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अस्थिकलश राष्ट्रीय संग्रहालय कपिलवस्तु लाने की मांग
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अस्थि कलश राष्ट्रीय संग्रहालय कपिलवस्तु लाने की मांग
सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में कपिलवस्तु में हुई खुदाई में प्राप्त दो अस्थि कलश में एक को दिल्ली से पिपरहवा कपिलवस्तु स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न देशों के बौद्ध अनुयायी यहां आएंगे और पर्यटकीय सुविधाओं का विकास होगा।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा के प्रश्न काल में सांसद जगदंबिका पाल ने राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के मुद्दे पर पूरक प्रश्न पूछते हुए संसदीय क्षेत्र डुमरियागंज के कपिलवस्तु स्थित भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यहां पर सिद्धार्थ ने बचपन के कई वर्ष व्यतीत किए वहां पर बौद्ध धर्म के मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आते है। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु में खुदाई के दौरान मिले दो अस्थि कलश को वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में रखा गया है, जबकि गौतम बुद्ध ने जीवन के प्रारंभिक 29 वर्ष कपिलवस्तु में ही व्यतीत किए थे। इसलिए बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए कपिलवस्तु अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि एक अस्थि कलश वहां से राष्ट्रीय संग्रहालय पिपरहवा, कपिलवस्तु में लायी जाय तो बौद्ध धर्म को मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष सारनाथ, कपिलवस्तु, कुशीनगर एवं श्रावस्ती के साथ अस्थिकलश के भी दर्शन कर सकेंगे।
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सिद्धार्थनगर। सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में कपिलवस्तु में हुई खुदाई में प्राप्त दो अस्थि कलश में एक को दिल्ली से पिपरहवा कपिलवस्तु स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय में लाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इससे विभिन्न देशों के बौद्ध अनुयायी यहां आएंगे और पर्यटकीय सुविधाओं का विकास होगा।
संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा के प्रश्न काल में सांसद जगदंबिका पाल ने राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के मुद्दे पर पूरक प्रश्न पूछते हुए संसदीय क्षेत्र डुमरियागंज के कपिलवस्तु स्थित भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यहां पर सिद्धार्थ ने बचपन के कई वर्ष व्यतीत किए वहां पर बौद्ध धर्म के मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आते है। उन्होंने कहा कि कपिलवस्तु में खुदाई के दौरान मिले दो अस्थि कलश को वर्तमान में राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में रखा गया है, जबकि गौतम बुद्ध ने जीवन के प्रारंभिक 29 वर्ष कपिलवस्तु में ही व्यतीत किए थे। इसलिए बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए कपिलवस्तु अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि एक अस्थि कलश वहां से राष्ट्रीय संग्रहालय पिपरहवा, कपिलवस्तु में लायी जाय तो बौद्ध धर्म को मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष सारनाथ, कपिलवस्तु, कुशीनगर एवं श्रावस्ती के साथ अस्थिकलश के भी दर्शन कर सकेंगे।
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