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छठी मइया भरिहे अचरिया, चल छठी दरबार...
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शहर के जमुआर घाट पर लगी महिलाओं की भीड़। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
छठी मइया भरिहे अचरिया, चल छठी दरबार...
घाटों पर उतरा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी भास्कर को दिया अर्घ्य
सिद्धार्थनगर। बन सइयां सुघर कहरिया, चल छठी दरबार, छठी मइया भरिहे अचरिया..., उगिहे सूरूज मल... नइयों न डोले रे..., कोयलियां बोले हो गइले भोर भिनसार...। छठ पर्व पर रविवार शाम घाटों पर छठी मइया के ये गीत बजे तो पूरा माहौल धार्मिक हो गया। महिलाओं की टोली गीत गाते हुए जलस्रोत तक पहुंची। व्रती महिलाएं पानी में उतर के भगवान सूर्य के अस्ताचलगामी होने की प्रतीक्षा कर रही थीं, तो लोग भक्ति भाव में नृत्य करते भी दिखे। सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने मंगलकामना की।
महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आस्था की डगर पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। फल व अन्य प्रसाद से भरे हुए दउरा और सूपा के साथ व्रती महिलाएं घाट पर गईं तो उनके साथ परिवार के लोग भी थे। जिले के विभिन्न घाटों पर आस्था का सैलाब उतरा नजर आया। शहर के जमुआर नदी स्थित घाट पर पानी में उतरकर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की। कस्बे व ग्रामीण क्षेत्रों में भी आस्था व उत्साह पूर्वक छठ पूजा की गई।
कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि व्रती एवं श्रद्धालु शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देकर छठ माई से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की। जिले के विभिन्न नदियों से बाढ़ का पानी हटे अभी कुछ दिन ही बीता है, लेकिन रविवार शाम इन नदियों के घाटों पर महापर्व छठ के अवसर पर अलग छटा नजर आई। छठ पूजा के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए दोपहर से ही घाट पर श्रद्धालु जुटने लगे। शहर की सड़क पर नंगे पाव सिर पर पूजा की टोकरी लिए लोगों का हुजूम गाते-बजाते घाट की तरफ जाते नजर आया। घाट पर भी जगह-जगह लगे पंडालों में भी भक्ति गीत बज रहे थे। व्रतियों ने बांस की तीन बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने तीन सूप, थाली, दूध और ग्लास, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी, चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नाशपाती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबूत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन व मिठाई और प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू आदि के साथ घाट पर पहुंचे। श्रद्धालु सबसे पहले पूजन सामग्री को बांस की टोकरी में एवं सभी प्रसाद सूप में रखा और सूप में ही दीपक जलाकर नदी में उतर गए। मुहूर्त में सूर्य देव को अर्घ्य दिया। एसपी अमित कुमार आनंद, एसडीएम प्रदीप यादव, सीओ अखिलेश वर्मा ने घाट पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
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छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना और छठी मैया की आराधना की जाती है। सनातन संस्कृति में सूर्य को देवता के रूप में पूजन किया जाता है. शास्त्रों में सूर्य देव को सृष्टि की आत्मा कहा गया है। इसके प्रकाश से मनुष्यों, जीवों एवं पेड़-पौधों का जीवन अस्तित्व में है। सूर्य केवल ऊर्जा का ही स्रोत नहीं है बल्कि, इसके प्रकाश में ऐसे तत्व हैं, जिनसे मनुष्य और जीवों को रोग-दोष से छुटकारा मिलता है और पेड़-पौधों को भोजन प्राप्त होता है। वहीं संतान की कामना और उसके सुखी जीवन के लिए छठी माई की पूजा की जाती है।
पंडाल लगा श्रद्धालुओं को पिलाई चाय
छठ पूजा में जमुआर नदी के घाट पर विभिन्न संगठनों एवं राजनीतिक व्यक्तियों की तरफ पंडाल लगाकर लोगों को चाय-पानी पिलाया जा रहा था। पंडाल लगाने वालों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, सांसद जगदंबिका पाल, नगर पालिका अध्यक्ष श्यामबिहारी जायसवाल, नगर पालिका से अध्यक्ष पद के दावेदार राजू सिंह, नवलकिशोर विश्वकर्मा उर्फ गुड्डू, राकेश त्रिपाठी आदि ने लोगों को चाय पिलाई।
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घाटों पर उतरा आस्था का सैलाब, अस्ताचलगामी भास्कर को दिया अर्घ्य
सिद्धार्थनगर। बन सइयां सुघर कहरिया, चल छठी दरबार, छठी मइया भरिहे अचरिया..., उगिहे सूरूज मल... नइयों न डोले रे..., कोयलियां बोले हो गइले भोर भिनसार...। छठ पर्व पर रविवार शाम घाटों पर छठी मइया के ये गीत बजे तो पूरा माहौल धार्मिक हो गया। महिलाओं की टोली गीत गाते हुए जलस्रोत तक पहुंची। व्रती महिलाएं पानी में उतर के भगवान सूर्य के अस्ताचलगामी होने की प्रतीक्षा कर रही थीं, तो लोग भक्ति भाव में नृत्य करते भी दिखे। सूर्य को अर्घ्य देकर महिलाओं ने मंगलकामना की।
महापर्व छठ पूजा के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए आस्था की डगर पर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। फल व अन्य प्रसाद से भरे हुए दउरा और सूपा के साथ व्रती महिलाएं घाट पर गईं तो उनके साथ परिवार के लोग भी थे। जिले के विभिन्न घाटों पर आस्था का सैलाब उतरा नजर आया। शहर के जमुआर नदी स्थित घाट पर पानी में उतरकर श्रद्धालुओं ने अस्ताचलगामी भगवान सूर्य की पूजा अर्चना की। कस्बे व ग्रामीण क्षेत्रों में भी आस्था व उत्साह पूर्वक छठ पूजा की गई।
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कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि व्रती एवं श्रद्धालु शाम के समय सूर्य को अर्घ्य देकर छठ माई से संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना की। जिले के विभिन्न नदियों से बाढ़ का पानी हटे अभी कुछ दिन ही बीता है, लेकिन रविवार शाम इन नदियों के घाटों पर महापर्व छठ के अवसर पर अलग छटा नजर आई। छठ पूजा के तीसरे दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने के लिए दोपहर से ही घाट पर श्रद्धालु जुटने लगे। शहर की सड़क पर नंगे पाव सिर पर पूजा की टोकरी लिए लोगों का हुजूम गाते-बजाते घाट की तरफ जाते नजर आया। घाट पर भी जगह-जगह लगे पंडालों में भी भक्ति गीत बज रहे थे। व्रतियों ने बांस की तीन बड़ी टोकरी, बांस या पीतल के बने तीन सूप, थाली, दूध और ग्लास, नारियल, हल्दी, गन्ना, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी, चावल, लाल सिंदूर, दीपक, नाशपाती, बड़ा नींबू, शहद, पान, साबूत सुपारी, कैराव, कपूर, चंदन व मिठाई और प्रसाद के रूप में ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पुड़ी, सूजी का हलवा, चावल के बने लड्डू आदि के साथ घाट पर पहुंचे। श्रद्धालु सबसे पहले पूजन सामग्री को बांस की टोकरी में एवं सभी प्रसाद सूप में रखा और सूप में ही दीपक जलाकर नदी में उतर गए। मुहूर्त में सूर्य देव को अर्घ्य दिया। एसपी अमित कुमार आनंद, एसडीएम प्रदीप यादव, सीओ अखिलेश वर्मा ने घाट पर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
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छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा में सूर्य देव की उपासना और छठी मैया की आराधना की जाती है। सनातन संस्कृति में सूर्य को देवता के रूप में पूजन किया जाता है. शास्त्रों में सूर्य देव को सृष्टि की आत्मा कहा गया है। इसके प्रकाश से मनुष्यों, जीवों एवं पेड़-पौधों का जीवन अस्तित्व में है। सूर्य केवल ऊर्जा का ही स्रोत नहीं है बल्कि, इसके प्रकाश में ऐसे तत्व हैं, जिनसे मनुष्य और जीवों को रोग-दोष से छुटकारा मिलता है और पेड़-पौधों को भोजन प्राप्त होता है। वहीं संतान की कामना और उसके सुखी जीवन के लिए छठी माई की पूजा की जाती है।
पंडाल लगा श्रद्धालुओं को पिलाई चाय
छठ पूजा में जमुआर नदी के घाट पर विभिन्न संगठनों एवं राजनीतिक व्यक्तियों की तरफ पंडाल लगाकर लोगों को चाय-पानी पिलाया जा रहा था। पंडाल लगाने वालों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, सांसद जगदंबिका पाल, नगर पालिका अध्यक्ष श्यामबिहारी जायसवाल, नगर पालिका से अध्यक्ष पद के दावेदार राजू सिंह, नवलकिशोर विश्वकर्मा उर्फ गुड्डू, राकेश त्रिपाठी आदि ने लोगों को चाय पिलाई।