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Siddharthnagar News: इमीग्रेशन कार्यालय खुले तो विदेश पर्यटकों मिले लाभ
Sat, 02 Mar 2024 11:42 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 02 Mar 2024 11:42 PM IST
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ककरहवा। ककरहवा में कस्टम कार्यालय खुले सात वर्ष हो चुके हैं, लेकिन ककरहवा में अब तक इमीग्रेशन कार्यालय नहीं खुल सका है। इसके कारण ककरहवा के रास्ते विदेशी पर्यटक भारत में प्रवेश नहीं कर पाते हैं।
विदेशी पर्यटकों को भारत के कपिलवस्तु आने के लिए सोनौली के रास्ते 100 किलो मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि ककरहवा से लुंबिनी की दूरी नौ किलोमीटर और ककरहवा से कपिलवस्तु की दूरी 10 किलोमीटर है। लुंबिनी से कपिलवस्तु की दूरी अधिक होने के कारण विदेशी पर्यटक कपिलवस्तु आए बिना लुंबिनी से वापस चले जाते है।
ककरहवा में इमीग्रेशन अप्रवासन कार्यालय न होने से म्यांमार, जापान, श्रीलंका, कंबोडिया आदि देशों के बौद्ध धर्मावलंबी पर्यटकों को तथागत की कीड़ास्थली कपिलवस्तु आने में काफी असुविधा होती है। विदेशी पर्यटकों को सोनौली बॉर्डर होते हुए कपिलवस्तु आना पड़ता है। यदि ककरहवा में इमीग्रेशन कार्यालय खुल जाये तो विदेशी पर्यटकों को लुंबिनी से कपिलवस्तु आने में काफी सुविधा होगी। तथागत की जन्मस्थली लुंबिनी ककरहवा बॉर्डर से मात्र नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और भगवान बुद्ध की क्रीड़ा स्थली कपिलवस्तु ककरहवा से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
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ककरहवा से होकर कपिलवस्तु की दूरी मात्र 19 किलोमीटर है। लेकिन अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में न होने के कारण विदेशी पर्यटकों को सोनौली हो कर कपिलवस्तु आना पड़ता है। ककरहवा छोड़कर विदेशी पर्यटकों को किसी भी रास्ते से आने के लिए कम से कम 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत से विदेशी पर्यटक लुंबिनी से बिना कपिलवस्तु आये चले जाते हैं।
अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में खुलने से लुंबिनी तथा आसपास के क्षेत्र का विकास होगा। होटल तथा पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। भगवान बुद्ध का दर्शन करने अधिक संख्या में विदेशी पर्यटकों का आना होगा।
-कुंवर चंदन सिंह, डायरेक्टर पीस टूर एंड ट्रेवल्स लुंबिनी
भारत और नेपाल के लोगों का रोटी बेटी का रिश्ता है। इमीग्रेशन कार्यालय ककरहवा में खुलने से रिश्तों में और मजबूती आएगी। ककरहवा में इमीग्रेशन कार्यालय खुले इसके लिए प्रयास करूंगा।
-राजेश ज्ञवाली, नेता नेपाली कांग्रेस
दोनों देशों के लोगों में रिश्ता मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से निरंतर प्रयास किया जा रहा है। ककरहवा को एक विकसित व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए भारत सरकार यहां 100 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर बहुउद्देश्यीय व्यापारिक हब बनाना चाह रही है।
-डॉ. सुधीर मिश्र, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल
दोनों देशों के नागरिकों को एक दूसरे के यहां आने के लिए किसी पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती है। भारत और नेपाल में रोटी और बेटी का रिश्ता है। अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में खुलने से दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक मजबूती आएगी।
-नीतू दिलीप पांडेय, ग्राम प्रधान ककरहवा
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विदेशी पर्यटकों को भारत के कपिलवस्तु आने के लिए सोनौली के रास्ते 100 किलो मीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि ककरहवा से लुंबिनी की दूरी नौ किलोमीटर और ककरहवा से कपिलवस्तु की दूरी 10 किलोमीटर है। लुंबिनी से कपिलवस्तु की दूरी अधिक होने के कारण विदेशी पर्यटक कपिलवस्तु आए बिना लुंबिनी से वापस चले जाते है।
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ककरहवा में इमीग्रेशन अप्रवासन कार्यालय न होने से म्यांमार, जापान, श्रीलंका, कंबोडिया आदि देशों के बौद्ध धर्मावलंबी पर्यटकों को तथागत की कीड़ास्थली कपिलवस्तु आने में काफी असुविधा होती है। विदेशी पर्यटकों को सोनौली बॉर्डर होते हुए कपिलवस्तु आना पड़ता है। यदि ककरहवा में इमीग्रेशन कार्यालय खुल जाये तो विदेशी पर्यटकों को लुंबिनी से कपिलवस्तु आने में काफी सुविधा होगी। तथागत की जन्मस्थली लुंबिनी ककरहवा बॉर्डर से मात्र नौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं और भगवान बुद्ध की क्रीड़ा स्थली कपिलवस्तु ककरहवा से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर है।
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ककरहवा से होकर कपिलवस्तु की दूरी मात्र 19 किलोमीटर है। लेकिन अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में न होने के कारण विदेशी पर्यटकों को सोनौली हो कर कपिलवस्तु आना पड़ता है। ककरहवा छोड़कर विदेशी पर्यटकों को किसी भी रास्ते से आने के लिए कम से कम 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। जिसके कारण बहुत से विदेशी पर्यटक लुंबिनी से बिना कपिलवस्तु आये चले जाते हैं।
अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में खुलने से लुंबिनी तथा आसपास के क्षेत्र का विकास होगा। होटल तथा पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा। भगवान बुद्ध का दर्शन करने अधिक संख्या में विदेशी पर्यटकों का आना होगा।
-कुंवर चंदन सिंह, डायरेक्टर पीस टूर एंड ट्रेवल्स लुंबिनी
भारत और नेपाल के लोगों का रोटी बेटी का रिश्ता है। इमीग्रेशन कार्यालय ककरहवा में खुलने से रिश्तों में और मजबूती आएगी। ककरहवा में इमीग्रेशन कार्यालय खुले इसके लिए प्रयास करूंगा।
-राजेश ज्ञवाली, नेता नेपाली कांग्रेस
दोनों देशों के लोगों में रिश्ता मजबूत करने के लिए सरकार की ओर से निरंतर प्रयास किया जा रहा है। ककरहवा को एक विकसित व्यापारिक केंद्र बनाने के लिए भारत सरकार यहां 100 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर बहुउद्देश्यीय व्यापारिक हब बनाना चाह रही है।
-डॉ. सुधीर मिश्र, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल
दोनों देशों के नागरिकों को एक दूसरे के यहां आने के लिए किसी पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती है। भारत और नेपाल में रोटी और बेटी का रिश्ता है। अप्रवासन कार्यालय ककरहवा में खुलने से दोनों देशों के रिश्तों में और अधिक मजबूती आएगी।
-नीतू दिलीप पांडेय, ग्राम प्रधान ककरहवा