{"_id":"63f654a6715d9c7ec7044bfc","slug":"fish-business-will-gain-momentum-from-the-budget-siddharthnagar-news-c-7-1-63167-2023-02-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: बजट से मछली कारोबार को मिलेगी गति, बढ़ेगा रकबा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: बजट से मछली कारोबार को मिलेगी गति, बढ़ेगा रकबा
Wed, 22 Feb 2023 11:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 22 Feb 2023 11:15 PM IST
विज्ञापन
उसका क्षेत्र में टीवी पर बजट देखते लोग।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिद्धार्थनगर। प्रदेश सरकार की ओर से बुधवार को पेश किए बजट में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बड़ी राशि प्रस्तावित की गई है। इससे मछली पालकों को रोजगार मिलेगा। मछली पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे जनपद में कारोबार और रोजगार बढ़ने की उम्मीद जगी है। योजना से हर बार वंचित होने वालों को इस बार लाभ मिलने की उम्मीद है।
जिले में बढनी, इटवा सहित कुछ क्षेत्र में भूमि ऐसी है जो खेती करने योग्य नहीं है। इसमें बढनी ब्लॉक क्षेत्र का हिस्सा अधिक है। इसलिए कारोबार के लिए लोगों ने निजी भूमि पर मछली पालन शुरू किया। उन्हें लाभ मिल रहा है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की थी। इसमें वर्ष वार जनपद को लक्ष्य प्राप्त होता है। एक वर्ष में अधिकतम 20 का लक्ष्य है। किसी वर्ष कम भी हो सकता है। इस योजना में तीन वर्ष में 55 लोगों का चयन हुआ। वे अपनी भूमि पर तालाब खोदवाकर मछली पालन कराने कर रहे हैं। सरकार की इस योजना से जिले में 45 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में तालाब खोदवाकर मछली पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की ओर से बुधवार को पेश बजट में मत्स्य पालन के लिए 257 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। माना जा रहा है कि बजट बढ़ने से योजना का दायरा बढ़ेगा और मछली पालन करने वालों को लाभ मिलेगा। जिला मत्स्य अधिकारी पुष्पा तिवारी ने बताया कि मछली पालन के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए पोर्टल खुला था, इसमें लोगों ने आवेदन किया है।
-- -
बजट बढ़ने से अब आ जाएगा नंबर
मछली का कारोबार करने में फायदा है, लेकिन ऋण मिलने में दिक्कत होती थी। सरकार में मछली के कारोबार में बड़ा बजट प्रस्तावित किया है, जिससे हम लोग भी योजना का लाभ पा सकेंगे। -संजय साहनी
-- -
पहली बार किसी ने दिया ध्यान
पहले मछली के कारोबार में पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया था। इसलिए मछुआरा समुदाय कारोबार में पीछे जा रहा था। लेकिन बजट में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में बड़ा बजट प्रस्तावित किया है। इससे योजना चलेगी तो लाभ मिलेगा। -दिनेश साहनी
-- -
ऋण पर मिलता है अनुदान
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में सामान्य और पिछड़ा वर्ग को एक हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन के लिए तालाब बनाने पर सात लाख रुपये ऋण मिलते हैं। इसमें उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। जबकि 60 प्रतिशत राशि देनी पड़ती है। वहीं अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी को 60 प्रतिशत अनुदान मिलता है।
-- -
नई योजना शुरू
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की तरह ही इसी वर्ष मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरू की गई है। इसमें केवल पट्टा वाले तालाब पर कारोबार करने के लिए अनुदान की योजना है। पहली बार मार्च में पोर्टल खुला तो 65 लोगों ने आवेदन किया है। विभाग के अनुसार योजना का लाभ हेक्टेयर के हिसाब से दिया जाएगा। इसमें एक हेक्टेयर के तालाब और पोखरे में चार लाख रुपये निर्धारित है। जिसमें 40 प्रतिशत अनुदान है।
-- -
4599 हेक्टेयर भूमि पर हो रहा मछली पालन
सरकारी आकड़ों पर गौर करें तो जिले में 4599 हेक्टेयर भूमि पर मछली का पालन किया जाता है। इसमें ग्राम सभा के पट्टा वाले तालाब और पोखरे को रकबा 2340 हेक्टेयर है। इसके अलावा 115 किलोमीटर नदी और नहर से भी मछली का कारोबार होता है। इसमें प्रति वर्ष 45679 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। जो 110-150 रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है।
विज्ञापन
जिले में बढनी, इटवा सहित कुछ क्षेत्र में भूमि ऐसी है जो खेती करने योग्य नहीं है। इसमें बढनी ब्लॉक क्षेत्र का हिस्सा अधिक है। इसलिए कारोबार के लिए लोगों ने निजी भूमि पर मछली पालन शुरू किया। उन्हें लाभ मिल रहा है।
विज्ञापन
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की थी। इसमें वर्ष वार जनपद को लक्ष्य प्राप्त होता है। एक वर्ष में अधिकतम 20 का लक्ष्य है। किसी वर्ष कम भी हो सकता है। इस योजना में तीन वर्ष में 55 लोगों का चयन हुआ। वे अपनी भूमि पर तालाब खोदवाकर मछली पालन कराने कर रहे हैं। सरकार की इस योजना से जिले में 45 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में तालाब खोदवाकर मछली पालन किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रदेश सरकार की ओर से बुधवार को पेश बजट में मत्स्य पालन के लिए 257 करोड़ 50 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। माना जा रहा है कि बजट बढ़ने से योजना का दायरा बढ़ेगा और मछली पालन करने वालों को लाभ मिलेगा। जिला मत्स्य अधिकारी पुष्पा तिवारी ने बताया कि मछली पालन के लिए कई योजनाएं चल रही हैं। मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए पोर्टल खुला था, इसमें लोगों ने आवेदन किया है।
बजट बढ़ने से अब आ जाएगा नंबर
मछली का कारोबार करने में फायदा है, लेकिन ऋण मिलने में दिक्कत होती थी। सरकार में मछली के कारोबार में बड़ा बजट प्रस्तावित किया है, जिससे हम लोग भी योजना का लाभ पा सकेंगे। -संजय साहनी
पहली बार किसी ने दिया ध्यान
पहले मछली के कारोबार में पहले किसी ने ध्यान नहीं दिया था। इसलिए मछुआरा समुदाय कारोबार में पीछे जा रहा था। लेकिन बजट में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में बड़ा बजट प्रस्तावित किया है। इससे योजना चलेगी तो लाभ मिलेगा। -दिनेश साहनी
ऋण पर मिलता है अनुदान
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में सामान्य और पिछड़ा वर्ग को एक हेक्टेयर भूमि पर मछली पालन के लिए तालाब बनाने पर सात लाख रुपये ऋण मिलते हैं। इसमें उन्हें 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। जबकि 60 प्रतिशत राशि देनी पड़ती है। वहीं अनुसूचित और अनुसूचित जनजाति के लाभार्थी को 60 प्रतिशत अनुदान मिलता है।
नई योजना शुरू
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की तरह ही इसी वर्ष मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरू की गई है। इसमें केवल पट्टा वाले तालाब पर कारोबार करने के लिए अनुदान की योजना है। पहली बार मार्च में पोर्टल खुला तो 65 लोगों ने आवेदन किया है। विभाग के अनुसार योजना का लाभ हेक्टेयर के हिसाब से दिया जाएगा। इसमें एक हेक्टेयर के तालाब और पोखरे में चार लाख रुपये निर्धारित है। जिसमें 40 प्रतिशत अनुदान है।
4599 हेक्टेयर भूमि पर हो रहा मछली पालन
सरकारी आकड़ों पर गौर करें तो जिले में 4599 हेक्टेयर भूमि पर मछली का पालन किया जाता है। इसमें ग्राम सभा के पट्टा वाले तालाब और पोखरे को रकबा 2340 हेक्टेयर है। इसके अलावा 115 किलोमीटर नदी और नहर से भी मछली का कारोबार होता है। इसमें प्रति वर्ष 45679 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। जो 110-150 रुपये प्रति किलो की दर से बिकती है।