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40 हजार मजदूरों, बेरोजगारों पर लगा कोरोना का ब्रेक
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जिला अस्पताल पर बाहर से आए हुए लोगों को हिदायत देते एसपी विजय ढुल।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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40 हजार मजदूरों की रोटी पर ‘कोरोना का ब्रेक’
जिले में पंजीकृत श्रमिक 7500 और 12 हजार बेरोजगार पंजीकृत
सरकारी आंकड़ों से इतर है तस्वीर, दो वक्त की रोटी पर संकट
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। वैश्विक महामारी कोरोना ने दैनिक मजदूरों के काम पर ब्रेक लगा दिया है। बेरोजगारों की भी मुसीबतें बढ़ गई हैं। इनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 7500 और पंजीयन कराए बेरोजगारों की संख्या 12 हजार हैं। यह अलग बात है कि जिले में इन वर्गों की तस्वीर कुछ और ही है। लगभग 40 हजार मजदूरों, बेरोजगारों को विषम परिस्थितियों से जूझ रहे हैं।
कोरोना वायरस के प्रकोप का सर्वाधिक असर दैनिक मजदूरों पर पड़ा है। शहर के हर चौक-चौराहे पर रोजाना सुबह-सुबह मजदूूरों की चौकड़ी लगती थी। ये मजदूर नगरपालिका परिषद के सामने काम की तलाश में पहुंचते थे। कोई इनमें राजमिस्त्री तो कोई मजदूर होते हैं। इनकी मजदूरी 250 रुपये से 600 रुपये तक होती थी। इससे इनका गुजर बसर चलता था। मजदूर रामजियावन कहते हैं कि इस समय कोई कार्य ही नहीं कराना चाह रहा है। रोज 50 से 10 रुपये कर्ज लेकर किसी तरह जीविका चला रहे हैं। जिले में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 7500 है, जबकि सच्चाई उलट है। महानगरों से लौटने वाले मजदूरों की संख्या नौ हजार हो गई है। बेरोजगारों की बात करें तो स्थिति और भी भयावह है। नौकरी पाने अर्हता पूरी करने के बाद बेरोजगारों को रोजगार के लाले पड़े ही थे। अब कोरोना वायरस के ब्रेक ने उनके कदम को घरों में ही कैद कर दिया है। उनके पॉकेट खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करने की बात दूर है। जिले के सेवा योजन विभाग में 12086 बेरोजगारों का पंजीयन है। जबकि इनकी संख्या 25 हजार से कम नहीं है। कोरोना वायरस के महामारी ने बेरोजगारों को भी मुसीबत में डाल दिया है। इनके लिए न भत्ता और न ही कोई आर्थिक सहायता। भगवान भरोसे घरों में बैठे हैं।
पंजीकृत श्रमिकों, कामगारों को ही सहायता दी जा रही है। नवीनीकरण कराने वाले श्रमिकों के खाते में एक-एक हजार रुपये भेजने की प्रक्रिया जारी है। जिनका पंजीयन या नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं है। उन्हें कोई सहायता नहीं।
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लीलाधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी
पंजीयन कराए बेरोजगारों के लिए इस समय सरकार की ओर से कोई सहायता देने की घोषणा नहीं हुई है। विभाग की ओर से उन्हें घरों से न निकलने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है।
अवधेंद्र प्रताप वर्मा, जिला सेवायोजन अधिकारी
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जिले में पंजीकृत श्रमिक 7500 और 12 हजार बेरोजगार पंजीकृत
सरकारी आंकड़ों से इतर है तस्वीर, दो वक्त की रोटी पर संकट
संतोष श्रीवास्तव
सिद्धार्थनगर। वैश्विक महामारी कोरोना ने दैनिक मजदूरों के काम पर ब्रेक लगा दिया है। बेरोजगारों की भी मुसीबतें बढ़ गई हैं। इनके समक्ष आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 7500 और पंजीयन कराए बेरोजगारों की संख्या 12 हजार हैं। यह अलग बात है कि जिले में इन वर्गों की तस्वीर कुछ और ही है। लगभग 40 हजार मजदूरों, बेरोजगारों को विषम परिस्थितियों से जूझ रहे हैं।
कोरोना वायरस के प्रकोप का सर्वाधिक असर दैनिक मजदूरों पर पड़ा है। शहर के हर चौक-चौराहे पर रोजाना सुबह-सुबह मजदूूरों की चौकड़ी लगती थी। ये मजदूर नगरपालिका परिषद के सामने काम की तलाश में पहुंचते थे। कोई इनमें राजमिस्त्री तो कोई मजदूर होते हैं। इनकी मजदूरी 250 रुपये से 600 रुपये तक होती थी। इससे इनका गुजर बसर चलता था। मजदूर रामजियावन कहते हैं कि इस समय कोई कार्य ही नहीं कराना चाह रहा है। रोज 50 से 10 रुपये कर्ज लेकर किसी तरह जीविका चला रहे हैं। जिले में पंजीकृत श्रमिकों की संख्या 7500 है, जबकि सच्चाई उलट है। महानगरों से लौटने वाले मजदूरों की संख्या नौ हजार हो गई है। बेरोजगारों की बात करें तो स्थिति और भी भयावह है। नौकरी पाने अर्हता पूरी करने के बाद बेरोजगारों को रोजगार के लाले पड़े ही थे। अब कोरोना वायरस के ब्रेक ने उनके कदम को घरों में ही कैद कर दिया है। उनके पॉकेट खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। परिवार के सदस्यों का भरण-पोषण करने की बात दूर है। जिले के सेवा योजन विभाग में 12086 बेरोजगारों का पंजीयन है। जबकि इनकी संख्या 25 हजार से कम नहीं है। कोरोना वायरस के महामारी ने बेरोजगारों को भी मुसीबत में डाल दिया है। इनके लिए न भत्ता और न ही कोई आर्थिक सहायता। भगवान भरोसे घरों में बैठे हैं।
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पंजीकृत श्रमिकों, कामगारों को ही सहायता दी जा रही है। नवीनीकरण कराने वाले श्रमिकों के खाते में एक-एक हजार रुपये भेजने की प्रक्रिया जारी है। जिनका पंजीयन या नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी नहीं है। उन्हें कोई सहायता नहीं।
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लीलाधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी
पंजीयन कराए बेरोजगारों के लिए इस समय सरकार की ओर से कोई सहायता देने की घोषणा नहीं हुई है। विभाग की ओर से उन्हें घरों से न निकलने के लिए हर स्तर पर प्रयास किया जा रहा है।
अवधेंद्र प्रताप वर्मा, जिला सेवायोजन अधिकारी