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बाढ़ग्रस्त गांव में नहीं थी नाव, इलाज के अभाव में बुजुर्ग की मौत
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त्रिलोकपुर क्षेत्र के जुड़वनिया के रामअवतार के शव को स्टीमर के सहारे जल में प्रवाहित करते परिवा?
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
बाढ़ग्रस्त गांव में नहीं थी नाव, इलाज के अभाव में बुजुर्ग की मौत
डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के जुड़वनिया गांव के रामअवतार चार दिन से थे बीमार
बिजौरा (सिद्धार्थनगर)। अगर गांव में एक नाव होती तो रामअवतार की जान शायद बच जाती। डुमरियागंज तहसील के बाढ़ग्रस्त जुड़वनिया गांव में बीमार रामअवतार की इलाज के अभाव में मौत हो गई। गांव तीन दिन से बाढ़ के पानी से घिरा है। एक किलोमीटर के दायरे में पानी ही पानी है। गांव में नाव या स्टीमर नहीं होने से परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जा सके।
जुड़वनिया गांव में रामअवतार (60) को चार दिन से तेज बुखार था। मंगलवार भोर करीब चार बजे उनकी मृत्यु हो गई। उनके पुत्र मनीराम ने बताया कि बाढ़ की वजह से वे पिता को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल करहर नहीं ले जा पाए। घरेलू इलाज किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। मनीराम ने कहा कि गांव में नाव या स्टीमर की सुविधा मिल गई होती तो शायद उनके पिता आज जीवित होते।
दाह संस्कार के लिए जगह नहीं, किया गया जलप्रवाह
इलाज के लिए नाव भले ही न मिली हो, लेकिन मौत के 12 घंटे बाद रामअवतार के अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन ने स्टीमर उपलब्ध करा दिया। गांव में हर ओर बाढ़ का पानी होने की वजह से रामअवतार का दाह संस्कार नहीं किया जा सका। मजबूरन उनके पार्थिव शरीर को स्टीमर से गांव से दूर ले जाकर जल में प्रवाहित कर दिया गया।
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क्षेत्र में बाढ़ अचानक आ गई है। सोमवार से बाढ़ प्रभावित गांवों में नावें भेजी जा रही हैं। जुड़वनिया में मंगलवार को नाव/स्टीमर की सुविधा उपलब्ध करा दी गई। आवश्यकता के अनुसार बचाव कार्य किया जा रहा है। -अरुण कुमार वर्मा, तहसीलदार
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डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के जुड़वनिया गांव के रामअवतार चार दिन से थे बीमार
बिजौरा (सिद्धार्थनगर)। अगर गांव में एक नाव होती तो रामअवतार की जान शायद बच जाती। डुमरियागंज तहसील के बाढ़ग्रस्त जुड़वनिया गांव में बीमार रामअवतार की इलाज के अभाव में मौत हो गई। गांव तीन दिन से बाढ़ के पानी से घिरा है। एक किलोमीटर के दायरे में पानी ही पानी है। गांव में नाव या स्टीमर नहीं होने से परिजन उन्हें इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जा सके।
जुड़वनिया गांव में रामअवतार (60) को चार दिन से तेज बुखार था। मंगलवार भोर करीब चार बजे उनकी मृत्यु हो गई। उनके पुत्र मनीराम ने बताया कि बाढ़ की वजह से वे पिता को इलाज के लिए सरकारी अस्पताल करहर नहीं ले जा पाए। घरेलू इलाज किया गया, लेकिन उनकी मौत हो गई। मनीराम ने कहा कि गांव में नाव या स्टीमर की सुविधा मिल गई होती तो शायद उनके पिता आज जीवित होते।
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दाह संस्कार के लिए जगह नहीं, किया गया जलप्रवाह
इलाज के लिए नाव भले ही न मिली हो, लेकिन मौत के 12 घंटे बाद रामअवतार के अंतिम संस्कार के लिए प्रशासन ने स्टीमर उपलब्ध करा दिया। गांव में हर ओर बाढ़ का पानी होने की वजह से रामअवतार का दाह संस्कार नहीं किया जा सका। मजबूरन उनके पार्थिव शरीर को स्टीमर से गांव से दूर ले जाकर जल में प्रवाहित कर दिया गया।
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क्षेत्र में बाढ़ अचानक आ गई है। सोमवार से बाढ़ प्रभावित गांवों में नावें भेजी जा रही हैं। जुड़वनिया में मंगलवार को नाव/स्टीमर की सुविधा उपलब्ध करा दी गई। आवश्यकता के अनुसार बचाव कार्य किया जा रहा है। -अरुण कुमार वर्मा, तहसीलदार