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लाठीचार्ज के बाद फिर धरने पर बैठे लेखपाल
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 01 Sep 2016 10:56 PM IST
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- फोटो : amar ujala
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सिद्धार्थनगर। वेतन विसंगति दूर करने सहित छह सूत्रीय मांगों को लेकर नाराज लेखपाल कार्य बहिष्कार कर कलेक्ट्रेट परिसर में अनिश्चित कालीन धरने पर बैठ गए। नाराज लेखपालों का कहना है कि जब तक हमारी मांगें नहीं मानी जातीं, धरना अनवरत जारी रहेगा। मांगों को लेकर लखनऊ में हुए लाठी चार्ज पर भी रोष जताया।
जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार लेखपालों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। लेखपालों ने अपने हक की मांग को लेकर लखनऊ में धरने दिया तो सरकार ने लाठी जार्च करा दिया। संगठन सरकार के कृत्य की घोर निंदा करता है। उन्होंने कहा कि पूरे मनोयोग से काम करने वाले लेखपालों की मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसे संगठन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामकरन गुप्ता ने कहा कि वेतन विसंगति को दूर करते हुए वेतन में वृद्धि की जाए।
लेखपाल पदों पर चयन के लिए योग्यता स्नातक की जाए। लेखपालों का पदनाम बदलकर उप राजस्व निरीक्षक किया जाए। 2005 के बाद नियुक्त लेखपालों को पेंशन दिया जाए। स्थानांतरण नीति में बदलाव किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य प्रभावित होने के बाद सरकार को मांगें पूरी करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसके लिए संगठन के सभी लोगों को पूरे मनोयोग से साथ देने की जरूरत है।
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नौगढ़ तहसील अध्यक्ष कृष्ण भूषण दुबे, कोषाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव, रामदेव ने कहा कि अपने हक मांग करने वाले लेखपालों के आवाज को दबाने का काम सरकार ने किया है, जो निंदनीय है। इस दौरान देवानंद, दिनेश कुमार महेंद्र कुमार साहनी, दिलीप चौरसिया, रामसमुझ, विनय पांडेय, संजय कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।
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जिलाध्यक्ष अजय कुमार गुप्ता ने कहा कि सरकार लेखपालों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। लेखपालों ने अपने हक की मांग को लेकर लखनऊ में धरने दिया तो सरकार ने लाठी जार्च करा दिया। संगठन सरकार के कृत्य की घोर निंदा करता है। उन्होंने कहा कि पूरे मनोयोग से काम करने वाले लेखपालों की मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। इसे संगठन किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामकरन गुप्ता ने कहा कि वेतन विसंगति को दूर करते हुए वेतन में वृद्धि की जाए।
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लेखपाल पदों पर चयन के लिए योग्यता स्नातक की जाए। लेखपालों का पदनाम बदलकर उप राजस्व निरीक्षक किया जाए। 2005 के बाद नियुक्त लेखपालों को पेंशन दिया जाए। स्थानांतरण नीति में बदलाव किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्य प्रभावित होने के बाद सरकार को मांगें पूरी करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इसके लिए संगठन के सभी लोगों को पूरे मनोयोग से साथ देने की जरूरत है।
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नौगढ़ तहसील अध्यक्ष कृष्ण भूषण दुबे, कोषाध्यक्ष सुधीर श्रीवास्तव, रामदेव ने कहा कि अपने हक मांग करने वाले लेखपालों के आवाज को दबाने का काम सरकार ने किया है, जो निंदनीय है। इस दौरान देवानंद, दिनेश कुमार महेंद्र कुमार साहनी, दिलीप चौरसिया, रामसमुझ, विनय पांडेय, संजय कुमार, सुरेंद्र कुमार आदि मौजूद रहे।