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हाईवे बना कमाई वे, धूल फांक रहे लोग
ब्यूरो/अमर उजाला, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 24 Nov 2016 10:19 PM IST
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फतेहाबाद के राोड
- फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। बांसी से नौगढ़ के बीच नेशनल हाईवे का निर्माण अफसरों के लिए ‘कमाई-वे’ हो गया है। ब्याज के खेल में तल्लीन अफसर करोड़ों रुपये खाते में होने के बावजूद मुआवजा देकर भूमि का अधिग्रहण नहीं कर रहे। इससे सड़क निर्माण को रफ्तार नहीं मिल रही है। इस मार्ग पर जनता महीनों से धूल फांक रही है और अफसर मलाई काट रहे हैं। दलील दी जा रही है कि कुछ स्थानों पर विवादों के कारण भूमि का अधिग्रहण नहीं हो पा रहा। उधर, कार्यदाई संस्था जमीन न मिलने से निर्माण में देरी का रोना रो रही है। अफसरशाही के बीच जकड़ी इस परियोजना को शुरू हुए दो साल बीतने को हैं, मगर सड़क आधी-अधूरी भी नहीं बन पाई है।
जनवरी 2015 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नेशनल हाईवे-233 के अंतर्गत ककरहवा-रुधौली की सड़क परियोजना का लोकार्पण किया था। दावा किया गया था कि यह सड़क मार्च 2017 तक पूरी हो जाएगी। काम तेजी से शुरू भी हुआ। रुधौली से बांसी और बांसी से सनई तक सड़क का काफी हिस्सा बन भी चुका है। उधर, नौगढ़ कस्बे के दूसरी तरफ भी निर्माण जारी है। मगर सनई से तेतरी बाजार तक के बीच की सड़क पर निर्माण कार्य ठप है। यह वह हिस्सा है, जिस पर जिला मुख्यालय है। यहां फोर लेन प्रस्तावित है।
भीमापार रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज भी बनना है। मगर अब तक यहां काम ही शुरू नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सड़क बनाने के लिए जिला प्रशासन अब तक जमीन ही उपलब्ध नहीं करा पाया है, जबकि भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा का पैसा काफी पहले ही दिया जा चुका है। उधर, जिला प्रशासन के अफसर कार्यदाई संस्था पर देरी का दोष मढ़ रहे हैं। अफसरों की दलील है कि वह अधिग्रहण की कोशिश कर रहे हैं। जैसे-जैसे मुआवजा आ रहा वितरण जारी है। एनएच बस्ती के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके मिश्रा ने बताया कि सड़क निर्माण में देरी क्यों हो रही है हमारे स्तर पर कोई देरी नहीं है।
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हम खुद जल्दी काम खत्म करना चाहते हैं, मगर जिला प्रशासन जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहा। सनई से पुरानी नौगढ़ तक काम ठप रहने के पीछे भूमि की अनुपलब्धता मुख्य कारण है। जैसे-जैसे जमीन मिल रही है, काम हो रहा है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी योगानंद पांडेय ने बताया कि निर्माण में देरी के लिए अधिग्रहण कोई कारण नहीं है। हमारे पास जैसे पैसा आ रहा है, उसे वितरित किया गया है। भीमापार क्षेत्र की जमीन के बदले 40 करोड़ का मुआवजा हाल ही में मिला है। इसका जल्द वितरण होगा। एनएच के अधिकारी इतने सक्रिय हैं तो जहां जमीन खाली है, वहां निर्माण क्यों नहीं कराते।
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जनवरी 2015 में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नेशनल हाईवे-233 के अंतर्गत ककरहवा-रुधौली की सड़क परियोजना का लोकार्पण किया था। दावा किया गया था कि यह सड़क मार्च 2017 तक पूरी हो जाएगी। काम तेजी से शुरू भी हुआ। रुधौली से बांसी और बांसी से सनई तक सड़क का काफी हिस्सा बन भी चुका है। उधर, नौगढ़ कस्बे के दूसरी तरफ भी निर्माण जारी है। मगर सनई से तेतरी बाजार तक के बीच की सड़क पर निर्माण कार्य ठप है। यह वह हिस्सा है, जिस पर जिला मुख्यालय है। यहां फोर लेन प्रस्तावित है।
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भीमापार रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज भी बनना है। मगर अब तक यहां काम ही शुरू नहीं हो पाया है। कार्यदायी संस्था के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें सड़क बनाने के लिए जिला प्रशासन अब तक जमीन ही उपलब्ध नहीं करा पाया है, जबकि भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजा का पैसा काफी पहले ही दिया जा चुका है। उधर, जिला प्रशासन के अफसर कार्यदाई संस्था पर देरी का दोष मढ़ रहे हैं। अफसरों की दलील है कि वह अधिग्रहण की कोशिश कर रहे हैं। जैसे-जैसे मुआवजा आ रहा वितरण जारी है। एनएच बस्ती के प्रोजेक्ट मैनेजर एसके मिश्रा ने बताया कि सड़क निर्माण में देरी क्यों हो रही है हमारे स्तर पर कोई देरी नहीं है।
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हम खुद जल्दी काम खत्म करना चाहते हैं, मगर जिला प्रशासन जमीन उपलब्ध नहीं करा पा रहा। सनई से पुरानी नौगढ़ तक काम ठप रहने के पीछे भूमि की अनुपलब्धता मुख्य कारण है। जैसे-जैसे जमीन मिल रही है, काम हो रहा है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी योगानंद पांडेय ने बताया कि निर्माण में देरी के लिए अधिग्रहण कोई कारण नहीं है। हमारे पास जैसे पैसा आ रहा है, उसे वितरित किया गया है। भीमापार क्षेत्र की जमीन के बदले 40 करोड़ का मुआवजा हाल ही में मिला है। इसका जल्द वितरण होगा। एनएच के अधिकारी इतने सक्रिय हैं तो जहां जमीन खाली है, वहां निर्माण क्यों नहीं कराते।