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शोध गाइड के लिए इच्छुक शिक्षकों की पात्रता की होगी जांच
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शोध गाइड के लिए इच्छुक शिक्षकों की पात्रता की होगी जांच
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्वालय कपिलवस्तु से संबद्घ छह जिलों में कई महाविद्यालयों में शोध शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। जिन महाविद्यालयों में शिक्षक की पात्रता होगी, वे शोध गाइड बन सकेंगे। परास्नातक डिग्रीधारी छात्र-छात्राओं को शोध की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने में जुटे हैं, जबकि परास्नातक के साथ स्नातक डिग्री वाले महाविद्यालयों के शिक्षक भी शोध गाइड करने के लिए अपनी पात्रता प्रमाणित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, श्रावस्ती एवं बलरामपुर में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु से संबद्ध 284 महाविद्यालय हैं। उनमें विश्वविद्यालय के अलावा 14 राजकीय एवं 11 वित्त पोषित महाविद्यालय में शोध शुरू होने की संभावना है, जबकि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में शोध कराने की अनुमति नहीं होगी। यूजीसी के नियम के अनुसार, जिन शिक्षकों के पांच रिसर्च पेपर किसी नेशनल जर्नल में प्रकाशित हुए होंगे, वे शोध कराने के लिए पात्र होंगे। 20 विषयों में शोध के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा रहा है। आवेदन करने की अंतिम तथि 15 नवंबर है।
मुख्य नियंता प्रो. दीपक मिश्रा ने कहा कि शोध पात्रता परीक्षा के लिए 15 नवंबर तक आवेदन जमा किए जाएंगे। शोध के लिए सीटें निर्धारित की गई हैं, मगर गाइड बनने की पात्रता रखने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ने पर सीट बढ़ाई जा सकती है। शिक्षकों की पात्रता की जांच की जाएगी।
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निर्धारित सीट
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में दूसरी बार शोध पात्र परीक्षा कराई जाएगी। पिछले वर्ष के शोध गाइड के अनुसार सीटे निर्धारित की गई है। इस बार स्नातक डिग्री वाले महाविद्यालयों में शिक्षकों की पात्रता के अनुसार शोध शुरू होना है, इस कारण सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। अंग्रेजी में 16, हिंदी में 40, संस्कृत में 42, उर्दू में छह, प्राचीन इतिहास में 26, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास में 10, अर्थशास्त्र में आठ, समाजशास्त्र में 30, राजनीति विज्ञान में आठ, लोक प्रशासन में 14, वाणिज्य एवं प्रबंध में 12, शिक्षा शास्त्र में 38, विधि में छह, भूगोल में 10, रसायन विज्ञान में 24, भौतिक विज्ञान में 12, गणित में आठ, प्राणि विज्ञान में 20, वनस्पति विज्ञान में सात, रक्षा अध्ययन में चार पद स्वीकृत हैं।
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सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्वालय कपिलवस्तु से संबद्घ छह जिलों में कई महाविद्यालयों में शोध शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। जिन महाविद्यालयों में शिक्षक की पात्रता होगी, वे शोध गाइड बन सकेंगे। परास्नातक डिग्रीधारी छात्र-छात्राओं को शोध की पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने में जुटे हैं, जबकि परास्नातक के साथ स्नातक डिग्री वाले महाविद्यालयों के शिक्षक भी शोध गाइड करने के लिए अपनी पात्रता प्रमाणित कराने का प्रयास कर रहे हैं।
सिद्धार्थनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, श्रावस्ती एवं बलरामपुर में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु से संबद्ध 284 महाविद्यालय हैं। उनमें विश्वविद्यालय के अलावा 14 राजकीय एवं 11 वित्त पोषित महाविद्यालय में शोध शुरू होने की संभावना है, जबकि स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में शोध कराने की अनुमति नहीं होगी। यूजीसी के नियम के अनुसार, जिन शिक्षकों के पांच रिसर्च पेपर किसी नेशनल जर्नल में प्रकाशित हुए होंगे, वे शोध कराने के लिए पात्र होंगे। 20 विषयों में शोध के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा रहा है। आवेदन करने की अंतिम तथि 15 नवंबर है।
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मुख्य नियंता प्रो. दीपक मिश्रा ने कहा कि शोध पात्रता परीक्षा के लिए 15 नवंबर तक आवेदन जमा किए जाएंगे। शोध के लिए सीटें निर्धारित की गई हैं, मगर गाइड बनने की पात्रता रखने वाले शिक्षकों की संख्या बढ़ने पर सीट बढ़ाई जा सकती है। शिक्षकों की पात्रता की जांच की जाएगी।
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निर्धारित सीट
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में दूसरी बार शोध पात्र परीक्षा कराई जाएगी। पिछले वर्ष के शोध गाइड के अनुसार सीटे निर्धारित की गई है। इस बार स्नातक डिग्री वाले महाविद्यालयों में शिक्षकों की पात्रता के अनुसार शोध शुरू होना है, इस कारण सीटों की संख्या में वृद्धि हो सकती है। अंग्रेजी में 16, हिंदी में 40, संस्कृत में 42, उर्दू में छह, प्राचीन इतिहास में 26, मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास में 10, अर्थशास्त्र में आठ, समाजशास्त्र में 30, राजनीति विज्ञान में आठ, लोक प्रशासन में 14, वाणिज्य एवं प्रबंध में 12, शिक्षा शास्त्र में 38, विधि में छह, भूगोल में 10, रसायन विज्ञान में 24, भौतिक विज्ञान में 12, गणित में आठ, प्राणि विज्ञान में 20, वनस्पति विज्ञान में सात, रक्षा अध्ययन में चार पद स्वीकृत हैं।