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बगावत की आंधी में ढह गया भाजपाई किला

Sat, 02 Dec 2017 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Sat, 02 Dec 2017 12:58 AM IST
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bjp beat to independant
निकाय चुनाव परिणाम
सिद्धार्थनगर। ‘हमें तो अपनों ने ही लूटा गैरों में कहां दम था...’ निकाय चुनाव के परिणाम के बाद यह पंक्ति भाजपा पर सटीक बैठती हैं। पांच विधायक और एक सांसद देने वाले जिले में भाजपा अपने मजबूत गढ़ माने वाले निकायों में ही बुरी तरह धराशायी हो गई। कुल छह निकायों में सिर्फ दो सीटों पर ही भाजपा प्रत्याशी जीत दर्ज कर सके। अन्य चार निकायों में पार्टी उम्मीदवारों को करारी हार का सामना करना पड़ा है। पार्टी की इस हार में बागियों की अहम भूमिका रही है। हारने वाली हर निकाय में भाजपा और बागी उम्मीदवारों के बीच पार्टी के वोट बंटने का लाभ विरोधियों ने उठाया।
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जिले की निकायों में भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत मानी जाती रही है। वर्ष 2012 के चुनाव में शोहरतगढ़ और डुमरियागंज में भाजपा को जीत मिली थी। उसका से निर्वाचित हेमंत जायसवाल की वापसी के बाद पार्टी के हिस्से में तीन सीटें आ गई थीं। लोकसभा और विधानसभा चुनाव में सभी विधानसभा क्षेत्रों में भारी अंतर से जीत दर्ज करने वाली भाजपा का निकायों में भी ग्राफ तेजी से बढ़ा है। इस लिहाज से माना जा रहा था कि पार्टी को अधिकांश सीटें हासिल होंगी, मगर टिकट वितरण को लेकर असंतोष के चलते बागियों के मैदान में उतरने से पार्टी की लुटिया डूब गई। डुमरियागंज नगर पंचायत में मधुसूदन अग्रहरि को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद श्याम सुंदर अग्रहरि ने बगावत कर दी थी। विधायक राघवेंद्र प्रताप के करीबी कहे जाने वाले श्याम सुंदर ने मजबूती से चुनाव लड़ा। उनके मजबूत होने का असर यह हुआ कि यहां भाजपा को करारी शिकस्त खानी पड़ी। कमोवेश यही हाल बांसी नगर पालिका का भी रहा। यहां से पार्टी ने अजय श्रीवास्तव को उम्मीदवार बनाया तो ध्रुवचंद जायसवाल ने बगावती तेवर अपना दिया।
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मैदान में उतरकर धु्रवचंद ने खुद तो हार झेली ही पार्टी प्रत्याशी को भी हार का स्वाद चखाया। उसका बाजार नगर पंचायत में भाजपा से टिकट के दो दावेदार मंजू जायसवाल और बच्ची देवी थीं। मंजू जायसवाल को टिकट मिला तो बच्ची देवी ने बगावत कर दी। दोनों के मैदान में उतरने से वोटों में बिखराव का लाभ सपा प्रत्याशी पुनीता यादव को मिला। उन्होंने बड़े अंतर से जीत दर्ज की। बढनी में भी भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी सुनील अग्रहरि के विरोध में भानु प्रताप सिंह मैदान में उतरे थे। हियुवा के नेता भानु प्रताप के समर्थन में शोहरतगढ़ विधायक अमर सिंह चौधरी ने खुलकर प्रचार किया। गुटबाजी का लाभ यहां भी निर्दलीय उम्मीदवार निसार बागी को मिला। मामूली अंतर से सुनील शिकस्त खा गए।
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