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छठ : सूर्य उपासना कर ग्रहण किया खीर का प्रसाद
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छठ पूजा के लिए सिद्धार्थ तिराहे पर गन्ने की खरीददारी करती महिलाएं।
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
छठ : सूर्य उपासना कर ग्रहण किया खीर का प्रसाद
सिद्धार्थनगर। छठ महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा और शाम को सूर्य देवता की उपासना कर खीर का प्रसाद ग्रहण किया। बुधवार सायं व्रती महिलाएं पूजन करने के साथ ही जल में खड़ेे होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। श्रद्धालुओं ने छठ व्रत के लिए बाजार में खरीदारी भी की।
छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना को व्रती महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाया। उसके बाद सूर्य देव की पूजा करने के बाद खीर का प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही श्रद्धालु महिलाओं का 36 घंटे का व्रत शुरू हो गया। व्रत का पारण छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।
खरना के अगले दिन छठ पर्व की मुख्य पूजा होगी, जिसमें अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। शाम के समय महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगी। 11 नवंबर को इस महापर्व का समापन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतर कर सूर्यदेव से प्रार्थना करेंगी। इसके बाद उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारण किया जाएगा।
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सिद्धार्थनगर। छठ महापर्व के दूसरे दिन मंगलवार को महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा और शाम को सूर्य देवता की उपासना कर खीर का प्रसाद ग्रहण किया। बुधवार सायं व्रती महिलाएं पूजन करने के साथ ही जल में खड़ेे होकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। श्रद्धालुओं ने छठ व्रत के लिए बाजार में खरीदारी भी की।
छठ महापर्व के दूसरे दिन खरना को व्रती महिलाओं ने पूरे दिन व्रत रखा और शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ वाली खीर का प्रसाद बनाया। उसके बाद सूर्य देव की पूजा करने के बाद खीर का प्रसाद ग्रहण किया। इसके साथ ही श्रद्धालु महिलाओं का 36 घंटे का व्रत शुरू हो गया। व्रत का पारण छठ के समापन के बाद ही किया जाता है।
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खरना के अगले दिन छठ पर्व की मुख्य पूजा होगी, जिसमें अस्त होते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। शाम के समय महिलाएं नदी या तालाब में खड़ी होकर सूर्य देव को अर्घ्य देंगी। 11 नवंबर को इस महापर्व का समापन किया जाएगा। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से पहले ही नदी या तालाब के पानी में उतर कर सूर्यदेव से प्रार्थना करेंगी। इसके बाद उगते सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पूजा का समापन कर व्रत का पारण किया जाएगा।
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