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Siddharthnagar News: ई-रिक्शा व नाव चलाने वाले कर रहे थे असलहे की तस्करी
Mon, 27 Jul 2026 11:49 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 27 Jul 2026 11:49 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। खेसरहा पुलिस के हत्थे चढ़े अयोध्या निवासी मनीष और नीरज से पूछताछ में असलहा तस्करी नेटवर्क के तार नेपाल-बिहार से जुड़े होने के इनपुट मिले हैं। दोनों आरोपी अयोध्या जिले के रहने वाले हैं। इनमें एक ई-रिक्शा चलाता था, जबकि दूसरा नाव चलाने का काम करता था।
बिहार से अवैध हथियार लाकर उन्हें नेपाल सीमा तक पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय था। सामान्य पेशे की आड़ में दोनों के असलहा तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
पुलिस का मानना है कि दोनों केवल वाहक की भूमिका में थे और इनके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस बिहार से हथियारों की उपलब्धता, उन्हें सीमा तक पहुंचाने वाले लोगों और नेपाल में संभावित रिसीवरों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपर्क सूत्रों की भी पड़ताल की जा रही है।
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अयोध्या में उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी किसी अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े रहे हैं या नहीं।
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सिद्धार्थनगर। खेसरहा पुलिस के हत्थे चढ़े अयोध्या निवासी मनीष और नीरज से पूछताछ में असलहा तस्करी नेटवर्क के तार नेपाल-बिहार से जुड़े होने के इनपुट मिले हैं। दोनों आरोपी अयोध्या जिले के रहने वाले हैं। इनमें एक ई-रिक्शा चलाता था, जबकि दूसरा नाव चलाने का काम करता था।
बिहार से अवैध हथियार लाकर उन्हें नेपाल सीमा तक पहुंचाने का नेटवर्क सक्रिय था। सामान्य पेशे की आड़ में दोनों के असलहा तस्करी नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है।
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पुलिस का मानना है कि दोनों केवल वाहक की भूमिका में थे और इनके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है।
पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर पुलिस बिहार से हथियारों की उपलब्धता, उन्हें सीमा तक पहुंचाने वाले लोगों और नेपाल में संभावित रिसीवरों की भूमिका की जांच कर रही है। आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और संपर्क सूत्रों की भी पड़ताल की जा रही है।
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अयोध्या में उनकी आपराधिक पृष्ठभूमि भी खंगाली जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे पहले भी किसी अंतरराज्यीय गिरोह से जुड़े रहे हैं या नहीं।