वर्ष 2015 तक के मान्यता प्राप्त स्कूलों को मानदेय देने की मांग
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मुख्य अतिथि प्रदेश प्रवक्ता व जिला प्रभारी देश बंधु शुक्ल ने कहा कि सरकार व विभागीय लोग वित्तविहीन शिक्षकों के समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय के लिए प्रदेश सरकार ने 200 करोड़ रुपये बजट की व्यवस्था की थी।
वितरण के संबंध में शिक्षा विभाग की ओर से जारी शासनादेश से पूरे प्रदेश के शिक्षक हताश व निराश हैं। कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय नहीं बेरोजगारी भत्ता दिया जा रहा है, जो किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है। कहा कि शासनादेश में जहां मानदेय शब्द के पूर्व प्रोत्साहन शब्द लिखा गया है, उसे जल्द हटाया जाए।
शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी मानदेय में सम्मिलित किया जाए। प्रधानाचार्यों, शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सेवा नियमावली बनाई जाए। शिक्षकों, प्राचार्यों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पूर्व प्रयुक्त अंशकालिक शब्द हटाए जाने सहित अन्य मांगों को जल्द पूरा किया जाए। कहा कि अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो 12 दिसंबर को लखनऊ में धरना दिया जाएगा।
इस दौरान संरक्षक गौरी शंकर त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष मिथिलेश मणि त्रिपाठी, विरेंद्र कुमार चौधरी, सुरेंद मणि त्रिपाठी, उमेश कुमार पंकज, कृष्णधर दूबे, सुनील पांडेय, सुनील वर्मा, अंबरीश मिश्र, अनिल कुमार शुक्ल, सेराज अहमद खान, जेबी सिंह, सुभाषचंद्र त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।