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Siddharthnagar News: रहें होशियार.. योजनाओं में ठग कर रहे हैं सेंधमारी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। साइबर ठगों की अब सरकारी योजनाओं पर नजर है। वह योजनाओं का लाभ लेने वाले किसानों को ठगने के लिए सेंधमारी कर रहे हैं। अभी तक ई- केवाईसी के नाम पर किसानों से ठगी की थी। अब सोलरपंप के लिए आवेदन करने वाले किसानों को कॉल करके कागज में कमी आदि बताकर ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं।
आवेदन करने किसानों को ऐसे विश्वास में ले रहे हैं जैसे विभागीय अधिकारी हों। ऐसे में झांसे में आकर अगर बताए अनुसार काम किया तो अनुदान की बात तो दूर, घर की जमापूंजी भी चली जाएगी। पूर्व में ई- केवाईसी के नाम पर कई किसान ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्हें दो से 10 हजार रुपये तक चूना लग चुका है।
साइबर के जानकारों का कहना है कि अगर इस प्रकार से कोई काल आती है तो सतर्क हो जाएं। उनकी बात तो सुनें, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न दें और न ही मोबाइल से कुछ करें या ओटीपी आदि शेयर करें। क्योंकि विभाग और बैंक की ओर से कोई काल नहीं आती है। ऐसे में सतर्क होने से ही ठगी से बच सकते हैं।
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ठगी के हुए शिकार : जोगिया निवासी किसान रामप्रीत वर्मा को फोन आया कि सम्मान निधि के लिए ई-केवाईसी होनी है। नहीं तो रुपया नहीं मिलेगा। मोबाइल पर ही सब कुछ हो जाएगा।
जैसा बताया गया उन्होंने किया। कुछ घंटे बाद तीन मैसेज आए, और खाते से 19 हजार रुपये कट गए, जो धान बेचकर रखे थे। इसी प्रकार ई- केवाईसी सही कराने के नाम पर किसान सुखदेव यादव के खाते से पांच हजार रुपये कट गए, लेकिन लाज वस उन्होंने शिकायत नहीं की। ऐसी ठगी न जाने कितने किसानों के साथ हो रही है।
आबकारी विभाग का नकली पोर्टल बनाया : शराब की दुकानों के लिए लाटरी की व्यवस्था की गई है। आवेदन के लिए प्रदेश सरकार की ओर से पोर्टल लांच किया गया है। हूबहू उसी प्रकार का साइबर ठगों ने पोर्टल लांच कर दिया है।
समय रहते इसके बारे में शासन को जानकारी हुई और उसे बंद करवाने के साथ ही जांच शुरू कर दी। अगर ऐसी फेक साइड दिखे तो नजरअंदाज कर दें। क्योंकि यह ठगों की साइड है। भ्रम की स्थिति में तत्काल विभाग से जानकारी लें।
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सिद्धार्थनगर। साइबर ठगों की अब सरकारी योजनाओं पर नजर है। वह योजनाओं का लाभ लेने वाले किसानों को ठगने के लिए सेंधमारी कर रहे हैं। अभी तक ई- केवाईसी के नाम पर किसानों से ठगी की थी। अब सोलरपंप के लिए आवेदन करने वाले किसानों को कॉल करके कागज में कमी आदि बताकर ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं।
आवेदन करने किसानों को ऐसे विश्वास में ले रहे हैं जैसे विभागीय अधिकारी हों। ऐसे में झांसे में आकर अगर बताए अनुसार काम किया तो अनुदान की बात तो दूर, घर की जमापूंजी भी चली जाएगी। पूर्व में ई- केवाईसी के नाम पर कई किसान ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्हें दो से 10 हजार रुपये तक चूना लग चुका है।
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साइबर के जानकारों का कहना है कि अगर इस प्रकार से कोई काल आती है तो सतर्क हो जाएं। उनकी बात तो सुनें, लेकिन कोई प्रतिक्रिया न दें और न ही मोबाइल से कुछ करें या ओटीपी आदि शेयर करें। क्योंकि विभाग और बैंक की ओर से कोई काल नहीं आती है। ऐसे में सतर्क होने से ही ठगी से बच सकते हैं।
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ठगी के हुए शिकार : जोगिया निवासी किसान रामप्रीत वर्मा को फोन आया कि सम्मान निधि के लिए ई-केवाईसी होनी है। नहीं तो रुपया नहीं मिलेगा। मोबाइल पर ही सब कुछ हो जाएगा।
जैसा बताया गया उन्होंने किया। कुछ घंटे बाद तीन मैसेज आए, और खाते से 19 हजार रुपये कट गए, जो धान बेचकर रखे थे। इसी प्रकार ई- केवाईसी सही कराने के नाम पर किसान सुखदेव यादव के खाते से पांच हजार रुपये कट गए, लेकिन लाज वस उन्होंने शिकायत नहीं की। ऐसी ठगी न जाने कितने किसानों के साथ हो रही है।
आबकारी विभाग का नकली पोर्टल बनाया : शराब की दुकानों के लिए लाटरी की व्यवस्था की गई है। आवेदन के लिए प्रदेश सरकार की ओर से पोर्टल लांच किया गया है। हूबहू उसी प्रकार का साइबर ठगों ने पोर्टल लांच कर दिया है।
समय रहते इसके बारे में शासन को जानकारी हुई और उसे बंद करवाने के साथ ही जांच शुरू कर दी। अगर ऐसी फेक साइड दिखे तो नजरअंदाज कर दें। क्योंकि यह ठगों की साइड है। भ्रम की स्थिति में तत्काल विभाग से जानकारी लें।