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Siddharthnagar News: फीकी रहेगी रोजगार सेवकों की होली, छह माह से नहीं मिला मानदेय
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-भनवापुर ब्लाॅक क्षेत्र में तैनात 79 रोजगार सेवकों के सामने संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के रोजगार सेवकों को छह माह से मानदेय नहीं मिला है। परिवार की जरूरतों को पूरा करते-करते रोजगार सेवक कर्जदार हो गए हैं। इस होली में भी मानदेय नहीं मिलने से रोजगार सेवकों की चिंता और बढ़ गई है। उनकी चिंता है कि होली कैसे मनाएंगे। बच्चों का रंग गुलाल कहां से खरीदेंगे। मेहमानों व दोस्तों को घर बुलाकर कैसे मुंह मीठा कराएंगे।
मनरेगा कार्यों के क्रियान्वयन के लिए दिसंबर 2007 में प्रत्येक गांव में रोजगार सेवकों की भर्ती की गई। मौजूदा समय में भनवापुर ब्लाॅक में 79 रोजगार सेवक कार्यरत हैं। नियुक्ति के समय रोजगार सेवकों का मानदेय दो हजार रुपये थे, अब बढ़कर 10 हजार रुपये हो गए हैं, लेकिन समय से भी मानदेय नहीं मिलता है। रोजगार सेवक संघ के ब्लाॅक अध्यक्ष राजकुमार चौधरी ने बताया कि महंगाई कई गुना बढ़ गई है, लेकिन उसकी अपेक्षा मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। इतना ही नहीं जो मानदेय मिलना चाहिए, वह भी समय से नहीं मिल रहा है।
उपाध्यक्ष अजय यादव ने बताया कि छह माह से मानदेय नहीं मिला है। रोजगार सेवकों को कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। कई ऐसे रोजगार सेवक हैं जो पैसे के अभाव में परिवार के लोगों को उपचार नहीं करा पा रहे हैं। बच्चों की फीस नहीं जमा कर पा रहे हैं। इधर अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। बच्चों के लिए नई किताबें, ड्रेस, जूता, बैग आदि कहां से लिया जाय इसकी चिंता से रात को नींद नहीं आ रही है।
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इस दौरान संदीप तिवारी, संगीता, माधुरी चौधरी, ओम प्रकाश चौधरी, राजमणि मौर्य, अखिलेश श्रीवास्तव, आलोक चौधरी, जय कृष्ण ओझा आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। स्थानीय ब्लाॅक क्षेत्र के रोजगार सेवकों को छह माह से मानदेय नहीं मिला है। परिवार की जरूरतों को पूरा करते-करते रोजगार सेवक कर्जदार हो गए हैं। इस होली में भी मानदेय नहीं मिलने से रोजगार सेवकों की चिंता और बढ़ गई है। उनकी चिंता है कि होली कैसे मनाएंगे। बच्चों का रंग गुलाल कहां से खरीदेंगे। मेहमानों व दोस्तों को घर बुलाकर कैसे मुंह मीठा कराएंगे।
मनरेगा कार्यों के क्रियान्वयन के लिए दिसंबर 2007 में प्रत्येक गांव में रोजगार सेवकों की भर्ती की गई। मौजूदा समय में भनवापुर ब्लाॅक में 79 रोजगार सेवक कार्यरत हैं। नियुक्ति के समय रोजगार सेवकों का मानदेय दो हजार रुपये थे, अब बढ़कर 10 हजार रुपये हो गए हैं, लेकिन समय से भी मानदेय नहीं मिलता है। रोजगार सेवक संघ के ब्लाॅक अध्यक्ष राजकुमार चौधरी ने बताया कि महंगाई कई गुना बढ़ गई है, लेकिन उसकी अपेक्षा मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। इतना ही नहीं जो मानदेय मिलना चाहिए, वह भी समय से नहीं मिल रहा है।
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उपाध्यक्ष अजय यादव ने बताया कि छह माह से मानदेय नहीं मिला है। रोजगार सेवकों को कर्ज लेकर परिवार का भरण पोषण करना पड़ रहा है। कई ऐसे रोजगार सेवक हैं जो पैसे के अभाव में परिवार के लोगों को उपचार नहीं करा पा रहे हैं। बच्चों की फीस नहीं जमा कर पा रहे हैं। इधर अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा है। बच्चों के लिए नई किताबें, ड्रेस, जूता, बैग आदि कहां से लिया जाय इसकी चिंता से रात को नींद नहीं आ रही है।
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इस दौरान संदीप तिवारी, संगीता, माधुरी चौधरी, ओम प्रकाश चौधरी, राजमणि मौर्य, अखिलेश श्रीवास्तव, आलोक चौधरी, जय कृष्ण ओझा आदि मौजूद रहे।