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हिंदी बने जन-जन की भाषा, यही है अभिलाषा 14-43-13
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हिंदी बने जन-जन की भाषा, यही है अभिलाषा
‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में बोले शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदोस्तां हमारा... गीत आज भी गूंज रही है। ‘अमर उजाला’ की ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम से जुड़े शिक्षकों ने हुंकार भरी। शिक्षक दिवस पर कहा कि हिंदी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधे हैं और सबको नई पहचान देने का काम कर रही है। हमें गर्व है कि हिंदी हमारे रोम-रोम में बसी है। आज उन्हें जो मुकाम हासिल हुआ है वह हिंदी भाषा की देन है।
आदर्श लघु माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की प्रधानाचार्य राजकुमारी पांडेय कहती हैं कि हिंदी भाषा का सीधा संबंध संस्कार और सभ्यता से है। विश्व में जितने भी देश अग्रणी हैं, वे अपनी भाषा की वजह से ही है। यदि हमें भारत को विश्व में सिरमौर बनाना है तो हिंदी को मजबूत करना होगा। बच्चे भाषा का संस्कार पहले घर से ही सीखते हैं, फिर स्कूल में। जिस तरह से हमारा देश प्रगति कर रहा है, उसी प्रकार से हमें अपने संस्कार को आगे बढ़ाना।
नौगढ़ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पटनी जंगल में प्रधानाध्यापक दीपेंद्र पांडेय का कहना है कि सभी को मिलकर इस पर विचार करना पड़ेगा, सोचना पड़ेगा कि राष्ट्र उन्नति और भाषा हिंदी की उन्नति कैसे संभव है, इसमें रोजगार परक शिक्षा और रोजगार की संभावना कैसे तलाशना है। हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो पूरे देश को सूत्रबद्ध कर सकती है। सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बेलौहा की प्रधानाध्यापक संध्या कबीर का कहना है कि राजभाषा हिंदी का सम्यक ज्ञान देश के सभी नागरिकों को होना चाहिए। इसकी शुरुआत हम अपने स्कूलों से ही कर सकते हैं, ताकि देश के भावी नागरिक अपनी मातृभाषा से भलीभांति परिचित हो सके। सुझाव भी दिया कि हिंदी विषय पर स्कूलों में प्रतियोगिताएं कराई जाएं और वह लगातार अपने स्कूल में आयोजन भी करते हैं। जिसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं। सदर तहसील के प्राथमिक विद्यालय गोवर्धनपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक साक्षी श्रीवास्तव का कहना है कि हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए जन-जन में भाषा-शुचिता के लिए सतत प्रयास करने होंगे। देश में हिंदी के प्रख्यात भाषाविदों को एक मंच पर लाकर हिंदी के मानकीकरण के अधूरे कार्य को पूर्ण करने जैसी पहल करनी होगी।
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‘अमर उजाला’ के ‘हिंदी हैं हम’ अभियान में बोले शिक्षक
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। हिंदी हैं हम वतन हैं, हिंदोस्तां हमारा... गीत आज भी गूंज रही है। ‘अमर उजाला’ की ‘हिंदी हैं हम’ मुहिम से जुड़े शिक्षकों ने हुंकार भरी। शिक्षक दिवस पर कहा कि हिंदी राष्ट्र को एक सूत्र में बांधे हैं और सबको नई पहचान देने का काम कर रही है। हमें गर्व है कि हिंदी हमारे रोम-रोम में बसी है। आज उन्हें जो मुकाम हासिल हुआ है वह हिंदी भाषा की देन है।
आदर्श लघु माध्यमिक विद्यालय बर्डपुर की प्रधानाचार्य राजकुमारी पांडेय कहती हैं कि हिंदी भाषा का सीधा संबंध संस्कार और सभ्यता से है। विश्व में जितने भी देश अग्रणी हैं, वे अपनी भाषा की वजह से ही है। यदि हमें भारत को विश्व में सिरमौर बनाना है तो हिंदी को मजबूत करना होगा। बच्चे भाषा का संस्कार पहले घर से ही सीखते हैं, फिर स्कूल में। जिस तरह से हमारा देश प्रगति कर रहा है, उसी प्रकार से हमें अपने संस्कार को आगे बढ़ाना।
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नौगढ़ ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पटनी जंगल में प्रधानाध्यापक दीपेंद्र पांडेय का कहना है कि सभी को मिलकर इस पर विचार करना पड़ेगा, सोचना पड़ेगा कि राष्ट्र उन्नति और भाषा हिंदी की उन्नति कैसे संभव है, इसमें रोजगार परक शिक्षा और रोजगार की संभावना कैसे तलाशना है। हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है, जो पूरे देश को सूत्रबद्ध कर सकती है। सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बेलौहा की प्रधानाध्यापक संध्या कबीर का कहना है कि राजभाषा हिंदी का सम्यक ज्ञान देश के सभी नागरिकों को होना चाहिए। इसकी शुरुआत हम अपने स्कूलों से ही कर सकते हैं, ताकि देश के भावी नागरिक अपनी मातृभाषा से भलीभांति परिचित हो सके। सुझाव भी दिया कि हिंदी विषय पर स्कूलों में प्रतियोगिताएं कराई जाएं और वह लगातार अपने स्कूल में आयोजन भी करते हैं। जिसके सार्थक परिणाम सामने आए हैं। सदर तहसील के प्राथमिक विद्यालय गोवर्धनपुर की प्रभारी प्रधानाध्यापक साक्षी श्रीवास्तव का कहना है कि हिंदी भाषा की समृद्धि के लिए जन-जन में भाषा-शुचिता के लिए सतत प्रयास करने होंगे। देश में हिंदी के प्रख्यात भाषाविदों को एक मंच पर लाकर हिंदी के मानकीकरण के अधूरे कार्य को पूर्ण करने जैसी पहल करनी होगी।
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