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पट्टीदार ने रची थी हमले की साजिश
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 09 Apr 2016 11:55 PM IST
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जीआरपी व आरपीएफ ने पकड़ा जहरखुरानी गिरोह
- फोटो : अमर उजाला
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बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व ग्राम प्रधान रमेश पर पट्टीदारों ने ही हमला कराया था। जमीन के विवाद में गांव के पट्टीदार समेत गांव के दो लोगों ने शूटरों को हमले की सुपारी दी थी। शनिवार को पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए दो साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शूटरों की तलाश में पुलिस जुटी हुई है। पकड़े गए आरोपी थाना क्षेत्र के ग्राम खजुरिया सर्की निवासी मोईद मनिहार व दिनेश है।
कैंप कार्यालय पर मामले का खुलासा करते हुए एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि 31 मार्च को बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व ग्राम प्रधान रमेश को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या की कोशिश की थी।
घटना के समय ढेबरुआ थाना क्षेत्र के परसोहिया गांव से वॉलीबाल खेलकर साथी ग्राम पथरदेईया के बीडीसी सदस्य परवेज के साथ बाइक पर बैठकर ढेबरुआ आ रहे थे। एसपी ने बताया कि रमेश व दिनेश में पट्टे की जमीन से संबंधित पुराना विवाद चल रहा था।
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इसी बीच मोईद मनिहार से भी जमीन खरीद को लेकर विवाद हो गया। रमेश को लेकर दोनों एक हो गए और रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। दिनेश ने शूटरों से संपर्क किया। दो लाख रुपये में हत्या करने की सुपारी दी।
पेशगी के तौर पर शूटरों को 80 हजार रुपये भी दिया। बदमाशों ने दो दिन तक रमेश की रेकी करने के साथ होमवर्क भी किया। उनकी योजना थी कि एक ही वार हो और वह भी सटीक। गोली मारने के बाद भागने का प्लान भी बना लिया था। क्योंकि उन्हें मालूम था कि थोड़ी सी चूक भारी पड़ जाएगी।
गोली 32 बोर के तमंचे से चलाई गई थी। मौके से एक कारतूस भी बरामद हुआ। जो शायद अफरा-तफरी में गिर गया था। नजदीक से गले का निशाना लगा कर फायर किया गया था। संयोग था कि गोली बांह में लगी। बदमाश बाइक को आधा किलोमीटर की दूरी पर छोड़ कर भाग गए।
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कैंप कार्यालय पर मामले का खुलासा करते हुए एसपी अजय कुमार साहनी ने बताया कि 31 मार्च को बसपा के पूर्व जिलाध्यक्ष व ग्राम प्रधान रमेश को अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर हत्या की कोशिश की थी।
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घटना के समय ढेबरुआ थाना क्षेत्र के परसोहिया गांव से वॉलीबाल खेलकर साथी ग्राम पथरदेईया के बीडीसी सदस्य परवेज के साथ बाइक पर बैठकर ढेबरुआ आ रहे थे। एसपी ने बताया कि रमेश व दिनेश में पट्टे की जमीन से संबंधित पुराना विवाद चल रहा था।
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इसी बीच मोईद मनिहार से भी जमीन खरीद को लेकर विवाद हो गया। रमेश को लेकर दोनों एक हो गए और रास्ते से हटाने का प्लान बनाया। दिनेश ने शूटरों से संपर्क किया। दो लाख रुपये में हत्या करने की सुपारी दी।
पेशगी के तौर पर शूटरों को 80 हजार रुपये भी दिया। बदमाशों ने दो दिन तक रमेश की रेकी करने के साथ होमवर्क भी किया। उनकी योजना थी कि एक ही वार हो और वह भी सटीक। गोली मारने के बाद भागने का प्लान भी बना लिया था। क्योंकि उन्हें मालूम था कि थोड़ी सी चूक भारी पड़ जाएगी।
गोली 32 बोर के तमंचे से चलाई गई थी। मौके से एक कारतूस भी बरामद हुआ। जो शायद अफरा-तफरी में गिर गया था। नजदीक से गले का निशाना लगा कर फायर किया गया था। संयोग था कि गोली बांह में लगी। बदमाश बाइक को आधा किलोमीटर की दूरी पर छोड़ कर भाग गए।