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Siddharthnagar News: बार-बार बदल रहा चश्मे का नंबर...लापरवाही पड़ सकती है भारी

Sat, 25 Jul 2026 02:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 25 Jul 2026 02:24 AM IST
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Frequent changes in your eyeglass prescription... negligence could prove costly.
डायबिटीज, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा जैसी बीमारियों का भी हो सकता है संकेत
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नेत्र विशेषज्ञ बोले, समय पर जांच से बच सकती है आंखों की रोशनी
सिद्धार्थनगर। अगर कुछ महीनों के अंतराल पर बार-बार चश्मे का नंबर बदल रहा है तो इसे सामान्य बात मानकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह केवल आंखों की कमजोरी का नहीं बल्कि डायबिटीज, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, रेटिना की बीमारी या बढ़ते स्क्रीन टाइम का भी संकेत हो सकता है। समय रहते नेत्र परीक्षण कराने से बीमारी की पहचान शुरुआती चरण में हो जाती है और उपचार आसान हो जाता है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजर टिकाए रखने से आंखों में सूखापन, जलन, थकान और धुंधलापन की शिकायत बढ़ रही है। कई लोग आंखों की जांच कराए बिना पुराने नंबर का चश्मा वर्षों तक पहनते रहते हैं या मेडिकल स्टोर से अनुमान के आधार पर नया चश्मा बनवा लेते हैं। इससे आंखों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और समस्या बढ़ सकती है।
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नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. आशीष त्रिपाठी बताते हैं कि बार-बार चश्मे का नंबर बदलने के पीछे कई चिकित्सीय कारण हो सकते हैं। मधुमेह के मरीजों में रक्त में शुगर का स्तर असंतुलित होने पर आंखों की रोशनी प्रभावित होती है और नंबर में बदलाव आने लगता है। वहीं, मोतियाबिंद की शुरुआत, ग्लूकोमा, कॉर्निया में बदलाव या रेटिना की बीमारी भी इसका कारण बन सकती है। ऐसे में केवल नया चश्मा बनवाने के बजाय आंखों की संपूर्ण जांच कराना जरूरी है।
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अगर धुंधला दिखाई देना, पढ़ने में कठिनाई होना, बार-बार सिरदर्द, आंखों में दर्द या भारीपन, रोशनी के चारों ओर घेरे दिखाई देना, रात में कम दिखाई देना या आंखों से लगातार पानी आने जैसी समस्या हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों में पढ़ते समय किताब बहुत पास लाना, टीवी के करीब बैठना, स्कूल के ब्लैकबोर्ड पर साफ न दिखना या बार-बार आंखें मलना नजर कमजोर होने के संकेत हो सकते हैं।

डॉ. आशीष त्रिपाठी ने बताया कि 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों, बुजुर्गों के साथ मधुमेह और उच्च रक्तचाप के मरीजों को वर्ष में कम से कम एक बार आंखों की जांच जरूर करानी चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, स्क्रीन से बीच-बीच में ब्रेक और डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही नंबर का चश्मा पहनने से आंखों की रोशनी लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकती है।
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इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
- बार-बार चश्मे का नंबर बदलना
- धुंधला दिखाई देना
- आंखों में दर्द या जलन
- लगातार सिरदर्द रहना
- रात में कम दिखाई देना
- रोशनी के चारों ओर घेरे दिखना
- आंखों से लगातार पानी आना
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आंखों को स्वस्थ रखने के उपाय
- हर 20 मिनट बाद 20 सेकेंड के लिए दूर देखें (20-20-20 नियम)।
- मोबाइल और कंप्यूटर का लगातार इस्तेमाल करने से बचें।
- हरी सब्जियां, गाजर, मौसमी फल और विटामिन-ए युक्त भोजन लें।
- मधुमेह और रक्तचाप को नियंत्रित रखें।
- बिना जांच के चश्मा न बदलें और नियमित रूप से नेत्र परीक्षण कराएं।
(नेत्र रोग विशेषज्ञ के अनुसार)
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