{"_id":"6702f3d7c287a8708e0e1a74","slug":"goddess-kushmanda-was-worshiped-on-the-fourth-day-of-navratridevotees-cheered-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1003-125328-2024-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की हुई पूजा...श्रद्धालुओं ने लगाया जयकारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की हुई पूजा...श्रद्धालुओं ने लगाया जयकारा
Mon, 07 Oct 2024 02:02 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 07 Oct 2024 02:02 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। नवरात्र के चौथे दिन माता के भक्तों ने मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगीं। शहर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। साथ ही शहर व ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में मां दुर्गा के जयकारे गूंजे। लोगों ने घरों में भी माता की आराधना की।
रविवार को माता के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई। ब्रह्ममुहूर्त से ही भक्तों ने अखंड जाप शुरू कर दिया और धूमधाम से पूजा की। इन दिनों श्री सिंहेश्वरी मंदिर पर देवी मां के जयकारों से गूंज रही है। भोर होते ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष देवी मंदिरों में पहुंचकर नवरात्र के चौथे दिन माता दुर्गा की पूजा ''''कुष्मांडा'''' के रूप में की विधि विधान से पूजन अर्चन कर जयकारे लगा रहे हैं।
शहर स्थित बेलहिया मंदिर, जोगमाया मंदिर, गालापुर मंदिर, पल्टा देवी मंदिर सहित आयोजित दुर्गा पांडालों में आचार्यों द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी मां की आराधना की गई। देर शाम माता रानी की महाआरती हुई जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।साथ ही देवी मंदिरों में फूलों से श्रृंगार किया गया।
विज्ञापन
आचार्य सदाशिव मिश्र ने बताया कि मां की हंसी और ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण ही इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। जिस समय सृष्टि नहीं थी। चारों और अंधकार ही था। तब देवी ने अपनी हंसी से ही ब्राह्मांड की रचना की थी इसलिए यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति हैं। मां के सात हाथों में कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां का निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। जहां कोई भी निवास नहीं कर सकता। मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना से सभी प्रकार के रोग और परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। मान्यता है मां कूष्मांडा कम सेवा और भक्ति से प्रसन्न हो जाती हैं। मां के इस स्वरूप की पूजा से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।
सिद्धार्थनगर। नवरात्र के चौथे दिन माता के भक्तों ने मां कुष्मांडा की पूजा-अर्चना कर मनौतियां मांगीं। शहर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ रही। साथ ही शहर व ग्रामीण क्षेत्र के मंदिरों में मां दुर्गा के जयकारे गूंजे। लोगों ने घरों में भी माता की आराधना की।
रविवार को माता के चौथे स्वरूप मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की गई। ब्रह्ममुहूर्त से ही भक्तों ने अखंड जाप शुरू कर दिया और धूमधाम से पूजा की। इन दिनों श्री सिंहेश्वरी मंदिर पर देवी मां के जयकारों से गूंज रही है। भोर होते ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष देवी मंदिरों में पहुंचकर नवरात्र के चौथे दिन माता दुर्गा की पूजा ''''कुष्मांडा'''' के रूप में की विधि विधान से पूजन अर्चन कर जयकारे लगा रहे हैं।
विज्ञापन
शहर स्थित बेलहिया मंदिर, जोगमाया मंदिर, गालापुर मंदिर, पल्टा देवी मंदिर सहित आयोजित दुर्गा पांडालों में आचार्यों द्वारा विधि विधान से पूजा अर्चना कर देवी मां की आराधना की गई। देर शाम माता रानी की महाआरती हुई जिसमें श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।साथ ही देवी मंदिरों में फूलों से श्रृंगार किया गया।
विज्ञापन
आचार्य सदाशिव मिश्र ने बताया कि मां की हंसी और ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारण ही इन्हें कूष्मांडा देवी कहा जाता है। जिस समय सृष्टि नहीं थी। चारों और अंधकार ही था। तब देवी ने अपनी हंसी से ही ब्राह्मांड की रचना की थी इसलिए यही सृष्टि की आदि-स्वरूपा आदि शक्ति हैं। मां के सात हाथों में कमण्डल, धनुष बाण, कमल-पुष्प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र तथा गदा हैं। आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है। मां का निवास सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। जहां कोई भी निवास नहीं कर सकता। मां कूष्मांडा की पूजा अर्चना से सभी प्रकार के रोग और परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। मान्यता है मां कूष्मांडा कम सेवा और भक्ति से प्रसन्न हो जाती हैं। मां के इस स्वरूप की पूजा से आयु, यश, बल, और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है।