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उद्योगपतियों के हाथों में सरकारें
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 23 Jul 2016 10:47 PM IST
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मीडिया से मुखातिब होते भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सिद्धार्थनगर। सरकारें उद्योगपतियों के हाथों में खेल रही है। हजारों करोड़ों रुपये माफ कर दिया जा रहा है, लेकिन गरीब किसान थोड़ा सा कर्ज लेने के बाद उसके बोझ तले दबकर खुदकुशी करने को मजबूर हो गया है। सरकार सातवां वेतन आयोग लागू करती है, मगर किसानों के लिए कोई आयोग नहीं गठित करती। यह कहना है कि भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत का।
यूनियन के बस्ती मंडल अध्यक्ष रहे पटेश्वरी चौधरी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष टिकैत ने रेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता में गन्ने के समर्थन मूल्य पर चिंता जताई। कहा कि प्रदेश में जलौनी लकड़ी 800 से 900 रूपये कुन्तल में बिक रही है और गन्ना का मूल्य सरकार ने 250 रुपये कुंटल निर्धारित किया है। आज किसान उपेक्षित है। उपज का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों के नाम पर राजनीति हो रही है।
केंद्र व प्रदेश की सरकार दोनों किसानों के हित में कोई काम नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि भाकियू किसानों की हित में लड़ाई लडने के लिए बनाई गई एक संगठित अराजनैतिक पार्टी है। हमेशा वह किसानों की लड़ाई लडने के लिए तत्पर रहती है। आज अपने ही देश में किसान उपेक्षित है। उसकी उपज का वाजिब मूल्य नही मिल रहा है। सरकारें उद्योगपतियों के हजारो करोड़ रूपये माफ करती है। लेकिन देश का 99 प्रतिशत किसान आज भी कर्ज के बोझ के नीचे दबा है।
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कितने किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर ले रहे हैं पर न तो केंद्र व प्रदेश सरकार के कानों पर जूं रेंग रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान दीवानचंद्र चौधरी, राजबीर सिंह जाटव, हरेंद्र सिंह, हरनाथ सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।
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यूनियन के बस्ती मंडल अध्यक्ष रहे पटेश्वरी चौधरी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे राष्ट्रीय अध्यक्ष टिकैत ने रेस्ट हाउस में प्रेस वार्ता में गन्ने के समर्थन मूल्य पर चिंता जताई। कहा कि प्रदेश में जलौनी लकड़ी 800 से 900 रूपये कुन्तल में बिक रही है और गन्ना का मूल्य सरकार ने 250 रुपये कुंटल निर्धारित किया है। आज किसान उपेक्षित है। उपज का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। किसानों के नाम पर राजनीति हो रही है।
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केंद्र व प्रदेश की सरकार दोनों किसानों के हित में कोई काम नहीं कर रही। उन्होंने कहा कि भाकियू किसानों की हित में लड़ाई लडने के लिए बनाई गई एक संगठित अराजनैतिक पार्टी है। हमेशा वह किसानों की लड़ाई लडने के लिए तत्पर रहती है। आज अपने ही देश में किसान उपेक्षित है। उसकी उपज का वाजिब मूल्य नही मिल रहा है। सरकारें उद्योगपतियों के हजारो करोड़ रूपये माफ करती है। लेकिन देश का 99 प्रतिशत किसान आज भी कर्ज के बोझ के नीचे दबा है।
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कितने किसान कर्ज के कारण आत्महत्या कर ले रहे हैं पर न तो केंद्र व प्रदेश सरकार के कानों पर जूं रेंग रहा है। प्रेस वार्ता के दौरान दीवानचंद्र चौधरी, राजबीर सिंह जाटव, हरेंद्र सिंह, हरनाथ सिंह वर्मा आदि मौजूद रहे।