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अवैध खनन की जांच करेगी सीबीआई
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Fri, 03 Mar 2017 10:55 PM IST
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बालू खनन के कारण नदियों का अस्तित्व खत्म हो रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। चौतरफा नदियों से घिरे जिले से धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन की जांच अब सीबीआई करेगी। यह पत्र आने के बाद अवैध खनन के कारोबारियों में खलबली मच गई है। अफसरों की सांठ-गांठ से इस खेल में लिप्त होकर काली कमाई से अकूत संपत्ति बनाने वाले सहमे हुए हैं। सीबीआई की छानबीन में जिले के कई रसूखदारों की गर्दन भी फंसनी तय है। अपनी गिरेबां को सीबीआई के चंगुल से बचाने के लिए उनकी कोशिशें तेज हो गई हैं।
नेपाल के पहाड़ों से निकलने वाली आधा दर्जन नदियां जिले से होकर ही गुजरती हैं। इनमें राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी, बानगंगा मुख्य हैं। हजारों एकड़ खेतों को सिंचित करने वाली यह नदियां खनन के अवैध कारोबारियों को भी खूब मालामाल करती आई हैं। विभागीय जिम्मेदारों से मिलीभगत कर वह नदियों से बालू निकासी का अवैध धंधा खुलेआम खेल रहे हैं। जिले के इटवा, शोहरतगढ़, सदर और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में दर्जनों स्थानों से अवैध तरीके से बालू की निकासी बेखौफ होती है। आलम यह है कि खनन कारोबारी जेसीबी और ट्रैक्टर ट्राली का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकते। दिनदहाड़े खनन के कई मामले उजागर होने के बावजूद अफसर कार्रवाई से बचते रहे हैं। कारण, खनन के इस खेल में सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ बड़े नेताओं के करीबियों का शामिल होना रहा है।
अवैध कमाई के बूते ही चंद वर्षों में खनन के कारोबारियों ने अकूत संपत्ति बनाई है। राजनीतिक संरक्षण के चलते ही जहां अवैध कारोबारी मालामाल होते रहे हैं, वहीं नदियां लगातार खोखली होती चली जा रही हैं। अब खनन के इस अवैध कारोबार का संज्ञान सीबीआई के लेने के बाद धंधे से जुड़े लोगों में खलबली मच गई है। सूत्रों की मानें तो जांच शुरू करने की तैयारी में जुटी सीबीआई के राडार पर कई चर्चित व प्रतिष्ठित सफेदपोश हैं। शासन-सत्ता तक मजबूत पहुंच और विभागीय अफसरों से मिलीभगत कर वह वर्षों से मलाई खाते आए हैं, लेकिन अब गर्दन बचाना भी मुश्किल जान पड़ रहा है। खनन निरीक्षक दिनेश कुमार ने सीबीआई जांच की पुष्टि करते हुए बताया कि यह पत्र उन्हें प्राप्त हो चुका है। बताया कि सितबंर माह में खनन के पट्टे को लेकर कुछ लोगों में विवाद हुआ था, इसी के चलते एक पक्ष कोर्ट में पहुंच गया था, जिसके बाद सीबीआई जांच के आदेश हुए हैं। सीबीआई किन-किन बिंदुओं पर जांच करेगी, इसकी पूरी जानकारी नहीं है।
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नेपाल के पहाड़ों से निकलने वाली आधा दर्जन नदियां जिले से होकर ही गुजरती हैं। इनमें राप्ती, बूढ़ी राप्ती, कूड़ा, घोंघी, बानगंगा मुख्य हैं। हजारों एकड़ खेतों को सिंचित करने वाली यह नदियां खनन के अवैध कारोबारियों को भी खूब मालामाल करती आई हैं। विभागीय जिम्मेदारों से मिलीभगत कर वह नदियों से बालू निकासी का अवैध धंधा खुलेआम खेल रहे हैं। जिले के इटवा, शोहरतगढ़, सदर और डुमरियागंज तहसील क्षेत्र में दर्जनों स्थानों से अवैध तरीके से बालू की निकासी बेखौफ होती है। आलम यह है कि खनन कारोबारी जेसीबी और ट्रैक्टर ट्राली का इस्तेमाल करने से भी नहीं हिचकते। दिनदहाड़े खनन के कई मामले उजागर होने के बावजूद अफसर कार्रवाई से बचते रहे हैं। कारण, खनन के इस खेल में सत्ताधारी दल से जुड़े कुछ बड़े नेताओं के करीबियों का शामिल होना रहा है।
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अवैध कमाई के बूते ही चंद वर्षों में खनन के कारोबारियों ने अकूत संपत्ति बनाई है। राजनीतिक संरक्षण के चलते ही जहां अवैध कारोबारी मालामाल होते रहे हैं, वहीं नदियां लगातार खोखली होती चली जा रही हैं। अब खनन के इस अवैध कारोबार का संज्ञान सीबीआई के लेने के बाद धंधे से जुड़े लोगों में खलबली मच गई है। सूत्रों की मानें तो जांच शुरू करने की तैयारी में जुटी सीबीआई के राडार पर कई चर्चित व प्रतिष्ठित सफेदपोश हैं। शासन-सत्ता तक मजबूत पहुंच और विभागीय अफसरों से मिलीभगत कर वह वर्षों से मलाई खाते आए हैं, लेकिन अब गर्दन बचाना भी मुश्किल जान पड़ रहा है। खनन निरीक्षक दिनेश कुमार ने सीबीआई जांच की पुष्टि करते हुए बताया कि यह पत्र उन्हें प्राप्त हो चुका है। बताया कि सितबंर माह में खनन के पट्टे को लेकर कुछ लोगों में विवाद हुआ था, इसी के चलते एक पक्ष कोर्ट में पहुंच गया था, जिसके बाद सीबीआई जांच के आदेश हुए हैं। सीबीआई किन-किन बिंदुओं पर जांच करेगी, इसकी पूरी जानकारी नहीं है।
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