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धूमधाम से मना गुरु गोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 13 Jan 2017 10:52 PM IST
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बांसी में लंगर खिलाते सिख समुदाय के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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बांसी। सिख धर्म के दसवें गुरु व खालसा पंथ के संस्थापक गुरु गोविंद सिंह का प्रकाशोत्सव शुक्रवार को धूमधाम से मनाया गया। अकबर नगर मोहल्ले में स्थित गुरुद्वारा सिंह सभा में जुटे महिला-पुरुष दिन भर सबद-कीर्तन में रमे रहे। ज्ञानी जत्थे ने गुरु की महिमा गाई और उनसे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सुबह भी प्रभातफेरी निकाली गई। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरने के बाद प्रभात फेरी गुरुद्वारा सिंह सभा पहुंची। यहां सबद-कीर्तन शुरू हुआ। कीर्तन के जरिए श्रद्धालुओं ने गुरु गोविंद सिंह के बलिदानों को याद किया। गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ और अरदास का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। ज्ञानी जत्थे ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए अपने बच्चों को कुर्बान कर दिया। खुद भी शहीद हो गए, लेकिन धर्म पर आंच नहीं आने दी। आज भी ऐसे ही बलिदान की जरूरत है। बड़ी तादाद में लोगों ने गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका।
लंगर छकने के लिए भीड़ लगी रही। इस दौरान पूर्व सांसद चंद्रशेखर त्रिपाठी, पूर्व विधायक लालजी यादव, हरिगोविंद साहू, डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी, अंबिकेश श्रीवास्तव, प्रमोद अग्रहरि, मनोज बाबा, सुशील सागर, मायाराम वर्मा, विष्णुकांत पांडेय, आनंद शंकर मणि, ज्ञानी कुलवंत सिंह, सरदार रवींद्र सिंह लवली, नरेंद्र चंद्रवानी, अमरदीप सिंह, कमल वाधवा, अमित वाधवा, करन सिंह, हरजीत सिंह, गुरुमीत सिंह, सुरेंद्र कौर, मंजीत कौर आदि मौजूद रहे।
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प्रकाशोत्सव के उपलक्ष्य में शुक्रवार को सुबह भी प्रभातफेरी निकाली गई। नगर के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरने के बाद प्रभात फेरी गुरुद्वारा सिंह सभा पहुंची। यहां सबद-कीर्तन शुरू हुआ। कीर्तन के जरिए श्रद्धालुओं ने गुरु गोविंद सिंह के बलिदानों को याद किया। गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ और अरदास का सिलसिला देर शाम तक चलता रहा। ज्ञानी जत्थे ने बताया कि गुरु गोविंद सिंह ने धर्म की रक्षा के लिए अपने बच्चों को कुर्बान कर दिया। खुद भी शहीद हो गए, लेकिन धर्म पर आंच नहीं आने दी। आज भी ऐसे ही बलिदान की जरूरत है। बड़ी तादाद में लोगों ने गुरुद्वारा पहुंचकर मत्था टेका।
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लंगर छकने के लिए भीड़ लगी रही। इस दौरान पूर्व सांसद चंद्रशेखर त्रिपाठी, पूर्व विधायक लालजी यादव, हरिगोविंद साहू, डॉ. ज्ञानेंद्र द्विवेदी, अंबिकेश श्रीवास्तव, प्रमोद अग्रहरि, मनोज बाबा, सुशील सागर, मायाराम वर्मा, विष्णुकांत पांडेय, आनंद शंकर मणि, ज्ञानी कुलवंत सिंह, सरदार रवींद्र सिंह लवली, नरेंद्र चंद्रवानी, अमरदीप सिंह, कमल वाधवा, अमित वाधवा, करन सिंह, हरजीत सिंह, गुरुमीत सिंह, सुरेंद्र कौर, मंजीत कौर आदि मौजूद रहे।
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