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इमरजेंसी के मरीजों को खरीदना पड़ रहा है इंट्राकैथ
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ड्रिप चढ़ाने के लिए मरीजों को इंट्राकैथ बाहर से लाना पड़ता है। इसके लिए प्रति इंट्राकैथ 100 से 150 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं कि अस्पताल में यह नहीं आता है। हालांकि जिम्मेदार न आने की बात से इन्कार करते हैं।
जिला अस्पताल में एक रुपये के पर्ची पर निशुल्क इलाज सहित सारी सुविधाएं मिलनी हैं। वहीं इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों का एक रुपये पर्ची का भी नहीं देना होता है। वह भी निशुल्क है। इसके बावजूद अस्पताल के कई वार्डों में कहीं न कहीं मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। इसमें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को ड्रिप चढ़ाने के लिए लगने वाला इंट्राकैथ बाहर से मंगवाया जा रहा है। अगर किसी ने विरोध किया तो उसे स्वास्थ्यकर्मी किसी तरह से समझाकर लगा देते हैं।
प्रतिक्रिया न करने वाले मरीजों से सीधे तौर पर यही कहा जा रहा है कि इंट्राकैथ यहां पर नहीं आता है, उसे बाहर से ही खरीदकर लाना पड़ेगा। ऐसे में मरीज के तीमारदार को बाहर से खरीदकर लाकर लगाना पड़ता है। जिसकी कीमत दवा की दुकान पर 100 से 150 रुपये ली जा रही है। अगर एक मरीज को कई दिनों तक भर्ती रहना पड़ा तो उसे बदलने पर दूसरा भी खरीदना पड़ता है।
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जोगिया क्षेत्र के निवासी मायाराम ने बताया कि परिवार की महिला की हालत नाजुक थी। उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां पर भर्ती करने के लिए स्टेचर पर लिटाया गया और जब ड्रिप चढ़ाने की बात आई तो बताया गया कि इंट्राकैथ नहीं है। बाहर से लेकर आओ। जब पूछा गया कि अस्पताल में तो मिलता है तो बोला गया कि नहीं आता है। इसी प्रकार शोहरतगढ़ क्षेत्र के निवासी रामहित ने बताया कि वह अपने बीमारी पिता को लेकर आए थे। ड्रिप और अन्य सूई तो अस्पताल से लग रही है। मगर ड्रिप लगाते समय इंट्राकैथ बाहर से लाना पड़ा। कहने के लिए सभी सेवाएं निशुल्क हैं। सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि ऐसी बात नहीं है। इंट्राकैथ आता है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं से मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है।
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सिद्धार्थनगर। जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ड्रिप चढ़ाने के लिए मरीजों को इंट्राकैथ बाहर से लाना पड़ता है। इसके लिए प्रति इंट्राकैथ 100 से 150 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्यकर्मी बताते हैं कि अस्पताल में यह नहीं आता है। हालांकि जिम्मेदार न आने की बात से इन्कार करते हैं।
जिला अस्पताल में एक रुपये के पर्ची पर निशुल्क इलाज सहित सारी सुविधाएं मिलनी हैं। वहीं इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों का एक रुपये पर्ची का भी नहीं देना होता है। वह भी निशुल्क है। इसके बावजूद अस्पताल के कई वार्डों में कहीं न कहीं मरीजों को जेब ढीली करनी पड़ रही है। इसमें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को ड्रिप चढ़ाने के लिए लगने वाला इंट्राकैथ बाहर से मंगवाया जा रहा है। अगर किसी ने विरोध किया तो उसे स्वास्थ्यकर्मी किसी तरह से समझाकर लगा देते हैं।
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प्रतिक्रिया न करने वाले मरीजों से सीधे तौर पर यही कहा जा रहा है कि इंट्राकैथ यहां पर नहीं आता है, उसे बाहर से ही खरीदकर लाना पड़ेगा। ऐसे में मरीज के तीमारदार को बाहर से खरीदकर लाकर लगाना पड़ता है। जिसकी कीमत दवा की दुकान पर 100 से 150 रुपये ली जा रही है। अगर एक मरीज को कई दिनों तक भर्ती रहना पड़ा तो उसे बदलने पर दूसरा भी खरीदना पड़ता है।
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जोगिया क्षेत्र के निवासी मायाराम ने बताया कि परिवार की महिला की हालत नाजुक थी। उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। यहां पर भर्ती करने के लिए स्टेचर पर लिटाया गया और जब ड्रिप चढ़ाने की बात आई तो बताया गया कि इंट्राकैथ नहीं है। बाहर से लेकर आओ। जब पूछा गया कि अस्पताल में तो मिलता है तो बोला गया कि नहीं आता है। इसी प्रकार शोहरतगढ़ क्षेत्र के निवासी रामहित ने बताया कि वह अपने बीमारी पिता को लेकर आए थे। ड्रिप और अन्य सूई तो अस्पताल से लग रही है। मगर ड्रिप लगाते समय इंट्राकैथ बाहर से लाना पड़ा। कहने के लिए सभी सेवाएं निशुल्क हैं। सीएमएस डॉ. नीना वर्मा ने बताया कि ऐसी बात नहीं है। इंट्राकैथ आता है। अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं से मरीजों का बेहतर इलाज किया जा रहा है।