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प्रशिक्षण में दिया जा रहा नया गुरु मंत्र
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 07 Apr 2016 11:11 PM IST
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शोहरतगढ़ में आयोजित प्रशिक्षण में मौजूद शिक्षक।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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ब्लॉक संसाधन केंद्र बीआरसी में चार दिवसीय कौशल विकास व विज्ञान कौशल एवं सतत मूल्यांकन प्रशिक्षण का शुभारंभ गुरुवार को किया गया। प्रशिक्षण में खंड शिक्षा अधिकारी गोपाल मिश्र ने प्राथमिक व जूनियर स्कूल के शिक्षकों को बच्चों में भाषा का सरल संवाद व गुणवत्तापरक शिक्षा देने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक छात्र में शिक्षा का समावेश कराएं और उसका मूल्यांकन करें जिससे अपनी क्षमता का आकलन शिक्षक लगा सके और इसी आधार पर बच्चों में शिक्षा का संवाद बना सकें।
बीईओ ने कहा कि कौशल विकास एवं सतत मूल्यांकन के महत्व को शिक्षा में इस प्रकार समाहित किया जाए कि बच्चों का कौशल विकास हो सके। प्रशिक्षक मुस्तन शेरूल्लाह, अनिरुद्ध कुमार मौर्य, आशुतोष सिंह ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान विज्ञान, गणित व भाषा विषय के बारे में गहनता से प्रशिक्षण दिया।
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प्रशिक्षकों ने विद्यालयों में बच्चों को प्रतिदिन पढ़ाई जाने वाले पाठ का मूल्यांकन करने का तरीका बताया गया। बच्चों को पठन-पाठन को रुचिपरक बनाने के अलावा प्रत्येक बच्चों का प्रोफाइल तैयार करने की जानकारी दी गई।
बच्चों में शब्द भंडार को बढ़ाना, मौखिक भाषा विकास आदि पर भी प्रशिक्षण के दौरान संवाद हुआ। इस दौरान समन्वयक मनोज यादव, कल्पना, रामललित, विजय बहादुर, अशोक कुमार, सरोजरानी, रामप्रताप सिंह, कुंवर प्रताप मल्ल, आरती सिंह, नरसिंह, मोहम्मद इब्राहिम, पीयूष कुमार, चंद्रभूषण, दुखराम, केपी सिंह, बृजसेन, इकबाल अहमद, लल्लन राम, अवधेश कुमार आदि मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक छात्र में शिक्षा का समावेश कराएं और उसका मूल्यांकन करें जिससे अपनी क्षमता का आकलन शिक्षक लगा सके और इसी आधार पर बच्चों में शिक्षा का संवाद बना सकें।
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बीईओ ने कहा कि कौशल विकास एवं सतत मूल्यांकन के महत्व को शिक्षा में इस प्रकार समाहित किया जाए कि बच्चों का कौशल विकास हो सके। प्रशिक्षक मुस्तन शेरूल्लाह, अनिरुद्ध कुमार मौर्य, आशुतोष सिंह ने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रशिक्षण के दौरान विज्ञान, गणित व भाषा विषय के बारे में गहनता से प्रशिक्षण दिया।
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प्रशिक्षकों ने विद्यालयों में बच्चों को प्रतिदिन पढ़ाई जाने वाले पाठ का मूल्यांकन करने का तरीका बताया गया। बच्चों को पठन-पाठन को रुचिपरक बनाने के अलावा प्रत्येक बच्चों का प्रोफाइल तैयार करने की जानकारी दी गई।
बच्चों में शब्द भंडार को बढ़ाना, मौखिक भाषा विकास आदि पर भी प्रशिक्षण के दौरान संवाद हुआ। इस दौरान समन्वयक मनोज यादव, कल्पना, रामललित, विजय बहादुर, अशोक कुमार, सरोजरानी, रामप्रताप सिंह, कुंवर प्रताप मल्ल, आरती सिंह, नरसिंह, मोहम्मद इब्राहिम, पीयूष कुमार, चंद्रभूषण, दुखराम, केपी सिंह, बृजसेन, इकबाल अहमद, लल्लन राम, अवधेश कुमार आदि मौजूद रहे।