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Siddharthnagar News: उपनिदेशक खेल ने बाहरी लोगों से भी लिए बयान, उठने लगे सवाल
Sun, 23 Jul 2023 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 23 Jul 2023 12:53 AM IST
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देवरिया। खेल छात्रावास के प्रशिक्षु से पीठ मालिश कराने की घटना के मामले में पांच माह बाद जांच करने पहुंचे खेल निदेशक ने बाहरी लोगों के भी बयान दर्ज किए हैं। जबकि उनका मामले से कोई वास्ता तक नहीं है। ऐसे में इस जांच प्रक्रिया पर खेल जगत से जुड़े लोग ही सवाल उठाने लगे हैं। उधर छात्रावास में मारपीट की घटना के बाद शनिवार को क्रीड़ाधिकारी को क्षेत्रीय खेल कार्यालय गोरखपुर में तलब किया गया था।
खेल जगत से जुड़े लोगों का प्रश्न है कि जब मामला स्टेडियम परिसर का था और खिलाड़ियों से ही जुड़ा था तो इसमें बाहरी लोगों को क्यों शामिल किया गया। क्रिकेट के कुछ निष्कासित कर दिए गए खिलाड़ी भी बुलाए गए थे, जबकि वाॅलीबाॅल से एक भी नहीं। चर्चा है कि मामले में निलंबित चल रहे प्रशिक्षक को पुनः बुलाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। साथ ही वाॅलीबाॅल और क्रिकेट छात्रावास के खिलाड़ियों के बीच तनातनी जांच टीम के आने के दिन ही क्यों हुई, कहीं यह पहले से प्लान कर के तो नहीं कराई गई थी, ताकि खिलाड़ियों को दबाव में लाया जा सके , यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
बीते फरवरी माह में रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्रिकेट छात्रावास में एक प्रशिक्षु से पीठ मालिश कराने का वीडियो वायरल होने के बाद यकायक देवरिया छात्रावास पूरे प्रदेश में चर्चित हो गया था। मामले में विभाग की फजीहत को देख छात्रावास के क्रिकेट प्रशिक्षक को खेल निदेशालय ने निलंबित कर दिया और लखनऊ कार्यालय से अटैच कर दिया। उसी दौरान उपनिदेशक खेल एवं वर्तमान में ग्रीनपार्क स्टेडियम का कार्यभार देख रहे आरएन सिंह को मामले में जांच अधिकारी बनाया गया। घटना के पांच माह बीतने के बाद शुक्रवार की शाम को इस मामले की जांच करने वह लखनऊ से आए, हालांकि जाम में फंसने के कारण वह देरी से स्टेडियम पहुंचे। अधिकारी ने खिलाड़ियों के साथ ही प्रशिक्षकों, आफिस स्टाफ, क्रीड़ाधिकारी के साथ ही बयान दर्ज किए। उन्होंने आरोपी प्रशिक्षक के नजदीकी माने जाने वाले शहर के ही एक इंटर कॉलेज के क्रीड़ाध्यापक और स्टेडियम में अपने पाल्य को संबंधित प्रशिक्षक से ही प्रशिक्षण दिलाने वाले कुछ अभिभावकों से भी बयान लिया। इंटर कॉलेज के क्रीड़ाध्यापक तो स्टेडियम में जबरन प्रवेश करने के मामले में यहां के कर्मचारियों से उलझ चुके हैं और इन पर स्टेडियम प्रशासन ने डीएम एवं डीआईओएस से शिकायत करते हुए प्रवेश न करने तक की नोटिस जारी कर दी थी। सवाल यह है कि जो आरोपी के नजदीकी रहे हैं वह उनके खिलाफ कैसे कुछ कहेंगे।
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एक विभागीय प्रशिक्षक का नहीं हुआ बयान
पिछले माह तक स्पोर्ट्स स्टेडियम के विभागीय भारोत्तोलन प्रशिक्षक रहे रवि कुमार शर्मा का कौशांबी में तबादला हो चुका है। वह भी फरवरी माह में घटित इस घटना के गवाह रहे हैं। इसके बावजूद उनका बयान इस मामले में नहीं हुआ।
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विभाग से निलंबित चल रहे क्रिकेट प्रशिक्षक अब्दुल अहद की जांच उन्हें सौंपी गई थी। शुक्रवार की शाम को वह देवरिया छात्रावास में पहुंचे थे। यहां के सभी खिलाड़ियों, क्रीड़ाधिकारी, लिपिक, चपरासी, छात्रावास में नियमित झाड़ू पोछा करने वाले तक के बयान दर्ज किए हैं। आपस में ही मारपीट करने के बाद सात खिलाड़ी सदर कोतवाली में बैठाए गए थे, तो वहां जाकर प्रभारी से मिले माफीनामा और ऐसी गलती पुन: न होने का लिखित देने पर इन्हें छुड़वाकर छात्रावास में लाया भी गया। बयान के दौरान अगर कोई अभिभावक अपनी बात रखना चाहे तो उसे भी सुना गया। दो-चार दिन में वह अपनी रिपोर्ट खेल निदेशक डॉ.आरपी सिंह को सौंप देंगे।
- आरएन सिंह, उपनिदेशक खेल
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उप खेल निदेशक ने शुक्रवार की शाम करीब आठ बजे तक सभी पक्षों का बयान दर्ज किया। शहर के एक इंटर कॉलेज में ही छात्रावास के खिलाड़ियों का नामांकन है, इसलिए उन्हें भी बुलाया गया था।
- राज नारायन प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी
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खेल जगत से जुड़े लोगों का प्रश्न है कि जब मामला स्टेडियम परिसर का था और खिलाड़ियों से ही जुड़ा था तो इसमें बाहरी लोगों को क्यों शामिल किया गया। क्रिकेट के कुछ निष्कासित कर दिए गए खिलाड़ी भी बुलाए गए थे, जबकि वाॅलीबाॅल से एक भी नहीं। चर्चा है कि मामले में निलंबित चल रहे प्रशिक्षक को पुनः बुलाने की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है। साथ ही वाॅलीबाॅल और क्रिकेट छात्रावास के खिलाड़ियों के बीच तनातनी जांच टीम के आने के दिन ही क्यों हुई, कहीं यह पहले से प्लान कर के तो नहीं कराई गई थी, ताकि खिलाड़ियों को दबाव में लाया जा सके , यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
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बीते फरवरी माह में रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्रिकेट छात्रावास में एक प्रशिक्षु से पीठ मालिश कराने का वीडियो वायरल होने के बाद यकायक देवरिया छात्रावास पूरे प्रदेश में चर्चित हो गया था। मामले में विभाग की फजीहत को देख छात्रावास के क्रिकेट प्रशिक्षक को खेल निदेशालय ने निलंबित कर दिया और लखनऊ कार्यालय से अटैच कर दिया। उसी दौरान उपनिदेशक खेल एवं वर्तमान में ग्रीनपार्क स्टेडियम का कार्यभार देख रहे आरएन सिंह को मामले में जांच अधिकारी बनाया गया। घटना के पांच माह बीतने के बाद शुक्रवार की शाम को इस मामले की जांच करने वह लखनऊ से आए, हालांकि जाम में फंसने के कारण वह देरी से स्टेडियम पहुंचे। अधिकारी ने खिलाड़ियों के साथ ही प्रशिक्षकों, आफिस स्टाफ, क्रीड़ाधिकारी के साथ ही बयान दर्ज किए। उन्होंने आरोपी प्रशिक्षक के नजदीकी माने जाने वाले शहर के ही एक इंटर कॉलेज के क्रीड़ाध्यापक और स्टेडियम में अपने पाल्य को संबंधित प्रशिक्षक से ही प्रशिक्षण दिलाने वाले कुछ अभिभावकों से भी बयान लिया। इंटर कॉलेज के क्रीड़ाध्यापक तो स्टेडियम में जबरन प्रवेश करने के मामले में यहां के कर्मचारियों से उलझ चुके हैं और इन पर स्टेडियम प्रशासन ने डीएम एवं डीआईओएस से शिकायत करते हुए प्रवेश न करने तक की नोटिस जारी कर दी थी। सवाल यह है कि जो आरोपी के नजदीकी रहे हैं वह उनके खिलाफ कैसे कुछ कहेंगे।
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एक विभागीय प्रशिक्षक का नहीं हुआ बयान
पिछले माह तक स्पोर्ट्स स्टेडियम के विभागीय भारोत्तोलन प्रशिक्षक रहे रवि कुमार शर्मा का कौशांबी में तबादला हो चुका है। वह भी फरवरी माह में घटित इस घटना के गवाह रहे हैं। इसके बावजूद उनका बयान इस मामले में नहीं हुआ।
विभाग से निलंबित चल रहे क्रिकेट प्रशिक्षक अब्दुल अहद की जांच उन्हें सौंपी गई थी। शुक्रवार की शाम को वह देवरिया छात्रावास में पहुंचे थे। यहां के सभी खिलाड़ियों, क्रीड़ाधिकारी, लिपिक, चपरासी, छात्रावास में नियमित झाड़ू पोछा करने वाले तक के बयान दर्ज किए हैं। आपस में ही मारपीट करने के बाद सात खिलाड़ी सदर कोतवाली में बैठाए गए थे, तो वहां जाकर प्रभारी से मिले माफीनामा और ऐसी गलती पुन: न होने का लिखित देने पर इन्हें छुड़वाकर छात्रावास में लाया भी गया। बयान के दौरान अगर कोई अभिभावक अपनी बात रखना चाहे तो उसे भी सुना गया। दो-चार दिन में वह अपनी रिपोर्ट खेल निदेशक डॉ.आरपी सिंह को सौंप देंगे।
- आरएन सिंह, उपनिदेशक खेल
उप खेल निदेशक ने शुक्रवार की शाम करीब आठ बजे तक सभी पक्षों का बयान दर्ज किया। शहर के एक इंटर कॉलेज में ही छात्रावास के खिलाड़ियों का नामांकन है, इसलिए उन्हें भी बुलाया गया था।
- राज नारायन प्रसाद, क्रीड़ाधिकारी