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बिक रहे नकली जाइम, ठगे जा रहे किसान
siddharthnagar
Updated Sun, 30 Apr 2017 10:33 PM IST
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अपराध्ा
- फोटो : amarujala
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इटवा।
नकली आर्गेनिक खाद और कीटनाशक दवाओं और जाइम से ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानें पटी पड़ी हैं। अधिक लाभ पाने की लालच में दुकानदार किसानों को चूना लगाने में लगे हुए हैं। दोनों दवाओं की पैकिंग में मामूली अंतर को किसान नहीं समझ पा रहे। विभाग के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में नकली आर्गेनिक खाद की बिक्री जोरों पर है। एक जैसे बोरे और डिब्बे में होने, प्रिंट मूल्य में समानता होने के कारण असली-नकली में अंतर नहीं कर पा रहे। मोल-भाव करने वाले किसानों को दुकानदार आसानी से जाल में फांस ठग रहे हैं। दुकानदार का कहना है कि असली खाद का मूल्य निर्धारित होता है, उसमें छूट नहीं दी जा सकती। नकली खाद की खरीद आधे से भी कम दाम पर होता है, इसलिए दुकानदार कुछ देर में 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट दे देता है। एक प्रतिष्ठित कंपनी अन्य खाद के अलावा एक जाइम बनाती है जो दस किलो के गोल डिब्बे के अंदर भूरे रंग के दाने के रूप में होता है। बाजार में इसका मूल्य 280 रुपये है। इसी से मिलते-जुलते पैक में नकली जाइम भी उपलब्ध है। दोनों डिब्बों में मामूली अंतर के कारण किसान धोखा खा जाता है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि किसानों को चाहिए कि उर्वरक, जाइम अथवा खेती में प्रयोग होने वाले अन्य उत्पाद विश्वसनीय कंपनी व दुकानदारों से ही खरीदें। उधर, जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी का कहना था कि विभाग लगातार जांच करता रहता है। यह मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित क्षेत्र में छापेमारी की जाएगी।
क्या है अंतर
इटवा। बाजार में इस नाम से बिकने वाला नकली जाइम का दाना काले रंग का होता है। वहीं प्लास्टिक के डिब्बे का ढक्कन सादा है। डिब्बे के रंग में भी अंतर है। वहीं, असली जाइम के दाने का रंग भूरा होता है। डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर काले रंग से कंपनी का बैच नंबर और मोनोग्राम छपा रहता है।
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नकली आर्गेनिक खाद और कीटनाशक दवाओं और जाइम से ग्रामीण क्षेत्रों की दुकानें पटी पड़ी हैं। अधिक लाभ पाने की लालच में दुकानदार किसानों को चूना लगाने में लगे हुए हैं। दोनों दवाओं की पैकिंग में मामूली अंतर को किसान नहीं समझ पा रहे। विभाग के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
नाम न छापने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया कि तहसील क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में नकली आर्गेनिक खाद की बिक्री जोरों पर है। एक जैसे बोरे और डिब्बे में होने, प्रिंट मूल्य में समानता होने के कारण असली-नकली में अंतर नहीं कर पा रहे। मोल-भाव करने वाले किसानों को दुकानदार आसानी से जाल में फांस ठग रहे हैं। दुकानदार का कहना है कि असली खाद का मूल्य निर्धारित होता है, उसमें छूट नहीं दी जा सकती। नकली खाद की खरीद आधे से भी कम दाम पर होता है, इसलिए दुकानदार कुछ देर में 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट दे देता है। एक प्रतिष्ठित कंपनी अन्य खाद के अलावा एक जाइम बनाती है जो दस किलो के गोल डिब्बे के अंदर भूरे रंग के दाने के रूप में होता है। बाजार में इसका मूल्य 280 रुपये है। इसी से मिलते-जुलते पैक में नकली जाइम भी उपलब्ध है। दोनों डिब्बों में मामूली अंतर के कारण किसान धोखा खा जाता है। इस संबंध में कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. मारकंडेय सिंह का कहना है कि किसानों को चाहिए कि उर्वरक, जाइम अथवा खेती में प्रयोग होने वाले अन्य उत्पाद विश्वसनीय कंपनी व दुकानदारों से ही खरीदें। उधर, जिला कृषि अधिकारी एसएन चौधरी का कहना था कि विभाग लगातार जांच करता रहता है। यह मामला संज्ञान में नहीं है। संबंधित क्षेत्र में छापेमारी की जाएगी।
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क्या है अंतर
इटवा। बाजार में इस नाम से बिकने वाला नकली जाइम का दाना काले रंग का होता है। वहीं प्लास्टिक के डिब्बे का ढक्कन सादा है। डिब्बे के रंग में भी अंतर है। वहीं, असली जाइम के दाने का रंग भूरा होता है। डिब्बे के ऊपरी हिस्से पर काले रंग से कंपनी का बैच नंबर और मोनोग्राम छपा रहता है।
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