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निरीक्षण में बदला दिखा जिला अस्पताल

Tue, 10 May 2016 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Updated Tue, 10 May 2016 10:26 PM IST
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Altered in the district hospital inspection
निरीक्षण - फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को जिला अस्पताल में कदम रखने वाला हर कोई हैरत में था। जो अस्पताल पूरे जिले में अपनी बदहाली के लिए चर्चित है, वह एकदम से अलग कलेवर में था। प्रवेश द्वार से लेकर हर कोने तक चूने का छिड़काव था।
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फर्श चमचमा रही थी और वार्डों में बेड पर लकदक सफेद चादर तनी हुई थी। गैलरी, कमरे और दरवाजों के बाहर रंग-बिरंगे फूलों से सजे गमले सुखद अहसास करा रहे थे। यही नहीं डॉक्टर भी सुबह 8 बजे से ही अपने चेंबर में पहुंच चुके थे। मरीजों की भीड़ से घिरे डॉक्टर इत्मीनान से उपचार कर रहे थे।
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ओपीडी में पर्ची कटाने के लिए लंबी लाइन थी तो रोगी सहायता केंद्र भी सक्रिय रहा। जिला अस्पताल के हालात से अच्छी तरह वाकिफ लोग समझ नहीं पा रहे थे कि आखिर ऐसा कौन सा चमत्कार हुआ जो एक दिन में अस्पताल के दिन बदल गए। दरअसल, यह चमत्कार नहीं, बल्कि सीएम के दूत के आगमन की हनक थी। व्यवस्थाएं देख लोगों की जुबां से बरबस ही फूट रहा था कि काश, सीएम साहब के ऐसे दूत हर महीने आते रहें।
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मुख्यमंत्री के सलाहकार व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण निदेशालय के विशेष कार्याधिकारी डॉ. विकास सेठी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम मंगलवार को जिले में थी। टीम को जिला अस्पताल का दौरा करना था।
इसकी सूचना कई दिनों पहले से ही जिले में आ चुकी थी। लिहाजा अस्पताल प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना था। मंगलवार को तो इस तरह अस्पताल को सजाया गया कि यहां आने वाले एकबारगी असमंजस में ही पड़ गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि वही जिला अस्पताल है, जिसमें डॉक्टरों की कमी, मनमानी, दवाओं के अभाव, सुविधाओं की कमी और दुर्व्यवस्थाओं के कारण लोग अस्पताल प्रशासन कोसते रहते हैं।
जिला अस्पताल पिछले साल से बीमार पड़ा हुआ है। अस्पताल में न सर्जन हैं और न कोई फिजिशियन। डॉक्टरों के आए दिन गायब रहने, ड्यूटी न करने के कारण मरीज बेहाल रहते हैं। उम्मीद के साथ आने वाले यहां से मायूस लौट जाते हैं।

जिम्मेदार इसके लिए हमेशा से संसाधनों का रोना रोते हैं, लेकिन मंगलवार को सीएम के दूत के आगमन न संसाधनों का अभाव दिखा और न ही डॉक्टरों की व्यस्तता। हर कोई पूरी मुस्तैदी के साथ न सिर्फ ड्यूटी कर रहा था, बल्कि मरीजों को संतुष्ट करने में लीन रहे। यही कारण था कि निरीक्षण पर आए डॉ.विकास सेठी एक नजर में ही अस्पताल को पास कर चलते बने। उन्होंने बमुश्किल 10-15 मिनट जिला अस्पताल में गुजारे। 
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