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ई-काॅमर्स : ऑफर का छलावा, ऑनलाइन खरीदारी की आदत से बढ़ी फिजूलखर्ची
Fri, 15 May 2026 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 15 May 2026 12:35 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। जिले के गांवों में अब बाजार जेब में सिमट आया है। स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के सहारे ऑनलाइन खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ा है। एक के साथ एक फ्री, फ्लैश सेल और भारी छूट जैसे ऑफर गांवों के लोगों को लुभा रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही परिवारों का बजट भी बिगड़ने लगा है।
जरूरत से ज्यादा खरीदारी और डिजिटल पेमेंट के कारण खर्च का एहसास कम होने से फिजूलखर्ची बढ़ रही है।
जिले के शोहरतगढ़, ढेबरुआ, बढ़नी और आसपास के गांवों जैसे खुनियांव, परसा, बेलवा और जोगिया में अब हर घर में स्मार्टफोन पहुंच चुका है। पहले जहां लोग हफ्ते में एक बार बाजार जाते थे, अब रोजाना मोबाइल स्क्रीन पर डील खोजते नजर आते हैं। खासतौर पर युवा और महिलाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कपड़े, कॉस्मेटिक्स, किचन आइटम और इलेक्ट्रॉनिक सामान लगातार ऑर्डर कर रही हैं।
सिसवा बुजुर्ग के किसान चिन्नू यादव बताते हैं, घर में जितनी जरूरत नहीं होती, उससे ज्यादा सामान आ जाता है। ऑफर देखकर मना नहीं कर पाते। इसी तरह जोगिया की गृहिणी पूजा देवी कहती हैं, सस्ता लगने के चक्कर में कई बार बेकार का सामान भी ले लेते हैं, जो बाद में इस्तेमाल नहीं होता।
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विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्काउंट का मनोवैज्ञानिक असर लोगों को ज्यादा खरीदारी के लिए प्रेरित करता है। गांवों में यह नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, क्योंकि यहां पहले इतने विकल्प नहीं थे। अब एक क्लिक पर सब कुछ उपलब्ध है। जानकार सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले जरूरत का आकलन करें, बजट तय करें और “ऑफर” के लालच से बचें। नहीं तो ऑनलाइन बाजार का यह जाल गांवों की अर्थव्यवस्था और परिवारों की वित्तीय स्थिति पर और गहरा असर डाल सकता है।
महिलाओं और युवाओं में ज्यादा असर : बाजार पर पकड़ रखने वाले शिक्षक अखिलेश सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं और युवाओं पर पड़ा है। परसा गांव की सीमा बताती हैं, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर देखकर कई चीजें ऑर्डर कर देते हैं, बाद में लगता है जरूरी नहीं थी।
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सिद्धार्थनगर। जिले के गांवों में अब बाजार जेब में सिमट आया है। स्मार्टफोन और सस्ते इंटरनेट के सहारे ऑनलाइन खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ा है। एक के साथ एक फ्री, फ्लैश सेल और भारी छूट जैसे ऑफर गांवों के लोगों को लुभा रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही परिवारों का बजट भी बिगड़ने लगा है।
जरूरत से ज्यादा खरीदारी और डिजिटल पेमेंट के कारण खर्च का एहसास कम होने से फिजूलखर्ची बढ़ रही है।
जिले के शोहरतगढ़, ढेबरुआ, बढ़नी और आसपास के गांवों जैसे खुनियांव, परसा, बेलवा और जोगिया में अब हर घर में स्मार्टफोन पहुंच चुका है। पहले जहां लोग हफ्ते में एक बार बाजार जाते थे, अब रोजाना मोबाइल स्क्रीन पर डील खोजते नजर आते हैं। खासतौर पर युवा और महिलाएं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कपड़े, कॉस्मेटिक्स, किचन आइटम और इलेक्ट्रॉनिक सामान लगातार ऑर्डर कर रही हैं।
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सिसवा बुजुर्ग के किसान चिन्नू यादव बताते हैं, घर में जितनी जरूरत नहीं होती, उससे ज्यादा सामान आ जाता है। ऑफर देखकर मना नहीं कर पाते। इसी तरह जोगिया की गृहिणी पूजा देवी कहती हैं, सस्ता लगने के चक्कर में कई बार बेकार का सामान भी ले लेते हैं, जो बाद में इस्तेमाल नहीं होता।
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विशेषज्ञों के अनुसार, डिस्काउंट का मनोवैज्ञानिक असर लोगों को ज्यादा खरीदारी के लिए प्रेरित करता है। गांवों में यह नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, क्योंकि यहां पहले इतने विकल्प नहीं थे। अब एक क्लिक पर सब कुछ उपलब्ध है। जानकार सलाह देते हैं कि खरीदारी से पहले जरूरत का आकलन करें, बजट तय करें और “ऑफर” के लालच से बचें। नहीं तो ऑनलाइन बाजार का यह जाल गांवों की अर्थव्यवस्था और परिवारों की वित्तीय स्थिति पर और गहरा असर डाल सकता है।
महिलाओं और युवाओं में ज्यादा असर : बाजार पर पकड़ रखने वाले शिक्षक अखिलेश सिंह कहते हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग का सबसे ज्यादा प्रभाव महिलाओं और युवाओं पर पड़ा है। परसा गांव की सीमा बताती हैं, व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम पर देखकर कई चीजें ऑर्डर कर देते हैं, बाद में लगता है जरूरी नहीं थी।