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Siddharthnagar News: सिविवि में बुद्धस्य नैवेद्यम केंद्र का हुआ उद्घाटन
Sun, 22 Sep 2024 02:54 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 22 Sep 2024 02:54 AM IST
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कालानमक की खेती को बढ़ावा व इसके पारंपरिक मूल्यों के बनाए रखना केंद्र का उद्देश्य
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु परिसर में बुद्धस्य नैवेद्यम केंद्र का उद्घाटन शनिवार को कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. आरसी चौधरी ने किया। काला नमक चावल का उत्पादन करने वाले कृषकों को प्रोत्साहित करने व काला नमक चावल की पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय परिसर में इसका केंद्र बनाया गया।
काला नमक चावल की उपयोगिता और महत्व को प्रकाशित करने के उद्देश्य से विज्ञान संकाय के सभागार में संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। काला नमक चावल के इतिहास के बारे में प्रो. आरसी चौधरी ने बताया कि यह तीन हजार वर्ष पुराना है। इसकी सुगंध को बुद्ध का उपहार भी कहा जाता है। इस दुर्लभ चावल की पोषक विशेषताओं एवं इसके पर्यावरणीय योगदान है। बताया कि इस विशेष प्रकार के चावल में बीटा कैरोटीन नामक रसायन पाया जाता है, जो की विटामिन ए का एक अच्छा स्रोत है। कुलपति प्रो कविता शाह ने कहा कि काला नमक चावल अपनी अद्वितीय सुगंध, स्वाद और पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध है।
उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर भगवान बुद्धा की क्रीड़ास्थली है इसीलिए विश्वविद्यालय का यह दायित्व है कि जनपद एवं आसपास के क्षेत्र का विकास किया जाए। काला नामक चावल ''''एक जनपद एक उत्पाद'''' के रूप में सिद्धार्थ नगर की पहचान है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि कृषकों को काला नामक की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, इस उद्देश्य को परिपूरित करने के क्रम में विश्वविद्यालय में बुद्धस्य नैवेद्यम केंद्र की स्थापना की गई है। इस दौरान प्रो दीपक बाबू मिश्र, डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु परिसर में बुद्धस्य नैवेद्यम केंद्र का उद्घाटन शनिवार को कृषि वैज्ञानिक पद्मश्री प्रो. आरसी चौधरी ने किया। काला नमक चावल का उत्पादन करने वाले कृषकों को प्रोत्साहित करने व काला नमक चावल की पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय परिसर में इसका केंद्र बनाया गया।
काला नमक चावल की उपयोगिता और महत्व को प्रकाशित करने के उद्देश्य से विज्ञान संकाय के सभागार में संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। काला नमक चावल के इतिहास के बारे में प्रो. आरसी चौधरी ने बताया कि यह तीन हजार वर्ष पुराना है। इसकी सुगंध को बुद्ध का उपहार भी कहा जाता है। इस दुर्लभ चावल की पोषक विशेषताओं एवं इसके पर्यावरणीय योगदान है। बताया कि इस विशेष प्रकार के चावल में बीटा कैरोटीन नामक रसायन पाया जाता है, जो की विटामिन ए का एक अच्छा स्रोत है। कुलपति प्रो कविता शाह ने कहा कि काला नमक चावल अपनी अद्वितीय सुगंध, स्वाद और पोषण मूल्य के लिए प्रसिद्ध है।
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उन्होंने कहा कि सिद्धार्थनगर भगवान बुद्धा की क्रीड़ास्थली है इसीलिए विश्वविद्यालय का यह दायित्व है कि जनपद एवं आसपास के क्षेत्र का विकास किया जाए। काला नामक चावल ''''एक जनपद एक उत्पाद'''' के रूप में सिद्धार्थ नगर की पहचान है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि कृषकों को काला नामक की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके, इस उद्देश्य को परिपूरित करने के क्रम में विश्वविद्यालय में बुद्धस्य नैवेद्यम केंद्र की स्थापना की गई है। इस दौरान प्रो दीपक बाबू मिश्र, डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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