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भाई के हत्यारे को 10 साल का कारावास
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Wed, 27 Apr 2016 10:47 PM IST
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डिवाइस लगाकर दे रहा था परीक्षा
- फोटो : अमर उजाला
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जमीन के विवाद में भाई की हत्या के आरोपी को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 10 वर्ष के कैद की सजा सुनाई है। विभिन्न धाराओं में उस पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड का तीन चौथाई हिस्सा मृतक के परिजनों को दिया जाएगा।
मामला जोगिया उदयपुर कोतवाली के महुआ गांव का है। अभियोजन के अनुसार ग्राम महुआ के तौलन का अपने भाई रामकिशोर के साथ जमीन का विवाद चल रहा था। इसी विवाद में 9 नवंबर 2008 को दोनों के बीच मारपीट हुई थी। इसमें तौलन घायल हो गया था।
अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी। मृतक के पुत्र इंदल की तहरीर पर पुलिस ने रामकिशोर, पत्नी चंदा और तीनों पुत्र पवन, रामऔतार व रामराज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। छानबीन के बाद पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया।
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विभिन्न तिथियों पर सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पांच गवाह व 14 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। बचाव पक्ष ने रंजिशन फंसाने की दलील दी। गवाहों के बयान व उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने रामकिशोर को हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
20 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। अर्थदंड की तीन चौथाई राशि मृतक आश्रितों को दिया जाएगा। बता दें कि मामले में आरोपी रामकिशोर के पुत्रों का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश नरायन श्रीवास्तव ने पैरवी की।
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मामला जोगिया उदयपुर कोतवाली के महुआ गांव का है। अभियोजन के अनुसार ग्राम महुआ के तौलन का अपने भाई रामकिशोर के साथ जमीन का विवाद चल रहा था। इसी विवाद में 9 नवंबर 2008 को दोनों के बीच मारपीट हुई थी। इसमें तौलन घायल हो गया था।
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अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी। मृतक के पुत्र इंदल की तहरीर पर पुलिस ने रामकिशोर, पत्नी चंदा और तीनों पुत्र पवन, रामऔतार व रामराज के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। छानबीन के बाद पुलिस ने न्यायालय में चार्जशीट दाखिल किया।
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विभिन्न तिथियों पर सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पांच गवाह व 14 अभिलेखीय साक्ष्य पेश किए गए। बचाव पक्ष ने रंजिशन फंसाने की दलील दी। गवाहों के बयान व उपलब्ध साक्ष्यों के अवलोकन के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव ने रामकिशोर को हत्या का दोषी मानते हुए 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
20 हजार रुपये अर्थदंड जमा करने का आदेश दिया। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी। अर्थदंड की तीन चौथाई राशि मृतक आश्रितों को दिया जाएगा। बता दें कि मामले में आरोपी रामकिशोर के पुत्रों का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है। अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अखिलेश नरायन श्रीवास्तव ने पैरवी की।