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Siddharthnagar News: कालानमक धान की खेती का डीएम ने किया निरीक्षण
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सिद्धार्थनगर। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने शुक्रवार को विकासखंड बर्डपुर की ग्राम पंचायत बर्डपुर नंबर-6 के नोनहवा टोला में कालानमक धान की खेती का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसान जयराम के खेत में कालानमक धान की विभिन्न प्रजातियों की रोपाई का जायजा लिया और खेती की लागत, उत्पादन तथा आय के बारे में जानकारी प्राप्त की।
किसान जयराम ने डीएम को बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में उन्होंने दो हेक्टेयर में कालानमक धान की खेती की थी। इसमें करीब एक लाख रुपये की लागत आई। फसल से 45 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 30 क्विंटल चावल प्राप्त हुआ।
उन्होंने बताया कि कालानमक चावल 14,000 से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका, जिससे करीब 4.40 लाख रुपये की आय हुई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 3.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। किसान ने बताया कि इसी आय से उन्होंने एक छोटा ट्रैक्टर भी खरीदा।
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किसान की सफलता से प्रभावित होकर जिलाधिकारी ने कहा कि कालानमक धान की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है। उन्होंने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया।
किसान जयराम ने बताया कि पिछले वर्ष हुए लाभ को देखते हुए इस बार उन्होंने कालानमक धान का रकबा बढ़ाकर चार हेक्टेयर कर दिया है और रोपाई का कार्य जारी है।
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किसान जयराम ने डीएम को बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में उन्होंने दो हेक्टेयर में कालानमक धान की खेती की थी। इसमें करीब एक लाख रुपये की लागत आई। फसल से 45 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ, जिससे लगभग 30 क्विंटल चावल प्राप्त हुआ।
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उन्होंने बताया कि कालानमक चावल 14,000 से 15,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बिका, जिससे करीब 4.40 लाख रुपये की आय हुई। लागत निकालने के बाद उन्हें लगभग 3.40 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। किसान ने बताया कि इसी आय से उन्होंने एक छोटा ट्रैक्टर भी खरीदा।
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किसान की सफलता से प्रभावित होकर जिलाधिकारी ने कहा कि कालानमक धान की खेती किसानों की आय बढ़ाने का बेहतर माध्यम बन सकती है। उन्होंने किसानों को गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और वैज्ञानिक पद्धति से खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने पर भी जोर दिया।
किसान जयराम ने बताया कि पिछले वर्ष हुए लाभ को देखते हुए इस बार उन्होंने कालानमक धान का रकबा बढ़ाकर चार हेक्टेयर कर दिया है और रोपाई का कार्य जारी है।