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बांसी में कब्जामुक्त हुई सरकारी भूमि
बांसी तहसील क्षेत्र के हाटा खास गांव में 11 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि गलत तरीके से खतौनी में नाम दर्ज करा कब्जा करने की शिकायत ग्रामीणों ने की थी। जिसके बाद प्रशासन ने खतौनी में नाम खारिज करते हुए इस सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त कराया। इसके बाद बांसी तहसील के ही प्रतापपुर गांव में ताल की 19 बीघा सरकारी भूमि खतौनी में गलत तरीके से अपने नाम करा लेने वालों पर कार्रवाई करते हुए एसडीएम प्रमोद कुमार ने खतौनी से नाम हटाने के साथ ही संबंधित भूमि को कब्जामुक्त कराया।
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शोहरतगढ़ में खाली हो सकती है 100 एकड़ भूमि: विधायक
विधायक विनय वर्मा ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बताया था कि विधान सभा क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है, जबकि विकास के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। शोहरतगढ़ एवं बढ़नी में बस स्टेशन, आवासीय बालिका विद्यालय, मिनी स्टेडियम के लिए प्रशासन जमीन की तलाश नहीं कर पाया है। क्षेत्र की जनता से मिली जानकारी के अनुसार शोहरतगढ़ में 100 एकड़ से अधिक सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा है। जमीन मिलेगी तभी, विकास की गति तेज होगी। सरकार विकास के लिए पर्याप्त बजट दे रही है, लेकिन योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए भूमि उपलब्ध होनी चाहिए।

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वर्जन
नौगढ़ एवं बर्डपुर ब्लॉक में अवैध कब्जे की भूमि शिकायत वाली जमीनों की पैमाइश होगी। जहां भी अवैध कब्जा है, उसे खाली कराकर विकास के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
डॉ. ललित कुमार मिश्र, एसडीएम
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