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चितवन पार्क के हथियों में फैल रहा क्षय रोग

Mon, 24 Aug 2020 07:24 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2020 07:24 PM IST
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chthwan park elephent
चितवन पार्क के हाथियों में बढ़ रहा क्षय रोग
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मृत हाथियों के पोस्टमार्टम में मिले क्षय रोग के बैक्टीरिया
पशुपालन टीम के कर्मचारी हाथियों के एकत्र कर रहे नमूने
अमर उजाला ब्यूरो
कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर)। नेपाल के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल चितवन नेशनल पार्क के मृत हाथियों के शरीर में क्षय रोग के बैक्टीरिया पाए जाने के बाद वहां बचे जीवित हाथियों के नमूने एकत्र करने का काम सोमवार से शुरू कर दिया गया है। फिलहाल पार्क में 59 हाथी हैं।
चितवन नेशनल पार्क के खोरसोर में 20 और सौराहा में आठ हाथी हैं। हाथियों के नमूने एकत्र करने में चार से पांच दिन लगेंगे। नमूने एकत्र कर काठमांडू स्थित सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर डायग्नोसिस नामक एक निजी प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले में पहली बार 2002 में हाथियों में क्षयरोग के बैक्टीरिया पाया गया था। यह संक्रमण 2016 तक जारी रहा। उस समय निकुंज के 17 निजी और राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण कोष के दो हाथियों में क्षय रोग देखा गया था। इसके बाद हाथियों में संक्रमण तो नहीं पाया गया लेकिन 2018 के बाद चार हाथियों की मृत्यु हुई। डॉ. श्रेष्ठा के अनुसार तीन अगस्त को हाथी दीपेंद्रराज की मृत्यु क्षयरोग के कारण हुई। इससे पहले तीन मृत हाथियों के पोस्टमार्टम में फेफड़ों में संक्रमण की समस्या सामने आई थी, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हाथी भी क्षयरोग ग्रस्त होंगे। क्षेत्र में निजी होटलों में भी 57 हाथी हैं। उन्होंने बताया कि उपचार कार्य में तेजी लाई जा रही है। पार्क के मुख्य संरक्षण अधिकारी ए बराल ने बताया कि परीक्षण का काम तुरंत शुरू किया जाएगा। सभी हाथियों का परीक्षण किया जाएगा ताकि बीमारी का इलाज कर उन्हें ठीक किया जाए। पार्क के वरिष्ठ पशु चिकित्सक विजय श्रेष्ठ ने बताया कि सौराहा के हाथियों में परीक्षण के लिए नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। हाथियों के कान या पूंछ की नसों से खून के नमूने लिए जा रहे हैं।
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पर्यटकों के लिए निजी हाथियों का इस्तेमाल
पर्यटकों को ले जाने के लिए निजी हाथियों का इस्तेमाल होटलों की ओर से किया जा रहा है। पार्क अपने हाथी सफारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध हैं। यहां सामुदायिक वन में पर्यटकों को निजी हाथियों के आसपास ले जाया जाता है। पर्यटकों को दुर्लभ वन्यजीवों को देखने के लिए हाथियों की सवारी का आनंद मिलता है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके इलाज में लंबा वक्त लगता है और हाथियों में तपेदिक का इलाज काफी महंगा है।
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