फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   buddha thought will make peace

शांति की स्थापना बुद्ध के विचार से ही संभव: विदेश मंत्री

Wed, 11 Dec 2019 10:57 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2019 10:57 PM IST
विज्ञापन
buddha thought will make peace
नेपाल के लुम्बिनी के अनुसन्धान केंद्र एवं लुम्बिनी विश्वविद्यालय पर संगोष्ठी को संबोधित करते न - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
फोटो- 73
विज्ञापन

बुद्ध के विचार अपनाने से ही शांति : प्रदीप ज्ञावाली
लुंबिनी के अनुसंधान केंद्र एवं लुंबिनी विश्वविद्यालय में आयोजित हुई अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी
दुनिया में शांति की स्थापना कैसे हो विषय पर हुआ मंथन
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/ककरहवा/कपिलवस्तु। पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल के लुंबिनी के अनुसंधान केंद्र एवं लुंबिनी विश्वविद्यालय तथा लुंबिनी ट्रस्ट के संयोजकत्व में बुधवार को लुंबिनी स्थित कांफ्रेंस हॉल में एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी का विषय ‘दुनिया में शांति की स्थापना कैसे हो’ विषय रहा।

बतौर मुख्य अतिथि नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञावाली ने कहा कि शांति की स्थापना बुद्ध के विचार से ही संभव है। उनके विचारों के बिना विश्व में शांति नहीं आ सकती है। भारत के अंतरराष्ट्रीय बौद्ध विद्वान एवं बौद्ध स्मारक विकास परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. अरविंद आलोक ने कहा कि शांति की स्थापना विश्व में, समाज में और राष्ट्र में तभी हो सकती है जब व्यक्ति के चित्त में शांति स्थापित हो जाए। शांति की स्थापना के लिए यह जरूरी है कि हर व्यक्ति के मन में शांति हो। भगवान बुद्ध के जो उपदेश हैं वो व्यक्ति के चित्त के निर्माण एवं चित्त के शुद्धि के लिए ही है। मन के विकार को दूर करना और व्यक्ति के अंदर सम्यक दृष्टि की स्थापना ही परिवार में, समाज में, राष्ट्र में और विश्व में शांति सुनिश्चित कर सकता है। शांति केवल पढ़ने की चीज नहीं है। शांति तभी आ सकती है, जब व्यक्ति शांति का शांत चित्त से अनुपालन करे और उसका जीवन में प्रयोग करें। नेपाल के भारत में पूर्व राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने कहा कि भारत और नेपाल को मिलकर के बुद्ध की साझा संस्कृति का संरक्षण करना चाहिए और इसके लिए प्रो. अरविंद आलोक का सहयोग और उनका नेतृत्व हमारे लिए बहुत उपयोगी होगा। संगोष्ठी को डॉ. निरंजन एमएस बसन्यात, प्रो. गोविंद, प्रो. त्रिरत्ना मंधार, रमेश दुग्गल सहित मलेशिया, फिलीपींस, कंबोडिया से आए प्रतिनिधियों ने भी संबोधित किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed