{"_id":"67ddaf21dd6d7dc1f103c8bd","slug":"hands-raised-in-prayer-for-peace-and-security-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1033-134385-2025-03-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: अमन और सलामती की दुआ के लिए उठे हाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: अमन और सलामती की दुआ के लिए उठे हाथ
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। मुकद्दस रमजान के तीसरे जुमे पर तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थित मस्जिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा की और अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर क्षेत्र और मुल्क में अमनचैन और सलामती, तरक्की की दुआएं मांगी।वहीं, नमाज के दौरान खुतबे (तकरीर) में मौलाना- उलेमा ने फितरा-जकात की फजीलत बयान की।
रमजान माह के तीसरे जुमा की नमाज को लेकर वक्त से पहले नमाजियों ने मस्जिद की ओर रुख कर लिया। डुमरियागंज तहसील मुख्यालय स्थित जामा मस्जिद तथा हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद भी वक्त से पहले खचाखच भर गई। नमाजियों की तादाद के सामने जामा मस्जिद छोटी पड़ गई। मस्जिद के अंदर व बाहर के अलावा छत पर भी लोगों ने नमाज अदा की।
नमाजियों को खिताब करते हुए मौलाना शहकार हुसैन जैदी व मौलाना एहसानुल्लाह कासमी, मौलाना मकसूद अकरम ने कहा कि जिन लोगों ने रोजे रखे, नमाज पढ़ी और कुरानपाक पढ़ा और सुना वो अल्लाह के नजदीक पहुंच गए। अगर किसी का गंभीर बीमारी के चलते रोजा नहीं है, तो उसे भी इस मुकद्दस महीने का अहतराम यानी सम्मान करना चाहिए। रोजेदार के सामने खाना या पीना नहीं चाहिए।
विज्ञापन
जामा मस्जिद के इमाम ने जकात और सदका-ए- फित्र की फजीलत बताई। उन्होंने कहा कि ईद की नमाज से पहले सदका-ए- फितर अदा नहीं किया तो अल्लाह ताला रोजे कबूल नहीं करेगा। हर मालदार पर जकात फर्ज है।
विज्ञापन
डुमरियागंज। मुकद्दस रमजान के तीसरे जुमे पर तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों में स्थित मस्जिदों में हजारों लोगों ने नमाज अदा की और अल्लाह की बारगाह में हाथ उठाकर क्षेत्र और मुल्क में अमनचैन और सलामती, तरक्की की दुआएं मांगी।वहीं, नमाज के दौरान खुतबे (तकरीर) में मौलाना- उलेमा ने फितरा-जकात की फजीलत बयान की।
रमजान माह के तीसरे जुमा की नमाज को लेकर वक्त से पहले नमाजियों ने मस्जिद की ओर रुख कर लिया। डुमरियागंज तहसील मुख्यालय स्थित जामा मस्जिद तथा हल्लौर स्थित शिया जामा मस्जिद भी वक्त से पहले खचाखच भर गई। नमाजियों की तादाद के सामने जामा मस्जिद छोटी पड़ गई। मस्जिद के अंदर व बाहर के अलावा छत पर भी लोगों ने नमाज अदा की।
विज्ञापन
नमाजियों को खिताब करते हुए मौलाना शहकार हुसैन जैदी व मौलाना एहसानुल्लाह कासमी, मौलाना मकसूद अकरम ने कहा कि जिन लोगों ने रोजे रखे, नमाज पढ़ी और कुरानपाक पढ़ा और सुना वो अल्लाह के नजदीक पहुंच गए। अगर किसी का गंभीर बीमारी के चलते रोजा नहीं है, तो उसे भी इस मुकद्दस महीने का अहतराम यानी सम्मान करना चाहिए। रोजेदार के सामने खाना या पीना नहीं चाहिए।
विज्ञापन
जामा मस्जिद के इमाम ने जकात और सदका-ए- फित्र की फजीलत बताई। उन्होंने कहा कि ईद की नमाज से पहले सदका-ए- फितर अदा नहीं किया तो अल्लाह ताला रोजे कबूल नहीं करेगा। हर मालदार पर जकात फर्ज है।