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25 लाख की लागत तक बनने वाले विद्यालय व सामुदायिक होगी जांच

Wed, 13 Jan 2021 10:35 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Jan 2021 10:35 PM IST
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Buildings costing 25 lakh will be examined
25 लाख की लागत वाले भवनों की होगी जांच
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जांच के लिए त्रिस्तरीय कमेटी गठि, निर्माण कराने वाले भी आएंगे दायरे में
कुछ वर्ष पूर्व बनने के बाद जर्जर होने वाले भवनों की भी टीम करेगी जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। निर्माण के महज दस साल में ही जर्जर हो चुके जिले के सामुदायिक भवन और विद्यालयों की जांच त्रिस्तरीय टीम करेगी। 25 लाख रुपये तक की लागत वाले उन भवनों को चिह्नित किया जाएगा जो कुछ वर्ष पूर्व ही बने थे और जर्जर होकर ढहने के कगार पर आ गए हैं। टीम गुणवत्ता का भी आकलन करेगी। सीडीओ के निर्देशन में गठित टीम रिपोर्ट तैयार करके उन्हें सौंपेगी। इसके बाद ध्वस्तीकरण के साथ ही अन्य कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। माना जा रहा है कि जांच में निर्माण कराने वाले लोगों की भी गर्दन फंसेगी।
निर्माण कार्य करने पूरा होने के कुछ ही वर्ष में जर्जर होने से वाले भवनों से हादसों को खतरा बढ़ गया है। बीते वर्ष बनारस में निर्माणाधीन फ्लाईओवर गिरने से कई लोगों की जान चली गई। हादसे में जांच में निर्माण कार्य में अनियमितता पाई गई थी। अभी हाल ही में गाजियाबाद जिले में श्मशान घाट की गैलरी गिरने से हादसा हुआ। इस प्रकार से सामुदायिक भवन और विद्यालय के निर्माण में अनियमितता बरतने से घटनाएं होती रहती हैं। बहरहाल गाजियाबाद में हुए हादसे के बाद प्रशासन अलर्ट हो गया है। सीडीओ के निर्देशन में जांच टीम का गठन हुआ है। इसमें एक जिलास्तरीय अधिकारी, एक्सईएन, एक टेक्निकल जेई शामिल हैं, जो भवन की जांच करेंगे। इसके बाद रिपोर्ट तैयार करके सीडीओ को सौंपेंगे। इस बाबत सीडीओ पुलकित गर्ग ने बताया कि जर्जर हो चुके सामुदायिक भवन और विद्यालयों की जांच के लिए त्रिस्तरीय कमेटी गठित की गई है। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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टीम इन बिंदुओं की होगी जांच
त्रिस्तरीय कमेटी में एक्सईएन और टेक्निकल जेई को इसलिए रखा गया है कि वह भवन के निर्माण की गुणवत्ता के बारे में सही से जांच कर सकें। भवन का निर्माण कब हुआ था, कितने की लागत में हुआ था, किसने निर्माण करवाया था। इन सब बिंदुओं की जांच करके टीम रिपोर्ट तैयार करेगी।
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जांच की जद में आएंगे निर्माण कराने वाले
जिले में कई विद्यालय और सरकारी भवन कुछ वर्ष पूर्व ही बनाए गए थे। हालत यह है कि निमार्ण कार्य के कुछ वर्ष बाद ही छत से पानी टपकने लगा है, प्लास्टर टूटकर गिरने लगे। भवन कब ढह जाएगा इसका कोई अंदाजा नहीं है। अगर टीम ने सही तरह से रिपोर्ट तैयार की तो कई लोगों की गर्दन फंस सकती है।
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