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Siddharthnagar News: धुंधकारी के अत्याचार से जंगल छोड़कर गए आत्मदेव
Sat, 14 Mar 2026 01:28 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 14 Mar 2026 01:28 AM IST
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पकड़ी बाजार। क्षेत्र के छोटकी धनगढिया गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथावाचक पं. गणेश पांडेय ने धुंधकारी की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के तट पर आत्मदेव नमक ब्राह्मण रहते थे, जिनकी पत्नी का नाम धुंधली था पर कोई संतान नहीं होने के कारण वह बहुत दुःखी रहते थे। एक दिन पंडित आत्महत्या करने के लिए जंगल में गए। उसी समय एक संन्यासी ने पं. आत्मदेव को समझाया कि आत्महत्या करना घोर पाप है। संन्यासी ने फल दिया और कहा अपनी पत्नी को दे देना फल खाने से अवश्य पुत्र होगा। तीन दिन बाद गाय को बच्चा पैदा हुआ जिसका नाम गोकर्ण रखा। धुंधली के बच्चे का नाम धुंधकारी रखा गया, गोकर्ण महा ज्ञानी हुआ पर धुंधकारी महा खल हुआ। धुंधकारी के अत्याचार के दुःखी होकर आत्मदेव घर छोड़कर जगल चले गए। धुंधली कुएं में गिर कर मर गई । धुंधकारी घर में पांच वेश्याओं को लाकर रख लिया एक दिन वह रानी का हार चुरा कर लाया तो पांचों वेश्याएं सोते हुए धुंधकारी को मार कर भाग गई। धुंधकारी मरने के बाद प्रेत हो गया, जिसे गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुनाकर उसका उद्धार किया। कथा सुनकर प्रेत धुंधकारी भगवान के धाम चला गया।
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