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Siddharthnagar News: गिरफ्तार मानव तस्कर हस्त गौतम खोलेगा सीमा पर रैकेट का राज

Mon, 11 Sep 2023 11:46 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 11 Sep 2023 11:46 PM IST
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Arrested human smuggler Hasta Gautam will reveal the secret of the racket on the border.
गिरफ्तार मानव तस्कर हस्त गौतम खोलेगा सीमा पर रैकेट का राज
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नेपाल में पकड़े गए मानव तस्कर का बार्डर पर फैला है जाल

नेपाल पुलिस की पूछताछ में किए कई खुलासे, कई हो सकते हैं बेनकाब
संवाद न्यूज एजेंसी

सिद्धार्थनगर। अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर हस्त गौतम के नेपाल पुलिस के हत्थे चढ़ने के बाद बाॅर्डर क्षेत्र में फैले बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ हो सकता है। बताया जा रहा है कि आठ देशों में वांछित गौतम ने पूछताछ के दौरान नेपाल पुलिस को ऐसी कई जानकारी दी है, जिससे पता चलता है कि उसके तार सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों से भी जुड़े हैं। बता दें हस्त गौतम पर विभिन्न देशों में 200 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

नेपाल से लगने वाली जिले की 68 किलोमीटर सीमा तस्करी के लिए बदनाम है ही, यहां इंसानों की तस्करी भी बड़े पैमाने पर होती है। इसके लिए एक बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। इनके निशाने पर गरीब परिवार की लड़कियां और बच्चे होते हैं। मानव तस्करी के मामले पर गौर करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं। सुरक्षा एजेंसियां तीन साल में 1318 लड़के और लड़कियों को मानव तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर परिवार को सौंप चुकी हैं। यह वे मामले हैं जो मुख्य रास्तों से आवाजाही के दौरान पकड़े जाते हैं। सूत्रों की मानें तो तस्कर पगडंडियों से भी खुली सीमा पार कर जाते हैं।
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मुख्य और निचले स्तर पर काम करने वाले नहीं लगते हैं हाथ

जांच करने वाली टीम से जुड़े लोगों के मुताबिक मानव तस्करी की जड़ें बहुत ही गहरी हैं। कौन किसके लिए काम कर रहा है, यह किसी को पता नहीं है। पूरा रैकेट बस रुपये के लिए काम करता है। रैकेट में शामिल सबसे निचले स्तर पर काम करने गरीब और खाने को मोहताज परिवारों को झांसे में लेता है। वह संबंधित परिवार से मेलजोल बढ़ाता है। अच्छी- अच्छी बातें करता है। जब परिवार का विश्वास बन जाता है, तब उनके बच्चों को महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, पंजाब आदि जगहों के होटलों और कंपनियों में अच्छा रोजगार दिलाने की पेशकश करता है। जब परिवार उनके बहकावे में आ जाता है तो रैकेट की अगली कड़ी में शामिल लोग सक्रिय हो जाते हैं। उनका जिम्मा बच्चों को बॉर्डर पार कराना होता है। यहां से आगे रैकेट के तीसरी कड़ी में सक्रिय सदस्य उन्हें बड़े शहरों के होटलों, लाॅज और कंपनियों तक पहुंचा देते हैं।
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व्यक्ति के हिसाब से धनराशि

बताते हैं कि होटल, लॉज और कंपनी में इन बच्चों को पहुंचाने के बाद रैकेट में शामिल सभी सदस्य महीने के हिसाब से रकम वसूलते हैं। जैसे, अगर 15 हजार रुपये प्रति माह पर काम दिलाया गया है तो इसमें रैकेट इनसे पांच हजार रुपये प्रति माह लेते हैं।

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लड़कियों को गलत धंधे में धकेलने की बात आ चुकी है सामने

एक वर्ष पहले पंजाब के होटल में छापे की कार्रवाई में सात नेपाली लड़कियां मिली थीं। पूछताछ में बताया था कि कोई उन्हें कंपनी में काम दिलाने के लिए घर से लेकर सिद्धार्थनगर के रास्ते पंजाब ले गया था। वहां कुछ दिन एक बिना काम के एक स्थान पर रखा था। फिर होटल में वेटर का काम करने के लिए कहा। यहां कुछ दिन काम करने के बाद नाचने के लिए दबाव बनाने लगे। गलत कार्य करवाया। पुलिस ने उन्हें आजाद कराया तो वह अपने घर पहुंचीं।

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पहाड़ क्षेत्र की लड़कियां और बच्चे निशाने पर

पकड़े जाने के बाद एक बात हर बार सामने आती है कि पहाड़ी क्षेत्र के रहने वाले लोग मानव तस्करों के निशाने पर रहते हैं। रोजगार की कमी, भुखमरी, गरीबी इसके बड़े कारण हैं। मानव तस्कर रोजगार का झांसा देकर उन्हें आसानी से शिकार बना लेते हैं।

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भूकंप आने के बाद से बढ़ गई मानव तस्करी

वर्ष 2014 में आए भूकंप से नेपाल में सबकुछ तबाह हो गया था। खाने के लाले पड़ गए थे। इसके बाद तस्करों की नजर गरीबों पर पड़ी और धीरे-धीरे गरीबों के बच्चों को अच्छा रोजगार दिलाने का लालच देकर गिरफ्त में लेने लगे। नेपाल पुलिस की जांच में यह बात सामने आ चुकी है।


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इस वर्ष आए इतने मामले

वर्ष मामले महिला पुरुष तस्कर

२०२१ - २३६ २७७ २६३ २५५
२०२२ - २३२ २६७ १३५ १७५
२०२३ - २०५ १७२ २०४ अबतक १६१
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नोट- तीन साल में एसएसबी की सतर्कता के चलते १३१८ महिला और पुरुष को तस्करी होने से बचाया गया। वहीं, इस मामले में ५९१ आरोपियों को पकड़ा गया।

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एसएसबी के जवानों की सीमा पर नजर

मानव तस्करी के मामलों पर एसएसबी के जवानों की पैनी नजर है। ताकि किसी भी गरीब परिवार के बच्चों और लड़कियों को मानव तस्करी में संलिप्त व्यक्ति बहला-फुसलाकर नेपाल से भारत या भारत से नेपाल न ले जा सके। लगातार ऐसे लोगों को पकड़ा जा रहा है। लिखा-पढ़ी के एएचटीयू (एंटी ह्मन टै्रफिकिंग यूनिट) को सुुपुर्द कर दिया जा रहा है।
शक्ति सिंह, प्रभारी कमांडेंट, एसएसबी 43वीं वाहिनी
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