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Siddharthnagar News: थानों में बनी सीसी टीम, तलाशेगी हादसों की वजह

Sat, 09 May 2026 11:25 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sat, 09 May 2026 11:25 PM IST
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CC teams formed in police stations to investigate the causes of accidents
द्धार्थनगर। सड़क हादसों को कम करने और जांच और त्वरित कार्रवाई के लिए अब जिले के सभी 20 थानों में क्रिटिकल कॉरिडोर (सीसी) चिह्नित करते हुए स्पेशल टीम गठित कर दी गई है। अब स्पेशल 20 टीम में शामिल 100 पुलिसकर्मी काम करेंगे।
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यह टीम हादसों में केवल प्राथमिकी तक सीमित नहीं होगी बल्कि हादसे के कारणों की भी जांच करेगी। जो कारण सामने आएगा, उसकी रिपोर्ट के आधार पर इनके निवारण पर काम होगा। इसमें पहले चरण में पांच थानों चयनित किया गया था, अब शेष 15 थानों में सीसी टीम गठित करने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षित किया गया है।
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वहीं, हादसों की बात करें तो प्रतिवर्ष मौत का ग्राफ जनपद में बढ़ रहा है। बीते वर्ष सड़क हादसों में 195 लोगों ने जान गवां दी थी। यह तो वे आकड़ें है जो पुलिस तक पहुंचते है और न जाने कितने मामलाें में परिवार कार्रवाई के लिए आगे ही नहीं आता है। सड़क हादसों में होने वाली मौत को रोकने के लिए जहां पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाएं समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती हैं।
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यातायात के नियम के बारे में जानकारी देते हैं। वहीं, बढ़ते हुए हादसों को रोकने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर कार्रवाई के नियम और सख्त करने के साथ-साथ लाइसेंस तक निरस्त करने का नियम बना चुकी है। इसके साथ ही रोड सेफ्टी के लिए कई काम किए जाते हैं, जिससे हादसों को रोका जा सके। लेकिन, हादसों में कमी आने के बजाय साल दर साल संख्या बढ़ रही है। मरने वालों में अधिकांश युवा हैं, जिनकी उम्र 15 से 35 साल के बीच है और जिसने परिवार की उम्मीदें जुड़ी हैं। वहीं, न जाने कितने लोग हादसे के बाद दिव्यांग हो जा रहे हैं।
अब शासन ने प्रचार-प्रसार और कार्रवाई के साथ उन कारणों में काम शुरू करने की योजना बनाई है, जिनकी वजह से हादसे हो रहे हैं। इसके तहत पहले चरण में हर जनपद में क्रिटिकल कॉरिडोर का चिह्नित किए गए। इसमें स्टेट व नेशलन हाईवे के उन स्थानाें को चुना गया, जहां पर सर्वाधिक होते हैं। वह किस थाना में पड़ता है। अगले चरण में जनवरी माह के अंत में हाईवे के पांच थानों को शामिल किया गया था, जिसमें बांसी, जोगिया, इटवा, डुमरियागंज और सिद्धार्थनगर शामिल थे। यहां एक-एक टीम गठित की गई थी। अब शेष बचे जनपद में 15 थानों को शामिल कर लिया गया है।
इन थानों के शामिल होने के साथ ही स्टेट और नेशनल हाईवे के साथ ही ऐसे मार्गों को चयनित किए हैं, जहां पर सबसे अधिक हादसे होते हैं। उन पर थाना स्तर पर गठित सीसी की स्पेशल पांच सदस्यीय टीम हादसों के कारण और निवारण पर काम करने के साथ ही दर्ज मामलों की जांच और हादसे के बाद पीड़ित परिवार को मिलने वाली आर्थिक मदद के बारे में जानकारी दी जाएगी।
अब घटनास्थल की जांच के साथ विवेचना भी करेगी अलग टीम : पुलिस के विभाग के जानकारों के मुताबिक, अब तक सड़क दुर्घटना के मामलों में केवल प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी जाती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत एफआईआर के साथ-साथ हादसे के कारणों की स्वतंत्र जांच अनिवार्य होगी।

थाना स्तर पर गठित पांच सदस्यीय कमेटी प्रत्येक गंभीर सड़क हादसे की विवेचना करेगी और यह रिपोर्ट देगी कि दुर्घटना नशे में वाहन चलाने, लगत साइड ड्राइविंग, ओवरस्पीडिंग, खराब सड़क डिजाइन, स्पीड ब्रेकर, अंधे मोड़ या संकेतक की कमी के कारण हुई या नहीं। यह रिपोर्ट भविष्य में सुधारात्मक कार्रवाई की बुनियाद बनेगी। सीओ यातायात की अगुवाई में प्रशिक्षित पुलिस टीमें इन मार्गों पर सक्रिय रहेंगी और हर हादसे के बाद मौके का वैज्ञानिक और तकनीकी विश्लेषण करेंगी।
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