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सारी कवायद फेल, धरी रही गईं हिदायतें
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 01 Apr 2017 10:48 PM IST
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जोगिया के करौंदा में नही हो रही गेंहू खरीद।
- फोटो : अमर उजाला
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सिद्धार्थनगर। गेहूं की खरीद को लेकर शासन की सख्त हिदायत और नियम कानून पहले दिन ही ठेंगे पर रहा। खरीददारी के पहले दिन अधिकतर क्रय केंद्र जहां बंद मिले, वहीं जो क्रय केंद्र खुले रहे, वहां किसानों का गेहूं नहीं पहुंचा। 1625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद करने का इस वर्ष शासन ने रेट तय कर दिया है। खरीददारी से पहले विभाग के आला अधिकारियों के अलावा सांसद विधायकों की चेतावनी का विभाग पर कोई असर नहीं रहा। बिक्री के लिए गेहूं न आने का बहाना बनाकर तौल के कांटे क्रय केंद्र के अंदर पाए गए, वहीं कई स्थानों पर किसान बिचौलियों को गेहूं बेचते नजर आए।
सिद्धार्थनगर जिले में इस बार गेहूं की खरीद के लिए तय बार पिछले वर्ष के 94 क्रय केंद्रों के स्थान पर इस वर्ष महज 64 क्रय केंद्र पूरे जिले में स्थापित किए गए हैं। पहली अप्रैल से गेहूं की खरीद के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आवश्यक इंतजाम के साथ खरीद शुरू करने का निर्देश शासन स्तर से निर्गत किया गया था। बावजूद इसके क्रय केंद्रों पर कोई इंतजाम नहीं दिखा। क्रय केंद्रों पर न तो किसानों के बैठने की व्यवस्था दिखी न तो पेयजल मुहैया कराने के संसाधन। पहले दिन अधिकतर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा और इलेक्ट्रॉनिक कांटा व स्टेशनरी का अभाव बताकर केंद्रों को बंद रखा गया। जोगिया विकास खंड में जम्हिरिया और नगपरा में बनाया गया क्रय केंद्र पहले दिन ही बंद रहा जिससे स्थानीय किसान जो गेहूं बेंचने के लिए क्रय केंद्र पहुंचे थे उन्हें निराश होकर बिचौलियों को अपना गेहूं बेंचना पड़ा।
दोनों समितियों के प्रभारी गौरीशंकर का कहना है कि विभाग से स्टेशनरी नहीं मिली और बैनर भी अभी छप कर नहीं मिला। स्टेशनरी आने पर खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाएंगे। जिले में 120 हजार मिट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य इस बार निर्धारित है जो पिछली बार महज 60 हजार मिट्रिक का था। क्रय केंद्रों की उदासीनता के चलते इस बार तय लक्ष्य तक पहुंचना टेढ़ी खीर होगी क्योंकि बिचौलियों ने अपने नेटवर्क से गेहूं की खरीद का काम प्रारंभ करवा दिया है। इस संबंध में खाद्य विपणन अधिकारी जितेंद्र यादव का कहना है कि शिकायत जहां से भी मिली है उस क्रय केंद्र की जानकारी जिलाधिकारी को दी गई है। आवश्यक कार्रवाई डीएम के माध्यम से होगी। एडीएम बाबूराम का कहना है कि कुछ क्रय केंद्रों के खिलाफ शिकायत मिली है। जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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सिद्धार्थनगर जिले में इस बार गेहूं की खरीद के लिए तय बार पिछले वर्ष के 94 क्रय केंद्रों के स्थान पर इस वर्ष महज 64 क्रय केंद्र पूरे जिले में स्थापित किए गए हैं। पहली अप्रैल से गेहूं की खरीद के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आवश्यक इंतजाम के साथ खरीद शुरू करने का निर्देश शासन स्तर से निर्गत किया गया था। बावजूद इसके क्रय केंद्रों पर कोई इंतजाम नहीं दिखा। क्रय केंद्रों पर न तो किसानों के बैठने की व्यवस्था दिखी न तो पेयजल मुहैया कराने के संसाधन। पहले दिन अधिकतर क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा और इलेक्ट्रॉनिक कांटा व स्टेशनरी का अभाव बताकर केंद्रों को बंद रखा गया। जोगिया विकास खंड में जम्हिरिया और नगपरा में बनाया गया क्रय केंद्र पहले दिन ही बंद रहा जिससे स्थानीय किसान जो गेहूं बेंचने के लिए क्रय केंद्र पहुंचे थे उन्हें निराश होकर बिचौलियों को अपना गेहूं बेंचना पड़ा।
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दोनों समितियों के प्रभारी गौरीशंकर का कहना है कि विभाग से स्टेशनरी नहीं मिली और बैनर भी अभी छप कर नहीं मिला। स्टेशनरी आने पर खरीद के लिए क्रय केंद्र खोले जाएंगे। जिले में 120 हजार मिट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य इस बार निर्धारित है जो पिछली बार महज 60 हजार मिट्रिक का था। क्रय केंद्रों की उदासीनता के चलते इस बार तय लक्ष्य तक पहुंचना टेढ़ी खीर होगी क्योंकि बिचौलियों ने अपने नेटवर्क से गेहूं की खरीद का काम प्रारंभ करवा दिया है। इस संबंध में खाद्य विपणन अधिकारी जितेंद्र यादव का कहना है कि शिकायत जहां से भी मिली है उस क्रय केंद्र की जानकारी जिलाधिकारी को दी गई है। आवश्यक कार्रवाई डीएम के माध्यम से होगी। एडीएम बाबूराम का कहना है कि कुछ क्रय केंद्रों के खिलाफ शिकायत मिली है। जांच करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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