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नामजद आरोपी के खिलाफ वारंट जारी
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 15 Oct 2017 09:50 PM IST
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पूछताछ करती पुलिस्र
- फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। नगर पालिका सिद्धार्थनगर में सरकारी पत्रावली गायब होने के प्रकरण में नामजद आरोपी के खिलाफ अदालत ने वारंट जारी किया। अदालत ने आरोपी को 8 नवंबर तक हाजिर होने का समय दिया है।
वर्ष 2011-12 में नगर पालिका सिद्धार्थनगर से हुए टैक्सी स्टैंड आवंटन की फाइल गायब हो गई थी। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 6 रमजान नगर निवासी सुरेंद्र अग्रहरि ने मामले को आरटीआई के माध्यम से उजागर किया। 1 दिसंबर 2016 को सुरेंद्र अग्रहरि ने निदेशक स्थानीय निकाय लखनऊ को पत्र भेजकर प्रकरण को संज्ञान में दिया। आरोप लगाया कि वर्ष 2011-12 में नगर के गोरखपुर टैक्सी स्टैंड के नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर किया गया है। ठेकेदार व विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलीभगत कर सरकारी धन का बंदरबाट कर लिया।
निदेशक स्थानीय निकाय ने प्रकरण की जांच के लिए डीएम को निर्देशित किया। 16 मार्च 2017 को तत्कालीन एडीएम बाबूराम ने एसडीएम सदर को 10 बिंदुओं पर जांच करने के लिए निर्देशित करते हुए सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए कहा।
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तत्कालीन एसडीएम विनीत उपाध्याय ने कई बार नगर पालिका प्रशासन से मामले के संबंध में जानकारी मांगी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एसडीएम सदर ने 15 अप्रैल 2017 को एसओ सदर से मामले की प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा। इसके बाद नगर पालिका प्रशासन की नींद खुली। 19 अप्रैल 2017 को तत्कालीन ईओ राजीव रंजन ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सदर थाने को तहरीर दी जिसमें रिटायर्ड लिपिक रामअवध व लिपिक संतोष कुमार श्रीवास्तव पर फाइल गायब करने का आरोप लगाते हुए नामजद किया।
23 अप्रैल 2017 को दर्ज हुए मुकदमा की विवेचना के बाद पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कागजात दाखिल किए। विवचेना में पुलिस ने दूसरे आरोपी को क्लीन चिट दे दी। एसओ सदर डीके श्रीवास्तव ने कहा कि मामला तैनाती के पूर्व का है। पूरा प्रकरण नहीं मालूम है। आरोपी के खिलाफ वारंट जारी हुआ है तो उसे तामील कराया जाएगा।
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वर्ष 2011-12 में नगर पालिका सिद्धार्थनगर से हुए टैक्सी स्टैंड आवंटन की फाइल गायब हो गई थी। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 6 रमजान नगर निवासी सुरेंद्र अग्रहरि ने मामले को आरटीआई के माध्यम से उजागर किया। 1 दिसंबर 2016 को सुरेंद्र अग्रहरि ने निदेशक स्थानीय निकाय लखनऊ को पत्र भेजकर प्रकरण को संज्ञान में दिया। आरोप लगाया कि वर्ष 2011-12 में नगर के गोरखपुर टैक्सी स्टैंड के नीलामी प्रक्रिया में हेरफेर किया गया है। ठेकेदार व विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों ने मिलीभगत कर सरकारी धन का बंदरबाट कर लिया।
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निदेशक स्थानीय निकाय ने प्रकरण की जांच के लिए डीएम को निर्देशित किया। 16 मार्च 2017 को तत्कालीन एडीएम बाबूराम ने एसडीएम सदर को 10 बिंदुओं पर जांच करने के लिए निर्देशित करते हुए सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रेषित करने के लिए कहा।
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तत्कालीन एसडीएम विनीत उपाध्याय ने कई बार नगर पालिका प्रशासन से मामले के संबंध में जानकारी मांगी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। एसडीएम सदर ने 15 अप्रैल 2017 को एसओ सदर से मामले की प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा। इसके बाद नगर पालिका प्रशासन की नींद खुली। 19 अप्रैल 2017 को तत्कालीन ईओ राजीव रंजन ने सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए सदर थाने को तहरीर दी जिसमें रिटायर्ड लिपिक रामअवध व लिपिक संतोष कुमार श्रीवास्तव पर फाइल गायब करने का आरोप लगाते हुए नामजद किया।
23 अप्रैल 2017 को दर्ज हुए मुकदमा की विवेचना के बाद पुलिस ने सीजेएम कोर्ट में कागजात दाखिल किए। विवचेना में पुलिस ने दूसरे आरोपी को क्लीन चिट दे दी। एसओ सदर डीके श्रीवास्तव ने कहा कि मामला तैनाती के पूर्व का है। पूरा प्रकरण नहीं मालूम है। आरोपी के खिलाफ वारंट जारी हुआ है तो उसे तामील कराया जाएगा।