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Siddharthnagar News: मखाना की खेती से सीमांत के किसान होंगे मालामाल
Sun, 14 Sep 2025 11:13 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 14 Sep 2025 11:13 PM IST
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भनवापुर क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के खरैला फार्म पर काला हीरा (मखाना) का निरीक्षण कर
भनवापुर। अब जिले के लघु और सीमांत किसानों के लिए आय के बेहतर विकल्प का खोज कृषि वैज्ञानिकों ने कर लिया है। किसान मखाना की खेती करके मालामाल हो सकते हैं।
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय कुमार अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देश पर जिले के किसानों के आय संवर्धन के लिए मखाना की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया था।
मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने विगत वर्ष में मखाना स्वर्ण वैदेही प्रजाति की खेती का परीक्षण खरैला फार्म पर लगभग आधा एकड़ में किया था जो वर्तमान समय में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार है।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के प्रक्षेत्र पर मखाना की स्वर्ण वैदेही प्रजाति प्रदर्शन इकाई का अवलोकन डॉ. ओम प्रकाश वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष,डॉ. शेष नारायण सिंह प्रसार वैज्ञानिक, डॉ. प्रवेश कुमार मृदा वैज्ञानिक एवं डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र उद्यान वैज्ञानिक ने संयुक्त रूप से किया। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश ने बताया जनपद के मिट्टी में जल धारण की क्षमता अच्छी होने के साथ जल की उपलब्धता व अनुकूल जलवायु के कारण मखाना की खेती के लिए अपार संभावनाएं हैं।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि मखाना एक जलीय पौधा है जो उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु में उगता है।
इसके लिए 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान 50 से 90 % वायु में नमी के साथ ही 100 से 150 सेमी.वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है, जो हमारे जिले में मौजूद है। मखाना प्रोटीन व खनिज लवण का प्रचुर स्रोत है और अपने उच्च पोषणमान के कारण ही इसे काला हीरा भी कहा जाता है। यह बाजार में पाप्ड या लावा मखाना के रूप में बिकता है और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में भी उपयोग किया जाता है। संवाद
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आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रोद्यौगिकी विश्वविद्यालय कुमार अयोध्या के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह के निर्देश पर जिले के किसानों के आय संवर्धन के लिए मखाना की खेती को बढ़ावा देने का निर्देश दिया गया था।
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मखाने की खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिकों ने विगत वर्ष में मखाना स्वर्ण वैदेही प्रजाति की खेती का परीक्षण खरैला फार्म पर लगभग आधा एकड़ में किया था जो वर्तमान समय में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार है।
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कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के प्रक्षेत्र पर मखाना की स्वर्ण वैदेही प्रजाति प्रदर्शन इकाई का अवलोकन डॉ. ओम प्रकाश वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष,डॉ. शेष नारायण सिंह प्रसार वैज्ञानिक, डॉ. प्रवेश कुमार मृदा वैज्ञानिक एवं डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र उद्यान वैज्ञानिक ने संयुक्त रूप से किया। कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश ने बताया जनपद के मिट्टी में जल धारण की क्षमता अच्छी होने के साथ जल की उपलब्धता व अनुकूल जलवायु के कारण मखाना की खेती के लिए अपार संभावनाएं हैं।
उद्यान वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र ने बताया कि मखाना एक जलीय पौधा है जो उष्ण एवं उपोष्ण जलवायु में उगता है।
इसके लिए 20 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान 50 से 90 % वायु में नमी के साथ ही 100 से 150 सेमी.वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है, जो हमारे जिले में मौजूद है। मखाना प्रोटीन व खनिज लवण का प्रचुर स्रोत है और अपने उच्च पोषणमान के कारण ही इसे काला हीरा भी कहा जाता है। यह बाजार में पाप्ड या लावा मखाना के रूप में बिकता है और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों में भी उपयोग किया जाता है। संवाद
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