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Siddharthnagar News: खाद तस्करी रोकने के लिए बढ़ी सख्ती, 106 कर्मी संभालेंगे कमान
Fri, 12 Jun 2026 11:38 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 12 Jun 2026 11:38 PM IST
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सिद्धार्थनगर। खरीफ सीजन में डीएपी समेत अन्य उर्वरकों की बढ़ती मांग को देखते हुए प्रशासन ने उर्वरक वितरण व्यवस्था पर सख्ती बढ़ा दी है। किसानों को उनकी जोत और फसल के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने, कालाबाजारी, ओवररेटिंग, जमाखोरी और भारत-नेपाल सीमा पर संभावित तस्करी रोकने के लिए जिले में 106 कर्मचारियों को नामित किया गया है।
जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर जारी आदेश में सभी उपजिलाधिकारियों, कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों, क्षेत्राधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल को निगरानी व्यवस्था में शामिल किया गया है। अधिकारियों को अपने क्षेत्र के सहकारी और निजी उर्वरक प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर प्रतिदिन रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
आदेश के अनुसार यूरिया, डीएपी, एनपीके कॉम्प्लेक्स और एमओपी की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही सुनिश्चित कराई जाएगी। निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने वाले विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कार्रवाई होगी।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को आधार कार्ड और कृषि जोत के आधार पर ही उर्वरक वितरित किया जाएगा। पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री सुनिश्चित की जाएगी और जोतवही और खतौनी के आधार पर फसल की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक दिया जाएगा।
उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री पर भी रोक लगाई गई है। यदि कोई विक्रेता डीएपी, यूरिया या अन्य प्रमुख उर्वरक लेने के लिए किसानों को दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित उर्वरक निर्माता या आपूर्तिकर्ता संस्था की भूमिका मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सभी उर्वरक व्यवसायियों को स्टॉक पंजिका, बिक्री रजिस्टर और रसीद का रखरखाव अनिवार्य रूप से करना होगा। प्रत्येक बिक्री केंद्र पर उर्वरकों की उपलब्धता और निर्धारित मूल्य का विवरण प्रतिदिन स्टॉक बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा। प्रशासन का कहना है कि खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए जनपद स्तरीय समिति नियमित समीक्षा करेगी और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
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जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन के निर्देश पर जारी आदेश में सभी उपजिलाधिकारियों, कृषि और सहकारिता विभाग के अधिकारियों, क्षेत्राधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और सशस्त्र सीमा बल को निगरानी व्यवस्था में शामिल किया गया है। अधिकारियों को अपने क्षेत्र के सहकारी और निजी उर्वरक प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण कर प्रतिदिन रिपोर्ट जिला कृषि अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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आदेश के अनुसार यूरिया, डीएपी, एनपीके कॉम्प्लेक्स और एमओपी की बिक्री निर्धारित अधिकतम खुदरा मूल्य पर ही सुनिश्चित कराई जाएगी। निर्धारित दर से अधिक मूल्य वसूलने वाले विक्रेताओं के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कार्रवाई होगी।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को आधार कार्ड और कृषि जोत के आधार पर ही उर्वरक वितरित किया जाएगा। पीओएस मशीन के माध्यम से बिक्री सुनिश्चित की जाएगी और जोतवही और खतौनी के आधार पर फसल की आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक दिया जाएगा।
उर्वरक के साथ अन्य उत्पादों की जबरन बिक्री पर भी रोक लगाई गई है। यदि कोई विक्रेता डीएपी, यूरिया या अन्य प्रमुख उर्वरक लेने के लिए किसानों को दूसरे उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य करता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संबंधित उर्वरक निर्माता या आपूर्तिकर्ता संस्था की भूमिका मिलने पर एफआईआर दर्ज कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
सभी उर्वरक व्यवसायियों को स्टॉक पंजिका, बिक्री रजिस्टर और रसीद का रखरखाव अनिवार्य रूप से करना होगा। प्रत्येक बिक्री केंद्र पर उर्वरकों की उपलब्धता और निर्धारित मूल्य का विवरण प्रतिदिन स्टॉक बोर्ड पर प्रदर्शित करना होगा। प्रशासन का कहना है कि खरीफ सीजन में किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। इसके लिए जनपद स्तरीय समिति नियमित समीक्षा करेगी और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।