{"_id":"687405e5962a5097bd0ef30d","slug":"appealed-to-follow-the-path-of-righteousness-and-truth-siddharthnagar-news-c-227-1-sgkp1034-141090-2025-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: नेकी और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अपील की","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: नेकी और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अपील की
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन गुलदस्ता मातम के तत्वाधान में शनिवार की रात अशरे की छठवीं मजलिस हुई।
मुजफ्फरपुर से आए मौलाना कर्रार हुसैन मौलाई ने दीने इस्लाम की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए सभी से नेकी भलाई और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अपील की।
मौलाना ने कहा कि जो बात रसूल ने कही वो हदीस है। इमाम हुसैन पर जो रोये, जो कोई हुसैन का जिक्र करे या मजलिस में आकर बैठे या हुसैन के अजादारों की खिदमत करे वह इबादत में शुमार होता है।
मौलाना ने कहा कि मोहम्मद व आले मोहम्मद पर दुरूद भेजना सवाब (पुण्य) है और जो दुरूदो सलाम भेजता है उसके गुनाह भी माफ हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जो हजरत अली पर अकीदा ( आस्था) रखेगा उनकी बताई नेकी, भलाई और सच्चाई के रास्तों पर चलेगा वह इंसान कभी गुमराह नहीं होगा।
मौलाना ने मजलिस के आखिर में इमाम सज्जाद का मसायब बयान किया। जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद गमगीन हो गए। मजलिस से पूर्व मर्सियाख्वानी अंबर मेहंदी और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना शहकार हुसैन जैदी, मौलाना आदिल अब्बास, अफसर हल्लौरी, शबाब, मेहदी हैदर, काजिम रजा, नफीस, बेताब, काजिम कर्बलाई, आले रजा, अम्मार, शराफत, मोजिज मौजूद रहे।द
विज्ञापन
विज्ञापन
डुमरियागंज। तहसील क्षेत्र के कस्बा हल्लौर स्थित इमाम बारगाह वक्फ शाह आलमगीर सानी में अंजुमन गुलदस्ता मातम के तत्वाधान में शनिवार की रात अशरे की छठवीं मजलिस हुई।
मुजफ्फरपुर से आए मौलाना कर्रार हुसैन मौलाई ने दीने इस्लाम की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए सभी से नेकी भलाई और सच्चाई के रास्ते पर चलने की अपील की।
मौलाना ने कहा कि जो बात रसूल ने कही वो हदीस है। इमाम हुसैन पर जो रोये, जो कोई हुसैन का जिक्र करे या मजलिस में आकर बैठे या हुसैन के अजादारों की खिदमत करे वह इबादत में शुमार होता है।
विज्ञापन
मौलाना ने कहा कि मोहम्मद व आले मोहम्मद पर दुरूद भेजना सवाब (पुण्य) है और जो दुरूदो सलाम भेजता है उसके गुनाह भी माफ हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि जो हजरत अली पर अकीदा ( आस्था) रखेगा उनकी बताई नेकी, भलाई और सच्चाई के रास्तों पर चलेगा वह इंसान कभी गुमराह नहीं होगा।
मौलाना ने मजलिस के आखिर में इमाम सज्जाद का मसायब बयान किया। जिसे सुनकर सभी अकीदतमंद गमगीन हो गए। मजलिस से पूर्व मर्सियाख्वानी अंबर मेहंदी और उनके सहयोगी ने की। इस दौरान मौलाना शहकार हुसैन जैदी, मौलाना आदिल अब्बास, अफसर हल्लौरी, शबाब, मेहदी हैदर, काजिम रजा, नफीस, बेताब, काजिम कर्बलाई, आले रजा, अम्मार, शराफत, मोजिज मौजूद रहे।द
विज्ञापन