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बाढ़ का कर्फ्यू : घरों में कैद, राहत सामग्री मिली पी रहे दूषित पानी
Sun, 14 Jul 2024 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Jul 2024 12:26 AM IST
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शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से बच्चे और महिलाएं घरों में कैद, जान जोखिम में डालकर ला रहे दवा और सब्जी
बोले बाढ़ पीड़ित- हर साल झेलते हैं तबाही, नहीं होता है ठोस उपाय
रवि शुक्ल
तुलसियापुर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के कई गांवों में लगातार छह दिनों से बाढ़ की समस्या बनी हुई है। महिलाएं और बच्चे एक तरह से कैद हो गए हैं। वहीं, राशन, पानी और दवा आदि के लिए लोगों को पानी से होकर जाना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को पानी कुछ कम हुआ था, शुक्रवार को थोड़ा पानी बढ़ा, लेकिन शनिवार को बाढ़ का पानी बहुत बढ़ गया। जो गांव के बाढ़ से बचे थे, वहां भी इसकी जद में आ गए हैं। कई रास्तों पर पानी आ गया है। इससे जनजीवन पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। हजारों एकड़ खेत में धान की फसल को नुकसान हो गया है।
शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में नेपाल की बानगंगा, घोराही और बूढ़ी राप्ती से सैलाब बनकर पानी आता है और बाढ़ से बड़ा हिस्सा प्रभावित हो जाता है। वहीं तीन पहाड़ी नदियां भी उफान पर हैं। इसका सबसे प्रतिकूल असर खैरी शीतल प्रसाद, खैरी उर्फ झुंगहवां, तौलिहवा, मटियार उर्फ भुतहवा, तालकुंडा, पकडि़हवा, रेकहट, पथरदेइया, खैरा समेत लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों व टोलों में बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी और सोतवा व सुरही पहाड़ी नालों के जलस्तर के बढ़ने से लगभग हर साल बाढ़ आ जाती है। बृहस्पतिवार को बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ था, लेकिन शुक्रवार को बढ़ गया।
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शनिवार को जलापुरवा, कठेला समय माता थाने में पानी घुस गया। कठेला-तुलसियापुर, झुंगहवां-झुलनीपुर, इटहिया-कचरिहवा, ढ़ेबरुआ-डुमरियागंज मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। अमर उजाला ने बाढ़ पीड़ितों से उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। खैरी शीतल प्रसाद के करौता की निर्मला ने बताया कि बाढ़ से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की तबीयत खराब होने पर या तो नाव से या पैदल तुलसियापुर जाना पड़ता है। तौलिहवा की गीता ने बताया कि बाढ़ के पानी से हरी सब्जियां नष्ट हो गई हैं। कोई बाहर जाने वाला है नहीं, इसलिए आलू की सब्जी से ही काम चलाना पड़ा है। दवा के लिए भी दिक्कत हो रही है। तमकुहवा की रहने वाली आशा देवी ने बताया कि हमारा टोला तो आठ दिनों से डूबा हुआ है। गांव में दवा, सब्जी, बिजली, आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन नाव की व्यवस्था कर दिया है। राहत सामग्री भी बंट रहा है, लेकिन पीने का पानी दूषित ही मिल रहा है।
संवाद
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बोले बाढ़ पीड़ित- हर साल झेलते हैं तबाही, नहीं होता है ठोस उपाय
रवि शुक्ल
तुलसियापुर। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र के कई गांवों में लगातार छह दिनों से बाढ़ की समस्या बनी हुई है। महिलाएं और बच्चे एक तरह से कैद हो गए हैं। वहीं, राशन, पानी और दवा आदि के लिए लोगों को पानी से होकर जाना पड़ रहा है।
बृहस्पतिवार को पानी कुछ कम हुआ था, शुक्रवार को थोड़ा पानी बढ़ा, लेकिन शनिवार को बाढ़ का पानी बहुत बढ़ गया। जो गांव के बाढ़ से बचे थे, वहां भी इसकी जद में आ गए हैं। कई रास्तों पर पानी आ गया है। इससे जनजीवन पूरी तरह से बेपटरी हो गई है। हजारों एकड़ खेत में धान की फसल को नुकसान हो गया है।
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शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में नेपाल की बानगंगा, घोराही और बूढ़ी राप्ती से सैलाब बनकर पानी आता है और बाढ़ से बड़ा हिस्सा प्रभावित हो जाता है। वहीं तीन पहाड़ी नदियां भी उफान पर हैं। इसका सबसे प्रतिकूल असर खैरी शीतल प्रसाद, खैरी उर्फ झुंगहवां, तौलिहवा, मटियार उर्फ भुतहवा, तालकुंडा, पकडि़हवा, रेकहट, पथरदेइया, खैरा समेत लगभग दो दर्जन से अधिक गांवों व टोलों में बूढ़ी राप्ती, बानगंगा, घोरही नदी और सोतवा व सुरही पहाड़ी नालों के जलस्तर के बढ़ने से लगभग हर साल बाढ़ आ जाती है। बृहस्पतिवार को बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ था, लेकिन शुक्रवार को बढ़ गया।
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शनिवार को जलापुरवा, कठेला समय माता थाने में पानी घुस गया। कठेला-तुलसियापुर, झुंगहवां-झुलनीपुर, इटहिया-कचरिहवा, ढ़ेबरुआ-डुमरियागंज मार्ग पर आवागमन पूरी तरह से बंद हो गया है। अमर उजाला ने बाढ़ पीड़ितों से उनकी समस्याओं को जानने का प्रयास किया। खैरी शीतल प्रसाद के करौता की निर्मला ने बताया कि बाढ़ से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की तबीयत खराब होने पर या तो नाव से या पैदल तुलसियापुर जाना पड़ता है। तौलिहवा की गीता ने बताया कि बाढ़ के पानी से हरी सब्जियां नष्ट हो गई हैं। कोई बाहर जाने वाला है नहीं, इसलिए आलू की सब्जी से ही काम चलाना पड़ा है। दवा के लिए भी दिक्कत हो रही है। तमकुहवा की रहने वाली आशा देवी ने बताया कि हमारा टोला तो आठ दिनों से डूबा हुआ है। गांव में दवा, सब्जी, बिजली, आवागमन की समस्या उत्पन्न हो गई है। प्रशासन नाव की व्यवस्था कर दिया है। राहत सामग्री भी बंट रहा है, लेकिन पीने का पानी दूषित ही मिल रहा है।
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