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दफ्तर छोड़ चुनाव की थकान मिटा रहे अफसर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 03 Mar 2017 10:52 PM IST
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विकास भवन में खाली रहा मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की कुर्सी।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। विधानसभा चुनाव के लिए मतदान खत्म हुए तीन दिन बीत चुके हैं, मगर अफसरों की खुमारी अब तक नहीं उतर पाई है। थकान का बहाना बनाकर अफसर ड्यूटी से गायब हैं। आलम यह है कि शुक्रवार को भी विकास भवन परिसर में स्थित कई विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों के दफ्तर का ताला भी नहीं खुला। कुछ के ताले खुले भी, लेकिन साहब उपस्थित नहीं हुए। संपर्क किया गया तो कोई खुद के सीडीओ के पास होने तो कोई फील्ड में होने की बात समझाता रहा। हालांकि सीडीओ ने खुद स्वीकार किया कि उनके पास सिर्फ एक अधिकारी ही आए थे।
चुनाव में दिन-रात काम करने के बाद थकान हावी होना स्वाभाविक है। प्रत्याशी और ड्यूटी में लगे कर्मचारी तो इस थकान से उबर गए, लेकिन आरामतलबी के आदी अफसरों की थकान दूर होने का नाम नहीं ले रही। शुक्रवार को विकास भवन परिसर में स्थित कई विभागों का कुछ ऐसा ही हाल रहा। अफसर न तो जनता से मिलने के समय पर उपस्थित हुए और न ही उसके बाद पहुंचना मुनासिब समझा। अलग-अलग बहानों से गायब अफसरों से मिलने के इंतजार में दूर-दराज से आए ग्रामीण जरूर भटकते दिखे। दोपहर 12 बजे जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, परियोजना अधिकारी नेडा के कमरों की कुंडी बंद थी। परियोजना अधिकारी डूडा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, एक्सईन ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के कक्ष खुले थे, मगर साहब नदारद थे। पूछताछ में कर्मचारियों ने किसी के फील्ड में होना बताया तो किसी के उच्चाधिकारियों के पास।
उधर, एक माह से चुनावी घमासान के चलते ठप पड़े विभागीय कार्यों के लिए दूर-दराज से आए ग्रामीण भटकते दिखे। समाज कल्याण के बाहर बैठी किसमती देवी का कहना था कि वह पेंशन से संबंधित शिकायत लेकर आई थी, लेकिन साहब नहीं मिले। विकलांग राजेश ने बताया कि चुनाव बाद आने को कहा गया था, लेकिन अब भी निराशा ही मिल रही है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार मिश्र का कहना था कि केवल मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीस सिंह उनके पास आए थे। अन्य अफसरों के बारे में जानकारी नहीं। इस बारे में पता कराते हैं। अगर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर कोई भी अफसर गैर हाजिर है तो यह लापरवाही है। संबंधितों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
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चुनाव में दिन-रात काम करने के बाद थकान हावी होना स्वाभाविक है। प्रत्याशी और ड्यूटी में लगे कर्मचारी तो इस थकान से उबर गए, लेकिन आरामतलबी के आदी अफसरों की थकान दूर होने का नाम नहीं ले रही। शुक्रवार को विकास भवन परिसर में स्थित कई विभागों का कुछ ऐसा ही हाल रहा। अफसर न तो जनता से मिलने के समय पर उपस्थित हुए और न ही उसके बाद पहुंचना मुनासिब समझा। अलग-अलग बहानों से गायब अफसरों से मिलने के इंतजार में दूर-दराज से आए ग्रामीण जरूर भटकते दिखे। दोपहर 12 बजे जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला विकलांग कल्याण अधिकारी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, परियोजना अधिकारी नेडा के कमरों की कुंडी बंद थी। परियोजना अधिकारी डूडा, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी, जिला युवा कल्याण अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, एक्सईन ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के कक्ष खुले थे, मगर साहब नदारद थे। पूछताछ में कर्मचारियों ने किसी के फील्ड में होना बताया तो किसी के उच्चाधिकारियों के पास।
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उधर, एक माह से चुनावी घमासान के चलते ठप पड़े विभागीय कार्यों के लिए दूर-दराज से आए ग्रामीण भटकते दिखे। समाज कल्याण के बाहर बैठी किसमती देवी का कहना था कि वह पेंशन से संबंधित शिकायत लेकर आई थी, लेकिन साहब नहीं मिले। विकलांग राजेश ने बताया कि चुनाव बाद आने को कहा गया था, लेकिन अब भी निराशा ही मिल रही है। इस संबंध में मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार मिश्र का कहना था कि केवल मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. फणीस सिंह उनके पास आए थे। अन्य अफसरों के बारे में जानकारी नहीं। इस बारे में पता कराते हैं। अगर बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के बगैर कोई भी अफसर गैर हाजिर है तो यह लापरवाही है। संबंधितों से जवाब तलब कर कार्रवाई की जाएगी।
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