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मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं का अभाव, चिकित्सक भी कम

Thu, 03 Nov 2022 10:39 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 03 Nov 2022 10:39 PM IST
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facility not available in district hospital
जिला अस्पताल के पैथालॉजी में लगी मरीजो की भीड़। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
मेडिकल कॉलेज में सुविधाओं का अभाव, चिकित्सक भी कम
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-पीएम मोदी ने 25अक्तूबर 2021 को किया था उद्घाटन
-आईसीयू व ट्रामा सेंटर नहीं होने से रेफर किए जाते हैं गंभीर मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबंध होने के बाद एक साल बाद भी संयुक्त जिला अस्पताल में संसाधनों की कमी बनी हुई है। अस्पताल में संसाधन कुछ बढ़े हैं, लेकिन बहुत कुछ बाकी है। आईसीयू, ट्रामा यूनिट और कार्डियट यूनिट जैसी सुविधाएं नहीं होने से गंभीर मरीजों को रेफर किया जाता है। ये यूनिट नहीं है, जबकि विशेषज्ञ डॉक्टरों का भी अभाव बना हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2021 को मेडिकल कॉलेज का लोकार्पण किया था, तो लोगों को उम्मीद जगी थी कि जल्द ही जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज के सुविधा संपन्न अस्पताल में रूप में आकार लेगा। एक साल बाद भी यह अस्पताल स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से ऊबर नहीं पाया है। ट्रामा यूनिट नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर कर दिया जाता है, जिनमें हादसे के मरीजों की स्थिति रास्ते में खराब होने की आशंका बनी रहती है। सर्दी के मौसम में हृदय रोगी बढ़ने वाले हैं। सर्दी से पहले ही हृदय रोगियों की चिंता बढ़ गई है कि कोई दिक्क्त आई तो निजी अस्पताल में जेब ढीली हो जाएगी, क्योंकि अस्पताल में न तो हृदय रोग के विशेषज्ञ हैं और न हार्ट यूनिट। बड़ी समस्या है कि जिले के सबसे बड़े अस्पताल में आईसीयू नहीं है, इस कारण किसी भी समस्या के गंभीर मरीज को रेफर करना मजबूरी बन जाती है। मरीज को वेंटीलेटर, सी पैक, बाई पैक की सुविधा नहीं मिल पाती है, उसे ऑक्सीजन की ही सुविधा मिल पाती है। बर्न यूनिट भी बंद है। डायलिसिसि यूनिट में पांच मशीन आई, लेकिन अनुमति मिलने में देर के कारण जरूरत के बावजूद मशीनें वापस चली गईं। मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव है। नेफ्रोलॉजी, कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक सर्जरी, न्यूरोलॉजी, न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी, यूरोसर्जरी के डॉक्टर नहीं हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन 1000 से 1200 मरीज पहुंचते हैं, जबकि 110 से 150 मरीज भर्ती होते हैं। सुविधाओं के अभाव में मरीजों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता है।
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हो गए इतने कार्य
पैथोलॉजी में 24 घंटे जांच हो रही है। माड्यूलर ओटी बन गई है। स्त्री एवं प्रसति रोग विभाग एमसीएच विंग में शिफ्ट हो गया। ट्रामा यूनिट का बजट प्राप्त हो गया है, जल्द ही निर्माण होने वाला है। ब्लड बैंक में ब्लड कंपोनेंट यूनिट का काम शुरू हुआ, लेकिन अधर में अटका है।
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अब मरीजों को टांगकर ले जाना मजबूरी नहीं
जिला अस्पताल के प्रथम तल पर बनी पैथोलॉजी में मरीजों को जाने के लिए सिर्फ सीढ़ी ही एक विकल्प थी। लोग असहाय मरीजों का गोद में उठाकर ऊपर चढ़ते थे। अस्पताल प्रशासन ने एक दीवार तोड़कर ऐसी व्यवस्था बना दी है कि मरीजों को रैंप या लिफ्ट से स्टेचर या ह्वील चेयर से पैथोलॉजी तक पहुंचाया जा सकता है। एआरटी सेंटर को ओपीडी के ऊपर शिफ्ट कर दिया गया है। अब पैथोलॉजी में जगह बढ़ जाएगी और यह सेंट्रल लैब के रूप में आकार ले सकेगी।

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वर्जन--
मेडिकल कॉलेज से संबद्ध होने के बाद जिला अस्पताल में सुविधाएं निरंतर बढ़ रही है। सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। मेडिकल कॉलेज में नियुक्तियां होंगी तो विशेषज्ञ डॉक्टर भी आएंगे।
डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य/ सीएमएस
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